12 अगस्त 2026
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बिहार शराबबंदी पर एनसीएईआर रिपोर्ट को जदयू ने नकारा, मंत्री बोले — महिलाओं की माँग पर बना था कानून

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बिहार शराबबंदी पर एनसीएईआर रिपोर्ट को जदयू ने नकारा, मंत्री बोले — महिलाओं की माँग पर बना था कानून

सारांश

एनसीएईआर की रिपोर्ट ने बिहार की शराबबंदी को विफल बताया तो जदयू ने तत्काल पलटवार किया। मंत्री रामकृपाल यादव का तर्क है कि यह कानून महिलाओं की माँग और सर्वदलीय सहमति का नतीजा था। सवाल यह है कि क्या सरकार रिपोर्ट के आँकड़ों का ठोस जवाब दे पाएगी।

मुख्य बातें

एनसीएईआर की रिपोर्ट के अनुसार बिहार की 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी अपने सामाजिक लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रही है।
जदयू सांसद दिलेश्वर कामत ने रिपोर्ट को 'गलत' बताते हुए कहा कि शराबबंदी से बिहार में शांति स्थापित हुई है।
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा — यह कानून महिलाओं की माँग और सभी दलों के समर्थन से लागू हुआ था।
सरकार ने माफिया गतिविधियों और कानून उल्लंघन के विरुद्ध कार्रवाई जारी रखने का संकल्प दोहराया।
12 अगस्त को नई दिल्ली में जदयू सांसदों की बैठक में संगठन और चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई।

बिहार में 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की एक ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बिहार की शराबबंदी अपने सामाजिक लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रही है — जिसके बाद जनता दल (यूनाइटेड) ने तीखा पलटवार किया है।

दिल्ली में जदयू सांसदों की बैठक

12 अगस्त को नई दिल्ली में जदयू सांसद पार्टी के वरिष्ठ नेता के आवास पर एकत्रित हुए। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, यह बैठक संगठन को मज़बूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति तय करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।

बैठक के बाद जदयू सांसद दिलेश्वर कामत ने कहा, 'यह एक औपचारिक बैठक थी, और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष भी मौजूद थे। हमने संगठनात्मक मामलों पर चर्चा की।'

एनसीएईआर रिपोर्ट पर जदयू का पलटवार

एनसीएईआर की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलेश्वर कामत ने कहा, 'यह रिपोर्ट गलत है। बिहार में जब शराबबंदी कानून लागू हुआ, तो लोगों में शांति स्थापित हुई है।' उन्होंने रिपोर्ट के निष्कर्षों को सिरे से खारिज किया।

गौरतलब है कि एनसीएईआर की रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दल बिहार सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से लागू यह कानून अपने घोषित सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति में पिछड़ा है।

सरकार का बचाव — 'महिलाओं की माँग पर लिया था फैसला'

पटना में बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने शराबबंदी कानून का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा, 'जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे, तब सभी दलों के समर्थन से शराबबंदी कानून लागू किया गया था। यह फैसला जनता की माँग पर लिया गया था, खासकर महिलाओं की माँग पर।'

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नशे पर रोक लगाने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है और माफिया गतिविधियों तथा कानून के उल्लंघन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई जारी है।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जदयू संगठनात्मक ढाँचे को दुरुस्त करने में जुटी है। बैठक में वरिष्ठ नेतृत्व की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि पार्टी आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर रही है।

जदयू नेताओं ने स्पष्ट किया है कि शराबबंदी नीति पर पार्टी का रुख अटल है और सरकार माफिया तथा नशे के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगी। आलोचकों का कहना है कि एनसीएईआर जैसी स्वतंत्र संस्था की रिपोर्ट को महज़ 'गलत' कहकर खारिज करना पर्याप्त नहीं — सरकार को ठोस आँकड़ों के साथ जवाब देना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नीतिगत जवाबदेही नहीं। बिहार सरकार के पास यह अवसर है कि वह अपने स्वयं के आँकड़े — अपराध दर, घरेलू हिंसा के मामले, महिला सशक्तिकरण के संकेतक — सार्वजनिक करे और रिपोर्ट के दावों का तथ्यात्मक खंडन करे। 'महिलाओं की माँग' वाला तर्क भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, किंतु नीति की सफलता का मापदंड माँग नहीं, परिणाम होता है। विपक्ष के लिए भी यह परीक्षा है — क्या वह रिपोर्ट के आधार पर ठोस वैकल्पिक नीति प्रस्तुत करेगा, या महज़ सियासी मौके का फायदा उठाएगा?
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीएईआर की बिहार शराबबंदी रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी अपने घोषित सामाजिक लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रही है। रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्ष ने बिहार सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
जदयू ने एनसीएईआर रिपोर्ट पर क्या प्रतिक्रिया दी?
जदयू सांसद दिलेश्वर कामत ने रिपोर्ट को 'गलत' बताते हुए कहा कि शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में शांति स्थापित हुई है। पार्टी ने रिपोर्ट के निष्कर्षों को सिरे से खारिज किया है।
बिहार में शराबबंदी कानून कब और क्यों लागू हुआ?
बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून 2016 में लागू हुआ था। मंत्री रामकृपाल यादव के अनुसार यह फैसला जनता, विशेष रूप से महिलाओं की माँग पर और सभी दलों के समर्थन से लिया गया था।
12 अगस्त को दिल्ली में जदयू की बैठक में क्या हुआ?
12 अगस्त को नई दिल्ली में जदयू सांसद पार्टी के वरिष्ठ नेता के आवास पर मिले। सूत्रों के अनुसार बैठक में संगठन को मज़बूत करने और आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष भी उपस्थित रहे।
बिहार सरकार शराबबंदी उल्लंघन पर क्या कदम उठा रही है?
मंत्री रामकृपाल यादव के अनुसार सरकार नशे पर रोक लगाने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है और माफिया गतिविधियों तथा कानून उल्लंघन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कार्रवाई जारी है। पार्टी ने कहा है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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