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देश में 15.10 करोड़ लोग शराब के आदी: लोकसभा में राज्य मंत्री बीएल वर्मा का खुलासा

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देश में 15.10 करोड़ लोग शराब के आदी: लोकसभा में राज्य मंत्री बीएल वर्मा का खुलासा

सारांश

AIIMS के राष्ट्रीय सर्वेक्षण पर आधारित आँकड़े बताते हैं कि भारत में 15.10 करोड़ लोग शराब के आदी हैं और 40 लाख किशोर ओपिओइड उपयोगकर्ता हैं। सरकार ने नशा मुक्त भारत अभियान के ज़रिए 29.68 करोड़ लोगों तक पहुँच बनाई है और 76 नए जिला नशा मुक्ति केंद्र स्वीकृत किए हैं।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 15.10 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं — यह 18-75 वर्ष के वयस्कों में सर्वाधिक उपयोग किया जाने वाला नशा है।
शराब के बाद 2.90 करोड़ गांजा, 1.90 करोड़ ओपिओइड, 1.10 करोड़ सेडेटिव्स और 60 लाख इनहेलेंट्स उपयोगकर्ता हैं।
10-17 वर्ष के किशोरों में 40 लाख ओपिओइड, 30 लाख शराब और 30 लाख इनहेलेंट्स उपयोगकर्ता पाए गए।
नशा मुक्त भारत अभियान अब तक 29.68 करोड़ लोगों तक पहुँचा, जिनमें 11.43 करोड़ युवा और 8.05 करोड़ महिलाएँ शामिल।
2024-25 में 55 और 2025-26 में 21 नए जिला नशा मुक्ति केंद्र स्वीकृत किए गए।
राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने 23 जुलाई 2026 को लोकसभा में यह जानकारी लिखित जवाब के रूप में दी।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने 23 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक लिखित जवाब के ज़रिए बताया कि राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 18 से 75 वर्ष के वयस्कों में शराब सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला नशीला पदार्थ है और देश में करीब 15.10 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं। यह आँकड़ा नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर द्वारा किए गए भारत के पहले राष्ट्रीय नशा सर्वेक्षण पर आधारित है।

नशे की व्यापकता: मुख्य आँकड़े

मंत्री के लिखित जवाब में सामने आए आँकड़ों के अनुसार, शराब के बाद 2.90 करोड़ लोग गांजा (कैनाबिस), 1.90 करोड़ लोग ओपिओइड, 1.10 करोड़ लोग नींद की दवाओं (सेडेटिव्स) और 60 लाख लोग इनहेलेंट्स का सेवन करते हैं। गौरतलब है कि यह सर्वेक्षण देश में नशे की समस्या की वास्तविक गहराई को पहली बार व्यापक रूप से उजागर करता है।

चिंताजनक रूप से, 10 से 17 वर्ष के बच्चों और किशोरों में भी नशे का प्रसार देखा गया है। सर्वेक्षण के अनुसार इस आयु वर्ग में करीब 40 लाख ओपिओइड उपयोगकर्ता, 30 लाख शराब पीने वाले, 30 लाख इनहेलेंट्स उपयोगकर्ता और 20 लाख गांजा उपयोगकर्ता हैं।

सरकार की नीति और योजनाएँ

बीएल वर्मा ने कहा, 'सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नशे की मांग को कम करने, नशा मुक्ति, पुनर्वास और सामाजिक न्याय से जुड़ी केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लगातार मजबूत कर रहा है, ताकि समय पर आर्थिक सहायता, अधिक पारदर्शिता और बेहतर सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।' उन्होंने बताया कि फंड जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने, नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने और पुनर्वास सेवाओं की पहुँच व्यापक करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं।

मंत्रालय ने नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन और अटल वयो अभ्युदय जैसी योजनाओं को लागू करने वाले एनजीओ को अनुदान देने के लिए संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया है, जिससे दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता कम हुई है और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनी है।

