बिहार शराबबंदी पर एनसीएईआर रिपोर्ट को जदयू ने नकारा, मंत्री बोले — महिलाओं की माँग पर बना था कानून
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की एक ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिहार की शराबबंदी अपने सामाजिक लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रही है — जिसके बाद जनता दल (यूनाइटेड) ने तीखा पलटवार किया है।
दिल्ली में जदयू सांसदों की बैठक
12 अगस्त को नई दिल्ली में जदयू सांसद पार्टी के वरिष्ठ नेता के आवास पर एकत्रित हुए। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक संगठन को मज़बूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति तय करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।
बैठक के बाद जदयू सांसद दिलेश्वर कामत ने कहा, 'यह एक औपचारिक बैठक थी, और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष भी मौजूद थे। हमने संगठनात्मक मामलों पर चर्चा की।'
एनसीएईआर रिपोर्ट पर जदयू का पलटवार
एनसीएईआर की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलेश्वर कामत ने कहा, 'यह रिपोर्ट गलत है। बिहार में जब शराबबंदी कानून लागू हुआ, तो लोगों में शांति स्थापित हुई है।' उन्होंने रिपोर्ट के निष्कर्षों को सिरे से खारिज किया।
गौरतलब है कि एनसीएईआर की रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दल बिहार सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से लागू यह कानून अपने घोषित सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति में पिछड़ा है।
सरकार का बचाव — 'महिलाओं की माँग पर लिया था फैसला'
पटना में बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने शराबबंदी कानून का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा, 'जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे, तब सभी दलों के समर्थन से शराबबंदी कानून लागू किया गया था। यह फैसला जनता की माँग पर लिया गया था, खासकर महिलाओं की माँग पर।'
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नशे पर रोक लगाने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है और माफिया गतिविधियों तथा कानून के उल्लंघन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई जारी है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जदयू संगठनात्मक ढाँचे को दुरुस्त करने में जुटी है। बैठक में वरिष्ठ नेतृत्व की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पार्टी आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रही है।
जदयू नेताओं ने स्पष्ट किया है कि शराबबंदी नीति पर पार्टी का रुख अटल है और सरकार माफिया तथा नशे के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगी। आलोचकों का कहना है कि एनसीएईआर जैसी स्वतंत्र संस्था की रिपोर्ट को महज़ 'गलत' कहकर खारिज करना पर्याप्त नहीं — सरकार को ठोस आँकड़ों के साथ जवाब देना होगा।