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बिहार शराबबंदी पूरी तरह विफल नहीं, सुधार की गुंजाइश: जेडीयू विधायक श्याम रजक

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बिहार शराबबंदी पूरी तरह विफल नहीं, सुधार की गुंजाइश: जेडीयू विधायक श्याम रजक

सारांश

जेडीयू विधायक श्याम रजक ने बिहार शराबबंदी को पूरी तरह विफल मानने से साफ इनकार किया — लेकिन स्वीकार किया कि कमियाँ हैं। साथ ही सूखे नशे को नई राष्ट्रीय चुनौती बताया, प्रशांत किशोर के रोजगार ऐलान पर तंज कसा और झारखंड पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी की माँग की।

मुख्य बातें

जेडीयू विधायक श्याम रजक ने 12 अगस्त 2026 को बिहार शराबबंदी को पूरी तरह विफल बताए जाने को खारिज किया।
उन्होंने सूखे नशे को शराबबंदी के बाद की सबसे बड़ी चुनौती बताया और कहा कि यह पूरे देश में बढ़ रहा है।
बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर के 10,000 युवाओं को रोजगार देने के ऐलान पर रजक ने कहा — पूरे बिहार के हर घर के एक नौजवान को रोजगार मिलना चाहिए।
झारखंड जेपीएससी/जेएसएससी पेपर लीक पर रजक ने शिक्षा मंत्री की तत्काल बर्खास्तगी और फास्ट ट्रैक कोर्ट की माँग की।
एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी भेजे जाने पर कहा — राष्ट्रहित में सत्ता-विपक्ष को एकजुट होना चाहिए था।

जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक श्याम रजक ने 12 अगस्त 2026 को पटना में बिहार की शराबबंदी नीति को पूरी तरह 'विफल' करार दिए जाने को स्पष्ट रूप से नकारते हुए कहा कि कानून में कुछ कमियाँ अवश्य हैं, लेकिन उन्हें दूर किया जा सकता है। उनके अनुसार, शराबबंदी को पूरी तरह असफल बताना तथ्यों से परे है।

शराबबंदी पर रजक का पक्ष

रजक ने कहा, "बिहार में शराबबंदी फेल नहीं है। निश्चित रूप से इसमें कुछ त्रुटि है, जिसे दूर किया जाना चाहिए — यह कहा जा सकता है, लेकिन शराबबंदी को पूरी तरह से फेल कहना गलत है।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शराबबंदी के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती सूखे नशे का बढ़ता प्रचलन है। उनके अनुसार यह समस्या केवल बिहार तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में धीरे-धीरे फैल रही है और इसकी जड़ में युवाओं की बढ़ती निराशा है।

सख्त कानून की माँग

रजक ने सरकार से आग्रह किया कि नशे के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाए जाएँ और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने कहा, "जितनी भी कड़ी सजा हो, वो कम होगी।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो रही है।

प्रशांत किशोर के रोजगार ऐलान पर तंज

बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर द्वारा 10,000 युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने की घोषणा पर रजक ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह अच्छी पहल है, लेकिन साथ ही व्यंग्यपूर्ण लहजे में जोड़ा — "10 हजार नहीं, पूरे बिहार के हर घर के एक नौजवान को रोजगार दें, ताकि लोग अपना जीवन यापन कर सकें। अन्यथा भोली-भाली बातों से कुछ होने वाला नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि एक चुनाव जीत लेने से अफरा-तफरी में नहीं पड़ना चाहिए और विधायक का असली काम जनता के दुख-सुख में भागीदारी देना है, न कि व्यापारी की तरह वक्तव्य देना।

झारखंड पेपर लीक पर सख्त रुख

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर रजक ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री से अविलंब शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने और दोषियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त कार्रवाई की माँग की। उनके अनुसार पेपर लीक करने वाले देश के होनहार बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

एफसीआरए संशोधन और तिरंगा अभियान

केंद्र सरकार द्वारा एफसीआरए संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजे जाने पर रजक ने कहा कि यह राष्ट्रहित का विषय था और सत्ता-विपक्ष दोनों को एकजुट होकर इसे पारित करना चाहिए था। जेपीसी समीक्षा के बाद आवश्यक सुधारों के साथ विधेयक पुनः पारित होगा, यह उन्होंने स्वीकार किया। 15 अगस्त के उपलक्ष्य में चल रहे 'हर घर तिरंगा' अभियान पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज किसी जाति या धर्म का नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष का प्रतीक है और हर देशवासी को उसके सामने नतमस्तक होना चाहिए। आगे देखना होगा कि बिहार सरकार शराबबंदी की कमियों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नशे की समस्या रूप बदलकर 'सूखे नशे' के रूप में सामने आ गई है। यह स्वीकारोक्ति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब जेडीयू के अपने नेता ने नीति में खामियाँ मानी हों। प्रशांत किशोर पर तंज और झारखंड पेपर लीक पर आक्रामक रुख — दोनों मिलकर यह संकेत देते हैं कि बिहार की राजनीति में रोजगार और शिक्षा अब केंद्रीय चुनावी मुद्दे बन चुके हैं। असली सवाल यह है कि 'सुधार की गुंजाइश' की बात करने वाले नेता ठोस विधायी प्रस्ताव कब लाएँगे।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेडीयू विधायक श्याम रजक ने बिहार शराबबंदी पर क्या कहा?
श्याम रजक ने कहा कि बिहार की शराबबंदी पूरी तरह विफल नहीं है, हालाँकि उन्होंने माना कि इसमें कुछ कमियाँ हैं जिन्हें दूर किया जाना चाहिए। उनके अनुसार कानून को सुधारा जा सकता है, लेकिन उसे पूरी तरह असफल कहना गलत होगा।
बिहार में सूखा नशा क्या है और यह क्यों बढ़ रहा है?
सूखा नशा शराब के विकल्प के रूप में उपयोग किए जाने वाले नशीले पदार्थों को कहा जाता है। रजक के अनुसार शराबबंदी के बाद बिहार सहित पूरे देश में इसका प्रचलन बढ़ा है और इसके पीछे मुख्य कारण युवाओं में बढ़ती निराशा और बेरोजगारी है।
प्रशांत किशोर के 10,000 रोजगार ऐलान पर श्याम रजक की क्या प्रतिक्रिया थी?
रजक ने इसे अच्छी पहल तो बताया, लेकिन व्यंग्यपूर्ण लहजे में कहा कि केवल 10,000 नहीं, पूरे बिहार के हर घर के एक नौजवान को रोजगार मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विधायक का काम व्यापारी की तरह वक्तव्य देना नहीं, बल्कि जनता के दुख-सुख में भागीदारी देना है।
झारखंड पेपर लीक मामले पर रजक ने क्या माँग की?
रजक ने झारखंड के मुख्यमंत्री से तत्काल शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की माँग की। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी दोषियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि पेपर लीक करने वाले होनहार छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
एफसीआरए संशोधन विधेयक को जेपीसी भेजे जाने पर रजक का क्या मत है?
रजक ने कहा कि यह राष्ट्रहित का मुद्दा था और सत्ता व विपक्ष दोनों को एकजुट होकर इसे पारित करना चाहिए था। उन्होंने उम्मीद जताई कि जेपीसी समीक्षा के बाद आवश्यक सुधारों के साथ विधेयक पुनः पारित होगा।
राष्ट्र प्रेस
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