14 अगस्त 2026
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बिहार शराबबंदी समीक्षा: पप्पू यादव ने मांझी का समर्थन किया, 5-स्टार होटलों के लिए अलग नियमों की वकालत

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बिहार शराबबंदी समीक्षा: पप्पू यादव ने मांझी का समर्थन किया, 5-स्टार होटलों के लिए अलग नियमों की वकालत

सारांश

बिहार की शराबबंदी नीति पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है — अब निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने मांझी की समीक्षा माँग का समर्थन किया है। राजस्व नुकसान और अवैध कारोबार के आरोपों के बीच यह बहस चुनावी साल में नीतीश सरकार के लिए नई चुनौती बन सकती है।

मुख्य बातें

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 14 अगस्त को HAM संरक्षक जीतन राम मांझी की बिहार शराबबंदी समीक्षा माँग का समर्थन किया।
पप्पू यादव ने सुझाव दिया कि स्कूलों और मंदिरों के पास प्रतिबंध यथावत रहें, जबकि 5-स्टार और 7-स्टार होटलों के लिए अलग नियम बनाए जाएँ।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में बिहार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और अवैध शराब कारोबार फल-फूल रहा है।
शराबबंदी सर्वे एजेंसी को JDU द्वारा कथित तौर पर कानूनी नोटिस भेजे जाने की पृष्ठभूमि में यह बयान आया है।
बिहार में 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी नीति एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है।

बिहार की शराबबंदी नीति पर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी की शराबबंदी समीक्षा की मांग का खुलकर समर्थन किया। 14 अगस्त को दिल्ली से पटना पहुँचने के बाद मीडिया से बात करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा ज़रूरी है।

मांझी की मांग और पप्पू यादव का समर्थन

राज्य सरकार के सहयोगी और HAM के संरक्षक जीतन राम मांझी ने गुजरात मॉडल की तर्ज पर शराबबंदी को और सख्त बनाने की वकालत की थी। अब पप्पू यादव ने भी इस माँग को अपना समर्थन देते हुए कहा कि सरकार को मौजूदा ढाँचे की समीक्षा करनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब कथित तौर पर एक सर्वेक्षण में शराबबंदी पर पुनर्विचार की सिफारिश की गई थी।

पप्पू यादव का वैकल्पिक सुझाव

पप्पू यादव ने सुझाव दिया कि स्कूलों और मंदिरों के आसपास शराब-संबंधी प्रतिबंध पहले की तरह पूरी सख्ती से लागू रहने चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि पाँच सितारा और सात सितारा होटलों के लिए अलग नियमों पर विचार किया जा सकता है। उनके अनुसार, किसी भी कानून की समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए ताकि उसकी प्रभावशीलता और अनचाहे परिणामों का आकलन किया जा सके।

राजस्व नुकसान और अवैध कारोबार पर सवाल

पप्पू यादव ने मौजूदा शराबबंदी व्यवस्था के आर्थिक प्रभाव पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार को संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि अवैध शराब का कारोबार नेताओं, अधिकारियों और अपराधियों के लिए कमाई का ज़रिया बन चुका है। उन्होंने व्यापक समीक्षा की माँग करते हुए कहा कि सरकार को शराबबंदी के फायदे और नुकसान दोनों का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए।

जेडीयू के कानूनी नोटिस पर पप्पू यादव की प्रतिक्रिया

शराबबंदी सर्वे करने वाली एजेंसी को जनता दल यूनाइटेड (JDU) द्वारा कथित तौर पर कानूनी नोटिस भेजे जाने के सवाल पर पप्पू यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की शराबबंदी को लेकर सोच और दृष्टिकोण का सम्मान किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि नीतीश सरकार ने 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, जो अब तक देश के सबसे चर्चित और विवादित नीतिगत फैसलों में से एक है।

आगे क्या

बिहार में 2025 के अंत तक विधानसभा चुनाव होने की संभावना को देखते हुए शराबबंदी की समीक्षा की माँग राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आलोचकों का कहना है कि यह बहस सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बढ़ती बेचैनी को दर्शाती है, जबकि सरकार अभी तक किसी भी बदलाव के संकेत देने से बचती रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब इसमें सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगी और विपक्षी दोनों एक साथ आवाज़ उठा रहे हैं — यह असामान्य है। असली सवाल यह है कि क्या यह माँग नीतिगत सुधार की ईमानदार कोशिश है या चुनावी साल में मतदाताओं को साधने की रणनीति। अवैध शराब कारोबार के आरोप वर्षों से लग रहे हैं, लेकिन सरकार ने कभी स्वतंत्र ऑडिट की अनुमति नहीं दी। जब तक शराबबंदी की प्रभावशीलता का कोई पारदर्शी और सत्यापन-योग्य आकलन नहीं होता, तब तक यह बहस राजनीतिक शोर से आगे नहीं बढ़ेगी।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पप्पू यादव ने बिहार शराबबंदी पर क्या कहा?
पप्पू यादव ने 14 अगस्त को पटना में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार को मौजूदा शराबबंदी व्यवस्था की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने स्कूलों और मंदिरों के पास प्रतिबंध बनाए रखने और 5-7 स्टार होटलों के लिए अलग नियमों पर विचार करने का सुझाव दिया।
जीतन राम मांझी का बिहार शराबबंदी पर क्या रुख है?
HAM संरक्षक जीतन राम मांझी ने गुजरात मॉडल की तर्ज पर शराबबंदी को और मज़बूत बनाने की वकालत की है। वे राज्य सरकार के सहयोगी हैं और उनकी माँग को अब पप्पू यादव का भी समर्थन मिल गया है।
बिहार में शराबबंदी कब से लागू है?
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। यह देश के सबसे चर्चित नीतिगत फैसलों में से एक है और तब से इसकी प्रभावशीलता पर लगातार बहस होती रही है।
पप्पू यादव ने शराबबंदी के आर्थिक प्रभाव पर क्या आरोप लगाए?
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा शराबबंदी से बिहार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि अवैध शराब का कारोबार नेताओं, अधिकारियों और अपराधियों के लिए कमाई का ज़रिया बन गया है। उन्होंने इसकी व्यापक और निष्पक्ष समीक्षा की माँग की।
JDU ने शराबबंदी सर्वे एजेंसी को नोटिस क्यों भेजा?
कथित तौर पर एक सर्वेक्षण में बिहार में शराबबंदी पर पुनर्विचार या इसे समाप्त करने की सिफारिश की गई थी, जिसके बाद JDU ने उस एजेंसी को कानूनी नोटिस भेजा। पप्पू यादव ने इस पर कहा कि नीतीश कुमार के दृष्टिकोण का सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी भी कानून की समय-समय पर समीक्षा ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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