बिहार शराबबंदी जारी रहेगी, दूसरे राज्यों की शराब कंपनियों पर अब होगी एफआईआर: मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने गुरुवार, 13 अगस्त को पटना में मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि राज्य में शराबबंदी कानून को समाप्त करने या उसमें किसी भी प्रकार का संशोधन करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कानून पहले भी लागू था, आज भी है और भविष्य में भी जारी रहेगा। सोशल मीडिया पर शराबबंदी खत्म होने को लेकर फैल रही अफवाहों को मंत्री ने सिरे से खारिज किया।
शराबबंदी की समीक्षा और मौजूदा स्थिति
मंत्री मदन सहनी ने बताया कि शराबबंदी कानून को लेकर विभाग स्तर पर समय-समय पर समीक्षा की जाती है और पिछले महीने भी इसकी समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि पिछले करीब दस वर्षों से बिहार में शराबबंदी और नशाबंदी लागू है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में अधिक मात्रा में शराब जब्त की गई है और विभाग की ओर से लगातार छापेमारी जारी है।
महिलाओं और वंचित वर्गों को मिला लाभ
मंत्री ने कहा कि शराबबंदी लागू करने के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मंशा थी कि इससे खासकर महिलाओं, दलितों, अनुसूचित जाति-जनजाति और अति पिछड़ा वर्ग के परिवारों को लाभ मिले। उन्होंने बताया कि पहले ऐसे कई लोग थे जो रोज़ाना करीब ₹500 कमाते थे और उसका बड़ा हिस्सा नशे पर खर्च कर देते थे, जिससे वे घर खाली हाथ लौटते थे। शराबबंदी के बाद ऐसे परिवारों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव देखा गया है।
दूसरे राज्यों की शराब कंपनियों पर एफआईआर की नई कार्रवाई
मंत्री मदन सहनी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि अब दूसरे राज्यों से सीमा पार कर बिहार में आने वाली शराब के मामलों में संबंधित शराब कंपनियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले महीने ही विभाग को इस संबंध में निर्देश दिया गया था और इसकी शुरुआत हो चुकी है। यह कदम राज्य में बाहरी शराब की आपूर्ति की श्रृंखला को तोड़ने की दिशा में उठाया गया है।
नशीले पदार्थों पर भी कड़ी कार्रवाई
मंत्री ने बताया कि शराब के अलावा सूखे नशे के खिलाफ भी लगातार अभियान चलाया जा रहा है। हेरोइन, स्मैक और गांजा समेत अन्य मादक पदार्थों की जब्ती पहले की तुलना में बढ़ी है। पूर्णिया में सामने आए एक मामले में भी विभाग कार्रवाई कर रहा है। कांवरियों के नशे की हालत में यात्रा करने संबंधी सवाल पर मंत्री ने कहा कि इसके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और बिना प्रमाण के ऐसा आरोप स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आगे की राह
राज्य सरकार का रुख स्पष्ट है — शराबबंदी में कोई ढील नहीं दी जाएगी। कंपनी स्तर पर एफआईआर की नई नीति और लगातार छापेमारी से यह संकेत मिलता है कि बिहार सरकार इस कानून को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।