पटना एनकाउंटर पर जदयू विधायक श्याम रजक: 'अपराधी न बचेंगे, न बख्शे जाएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक श्याम रजक ने 16 जुलाई 2026 को पटना एनकाउंटर मामले पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि बिहार सरकार पहले ही यह संदेश दे चुकी है कि अपराधियों को न बख्शा जाएगा और न ही वे बच पाएंगे। उनके अनुसार, पटना में हुए एनकाउंटर से यह साफ होता है कि सरकार पूरी तरह सतर्क है।
पटना एनकाउंटर पर सरकार का रुख
श्याम रजक ने कहा, 'सरकार की ओर से पहले ही साफ कर दिया गया है कि अपराधी न बचेंगे और न ही बख्शे जाएंगे। किसी भी घटना का होना स्वाभाविक है; इसको पूरी तरह से खत्म नहीं किया जा सकता। लेकिन अपराधी बच नहीं पाएंगे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि पटना में एनकाउंटर की घटना यह दर्शाती है कि प्रशासन और सरकार दोनों चौकस हैं।
नीतीश कुमार के कार्यकाल की उपलब्धियाँ
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों का उल्लेख करते हुए रजक ने कहा, 'पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2005 से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, बुनियादी ढाँचे, रोज़गार और कृषि के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर काम किया है।' उन्होंने स्वीकार किया कि पलायन पूरी तरह नहीं रुका, परंतु पलायन करने वालों की संख्या में कमी आई है और लोगों की आय में वृद्धि हुई है, जिससे वे स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक खर्च कर पाने में सक्षम हुए हैं।
राजद सांसद की मुख्यमंत्री से मुलाकात पर टिप्पणी
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद अभय कुशवाहा की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के विषय में रजक ने कहा कि नेता राज्य के मुद्दों को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलते हैं और यह असामान्य नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि 'ऐसा लगता है कि राष्ट्रीय जनता दल के भीतर उथल-पुथल मची है,' और यह मुलाकात उसी का हिस्सा हो सकती है। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब मुख्यमंत्री और अभय कुशवाहा स्वयं दें तो बेहतर होगा।
पंचायतों को टैक्स वसूली का अधिकार
बिहार कैबिनेट द्वारा पंचायतों को कर और शुल्क वसूलने का अधिकार दिए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए रजक ने कहा कि जब से पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई और चुने हुए प्रतिनिधियों को विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई, तब से उन्हें राजस्व वसूलने का अधिकार देना भी उतना ही ज़रूरी था। उनके अनुसार, इस फैसले से पंचायतों की आर्थिक क्षमता मजबूत होगी और स्थानीय विकास कार्यों को गति मिलेगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें पंचायती राज संस्थाओं को अधिक स्वायत्तता देने की दिशा में काम कर रही हैं।