देश में 15.10 करोड़ लोग शराब के आदी: लोकसभा में राज्य मंत्री बीएल वर्मा का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने 23 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक लिखित जवाब के ज़रिए बताया कि राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 18 से 75 वर्ष के वयस्कों में शराब सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला नशीला पदार्थ है और देश में करीब 15.10 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं। यह आँकड़ा नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर द्वारा किए गए भारत के पहले राष्ट्रीय नशा सर्वेक्षण पर आधारित है।
नशे की व्यापकता: मुख्य आँकड़े
मंत्री के लिखित जवाब में सामने आए आँकड़ों के अनुसार, शराब के बाद 2.90 करोड़ लोग गांजा (कैनाबिस), 1.90 करोड़ लोग ओपिओइड, 1.10 करोड़ लोग नींद की दवाओं (सेडेटिव्स) और 60 लाख लोग इनहेलेंट्स का सेवन करते हैं। गौरतलब है कि यह सर्वेक्षण देश में नशे की समस्या की वास्तविक गहराई को पहली बार व्यापक रूप से उजागर करता है।
चिंताजनक रूप से, 10 से 17 वर्ष के बच्चों और किशोरों में भी नशे का प्रसार देखा गया है। सर्वेक्षण के अनुसार इस आयु वर्ग में करीब 40 लाख ओपिओइड उपयोगकर्ता, 30 लाख शराब पीने वाले, 30 लाख इनहेलेंट्स उपयोगकर्ता और 20 लाख गांजा उपयोगकर्ता हैं।
सरकार की नीति और योजनाएँ
बीएल वर्मा ने कहा, 'सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नशे की मांग को कम करने, नशा मुक्ति, पुनर्वास और सामाजिक न्याय से जुड़ी केंद्र प्रायोजित योजनाओं को लगातार मजबूत कर रहा है, ताकि समय पर आर्थिक सहायता, अधिक पारदर्शिता और बेहतर सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।' उन्होंने बताया कि फंड जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने, नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने और पुनर्वास सेवाओं की पहुँच व्यापक करने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं।
मंत्रालय ने नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन और अटल वयो अभ्युदय जैसी योजनाओं को लागू करने वाले एनजीओ को अनुदान देने के लिए संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया है, जिससे दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता कम हुई है और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनी है।
नशा मुक्त भारत अभियान की उपलब्धियाँ
15 अगस्त 2020 को शुरू किए गए नशा मुक्त भारत अभियान को अगस्त 2023 में देश के सभी जिलों तक विस्तारित किया गया। अब तक इस अभियान के माध्यम से 29.68 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई गई है, जिनमें 11.43 करोड़ से अधिक युवा और 8.05 करोड़ महिलाएँ शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, 1.17 लाख से अधिक नशा मुक्ति मित्र इस अभियान से जुड़े हैं। देशभर में 28.29 लाख से अधिक लोगों का उपचार और पुनर्वास किया जा चुका है, और 21.73 लाख शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए गए हैं।
ढाँचागत विस्तार और डिजिटल पहल
उपचार सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए मंत्रालय ने नशा मुक्त भारत अभियान 2.0 मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिससे नागरिक निकटतम नशा मुक्ति केंद्र का पता लगा सकते हैं। 2024-25 में 55 नए जिला नशा मुक्ति केंद्र स्वीकृत किए गए, जबकि 2025-26 में 21 अतिरिक्त केंद्र शुरू किए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब किशोरों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने नीति-निर्माताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाई है। आगे जागरूकता, रोकथाम और उपचार तीनों मोर्चों पर निरंतर प्रयासों की दरकार बनी रहेगी।