नशा मुक्त भारत अभियान: सामाजिक न्याय मंत्रालय ने समझाए नशे से जुड़े 5 अहम शब्द, हेल्पलाइन 14446 जारी
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के तहत एक नई पहल शुरू की है, जिसमें राष्ट्रीय नशामुक्ति हेल्पलाइन नंबर 14446 जारी किया गया है। मंत्रालय ने नशे से जुड़े पाँच प्रमुख शब्दों की सरल व्याख्या करते हुए नागरिकों से अपील की है कि वे 'नशामुक्ति मित्र' बनकर एक स्वस्थ भारत के निर्माण में भागीदार बनें। यह अभियान अब देश के सभी जिलों में सक्रिय है और अब तक 29.05 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच चुका है।
नशे से जुड़े 5 अहम शब्दों का अर्थ
मंत्रालय ने आम जनता की समझ के लिए नशीले पदार्थों से संबंधित पाँच प्रमुख शब्दों को परिभाषित किया है।
तीव्र नशा (Acute Intoxication): नशीले पदार्थ के सेवन के तुरंत बाद व्यक्ति की चेतना, व्यवहार और धारणा में आने वाला बदलाव। यह स्थिति अस्थायी होती है, लेकिन खतरनाक हो सकती है।
ओवरडोज (Overdose): किसी दवा या नशीले पदार्थ की अत्यधिक मात्रा के सेवन से उत्पन्न गंभीर शारीरिक या मानसिक दुष्प्रभाव, जो जानलेवा भी हो सकते हैं।
विदड्रॉल (Withdrawal): लंबे समय तक नशीले पदार्थ का सेवन करने के बाद अचानक उसे छोड़ने पर शरीर में उत्पन्न होने वाले लक्षण, जैसे बेचैनी, दर्द और मानसिक अस्थिरता।
हानिकारक उपयोग (Harmful Use): नशीले पदार्थ का ऐसा सेवन जो व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन दोनों को नुकसान पहुँचाए।
निर्भरता (Dependence): पदार्थ के सेवन की बढ़ती लालसा और उस पर नियंत्रण खो देने की स्थिति, जिसमें व्यक्ति बिना उसके सामान्य जीवन जीने में असमर्थ हो जाता है।
नशा मुक्त भारत अभियान की पहुँच और विस्तार
मंत्रालय द्वारा 6 अगस्त को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) को 15 अगस्त 2020 को नशीले पदार्थों के सेवन के प्रति संवेदनशील 272 जिलों में शुरू किया गया था। अगस्त 2023 से इस अभियान का दायरा बढ़ाकर देश के सभी जिलों तक कर दिया गया है।
अभियान का उद्देश्य जागरूकता फैलाने, समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और नशामुक्ति के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचा तैयार करके नशीले पदार्थों के सेवन को रोकना और कम करना है। इसमें उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
29 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँची जागरूकता
राज्यसभा में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा ने सांसदों कनाद पुरकायस्थ और बाबूभाई जेसंगभाई देसाई के लिखित प्रश्नों के उत्तर में बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से यह अभियान देश भर में 29.05 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच चुका है।
इनमें 11.05 करोड़ से अधिक युवा और 7.81 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं — यह आँकड़ा दर्शाता है कि अभियान का फोकस विशेष रूप से उन वर्गों पर है जो नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं।
सरकार की अपील और हेल्पलाइन
मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर नागरिकों से आह्वान किया: 'नशे को ना कहने, जागरूकता फैलाने और नशामुक्त भारत के संकल्प को मजबूत करने की शपथ लें।' साथ ही कहा गया, 'नशामुक्ति मित्र बनें और स्वस्थ, नशामुक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।'
नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों और उनके परिजनों के लिए राष्ट्रीय नशामुक्ति हेल्पलाइन 14446 पर निःशुल्क सहायता उपलब्ध है। आने वाले समय में अभियान के तहत और अधिक शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ने की योजना है।