बिहार में जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या <b>छह</b>, राजनीतिक हलचल तेज
सारांश
Key Takeaways
- मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से छह लोगों की मौत।
- पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया।
- विशेष जांच दल का गठन।
- शराबबंदी कानून की समीक्षा पर चर्चा।
- राजनीतिक हलचल तेज।
मोतिहारी, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के पूर्वी चंपारण क्षेत्र में जहरीली शराब के सेवन से मरने वालों की संख्या अब छह हो गई है। एक और व्यक्ति की मौत होने के बाद यह संख्या बढ़ी। यह घटना तब सामने आई जब गुरुवार को तीन लोगों के मरने की सूचना मिली थी।
मोतिहारी के एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि तुरकौलिया और रघुनाथपुर में हुई इन मौतों के संबंध में एक दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इस मामले में हत्या का मामला दर्ज किया है और तुरकौलिया के थाना प्रभारी को कर्तव्यहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है।
मुख्य साजिशकर्ता के रूप में परसौना के नागा राय, हरदिया गांव के जम्मू बैठा, और चौकीदार भरत राय सहित कई अन्य को गिरफ्तार किया गया है। इस संदर्भ में अन्य फरार आरोपियों के खिलाफ छापेमारी की जा रही है। उच्च-स्तरीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि 2 और 3 अप्रैल को अवैध शराब के खिलाफ एक अभियान चलाया गया था, जिसमें 39 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 1927 लीटर देशी शराब बरामद की गई। इन मौतों ने राज्य में राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की है। बिहार में 2016 से शराब की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है।
विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि यह घटना एक बार फिर एनडीए सरकार की शराबबंदी कानून की विफलता को उजागर करती है। शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक बिहार में जहरीली शराब से 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। इसके अलावा, कई दर्जन लोग अपनी आंखों की रोशनी भी खो चुके हैं।