नशा मुक्त भारत अभियान की उपलब्धियाँ

15 अगस्त 2020 को शुरू किए गए नशा मुक्त भारत अभियान को अगस्त 2023 में देश के सभी जिलों तक विस्तारित किया गया। अब तक इस अभियान के माध्यम से 29.68 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई गई है, जिनमें 11.43 करोड़ से अधिक युवा और 8.05 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, 1.17 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र इस अभियान से जुड़े हैं। देशभर में 28.29 लाख से अधिक लोगों का उपचार और पुनर्वास किया जा चुका है, और 21.73 लाख शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए गए हैं।

ढाँचागत विस्तार और डिजिटल पहल

उपचार सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए मंत्रालय ने नशा मुक्त भारत अभियान 2.0 मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिससे नागरिक निकटतम नशा मुक्ति केंद्र का पता लगा सकते हैं। 2024-25 में 55 नए जिला नशा मुक्ति केंद्र स्वीकृत किए गए, जबकि 2025-26 में 21 अतिरिक्त केंद्र शुरू किए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब किशोरों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने नीति-निर्माताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाई है। आगे जागरूकता, रोकथाम और उपचार तीनों मोर्चों पर निरंतर प्रयासों की दरकार बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चिंता 10-17 वर्ष के किशोरों में 40 लाख ओपिओइड उपयोगकर्ताओं की है — यह संकेत देता है कि नशे की समस्या अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रही। सरकार के अभियान की पहुँच प्रभावशाली दिखती है, लेकिन 29.68 करोड़ तक 'पहुँच' और वास्तविक व्यवहार परिवर्तन के बीच का अंतर अभी भी मापना बाकी है। 28.29 लाख लोगों के उपचार का आँकड़ा कुल 15.10 करोड़ शराब उपयोगकर्ताओं की तुलना में बेहद कम है, जो उपचार क्षमता और माँग के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है। बिना सत्यापन-योग्य परिणाम ढाँचे के, अभियान की सफलता के दावे अधूरे रहेंगे।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में कितने लोग शराब के आदी हैं?
राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में करीब 15.10 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं। यह 18 से 75 वर्ष के वयस्कों में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला नशीला पदार्थ है।
भारत में किशोरों में नशे की स्थिति क्या है?
AIIMS के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार 10 से 17 वर्ष के किशोरों में लगभग 40 लाख ओपिओइड उपयोगकर्ता, 30 लाख शराब पीने वाले, 30 लाख इनहेलेंट्स उपयोगकर्ता और 20 लाख गांजा उपयोगकर्ता हैं। यह आँकड़ा बाल एवं किशोर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है।
नशा मुक्त भारत अभियान क्या है और इसकी उपलब्धियाँ क्या हैं?
नशा मुक्त भारत अभियान 15 अगस्त 2020 को शुरू किया गया था और अगस्त 2023 में इसे देश के सभी जिलों तक विस्तारित किया गया। अब तक इसके ज़रिए 29.68 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई गई है, 28.29 लाख से अधिक लोगों का उपचार हुआ है और 1.17 लाख नशा मुक्ति मित्र जोड़े गए हैं।
सरकार ने नशा मुक्ति केंद्रों के विस्तार के लिए क्या कदम उठाए हैं?
2024-25 में 55 नए जिला नशा मुक्ति केंद्र स्वीकृत किए गए और 2025-26 में 21 अतिरिक्त केंद्र शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही नशा मुक्त भारत अभियान 2.0 मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है, जिससे नागरिक निकटतम केंद्र का पता लगा सकते हैं।
यह राष्ट्रीय नशा सर्वेक्षण किसने किया और इसका आधार क्या है?
यह सर्वेक्षण नई दिल्ली स्थित AIIMS के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर द्वारा किया गया था। यह भारत में नशे के उपयोग पर किया गया पहला व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण है, जिस पर सरकार की नशा-विरोधी रणनीति आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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