शराबबंदी: नीतिगत सुधारों की आवश्यकता, कहते हैं माधव आनंद
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पटना, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में एक दशक से अधिक पुराना शराबबंदी कानून मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की नई सरकार के गठन के बाद एक बार फिर से राजनीतिक चर्चाओं में आ गया है।
एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने राज्य में शराबबंदी की व्यापक समीक्षा की मांग को फिर से उठाया है। उनका मानना है कि जमीनी हकीकतों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा नीति का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है।
उन्होंने गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की और बाद में मीडिया से कहा कि शराबबंदी को लागू करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने नीतिगत सुधार, जागरूकता अभियानों और नशामुक्ति पहलों की आवश्यकता पर जोर दिया।
आनंद ने कहा कि इस कानून को लागू हुए 10 साल हो चुके हैं। अब यह समय है कि इसकी गंभीरता से समीक्षा की जाए। उन्होंने विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया है, जहां कई विधायकों ने इस विचार का समर्थन किया है, हालांकि कुछ ने इसका विरोध भी किया।
उन्होंने कहा कि मैं सदन के अंदर उतना ही दृढ़ था, जितना आज बाहर हूं। शराबबंदी नीति की संपूर्ण समीक्षा बेहद जरूरी है। माधव आनंद ने शराबबंदी के कारण होने वाले राजस्व घाटे की ओर भी इशारा किया और कहा कि बिहार को विकास की गति तेज करने के लिए मजबूत वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति बिहार के हित में नहीं है। विकास के लिए राजस्व अत्यंत आवश्यक है और कानून की समीक्षा करते समय सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए।
माधव आनंद ने कहा कि उन्होंने अपनी चिंताएं अपनी ही सरकार के सामने रखी हैं, जिसका नेतृत्व सम्राट चौधरी कर रहे हैं।
इससे पहले, जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक अनंत सिंह ने भी शराबबंदी नीति की समीक्षा की इसी तरह की मांग उठाई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में लागू किया गया शराबबंदी कानून, बिहार की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली नीतियों में से एक रहा है। इसके समर्थक यह तर्क करते हैं कि इसने शराबखोरी पर रोक लगाने और सामाजिक स्थितियों को बेहतर बनाने में सहायता की है।
हालांकि, इसके आलोचक अवैध व्यापार, इसे लागू करने में आने वाली चुनौतियों और राजस्व घाटे की ओर इशारा करते हैं।