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बिहार शराबबंदी में गुजरात मॉडल अपनाए सरकार: जीतनराम मांझी की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील

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बिहार शराबबंदी में गुजरात मॉडल अपनाए सरकार: जीतनराम मांझी की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील

सारांश

NDA सहयोगी होने के बावजूद जीतनराम मांझी ने बिहार की शराबबंदी नीति के क्रियान्वयन पर फिर सवाल उठाए और गुजरात मॉडल अपनाने की माँग की। NCAER की रिपोर्ट ने आग में घी डाला — नीति हटने पर 14-15% अधिक राजस्व का अनुमान।

मुख्य बातें

जीतनराम मांझी ने 9 अगस्त 2026 को पटना में माँग की कि बिहार शराबबंदी को गुजरात मॉडल की तर्ज पर लागू किया जाए।
मांझी का आरोप है कि कानून की मार गरीब और कमजोर वर्ग पर अधिक पड़ती है, जबकि प्रभावशाली लोग बच निकलते हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पूर्ण शराबबंदी वापस नहीं ली जाएगी।
NCAER की रिपोर्ट के अनुसार शराबबंदी हटने पर बिहार के राजस्व में 14 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि संभव।
मांझी NDA का हिस्सा होने के बावजूद कई बार इस नीति के क्रियान्वयन पर असहमति जता चुके हैं।

केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक जीतनराम मांझी ने 9 अगस्त 2026 को एक बार फिर बिहार की शराबबंदी नीति की समीक्षा की माँग उठाई। पटना में 'हम' युवा प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया कि राज्य में शराबबंदी को गुजरात मॉडल की तर्ज पर लागू करने पर विचार किया जाए। मांझी का कहना है कि कानून का उद्देश्य सही है, लेकिन उसके क्रियान्वयन में गंभीर खामियाँ हैं।

मांझी की मुख्य आपत्तियाँ

मांझी ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में अनियमितताएँ देखने को मिल रही हैं। उनके अनुसार, इस कानून की मार सबसे अधिक गरीब और कमजोर वर्ग पर पड़ती है, जबकि प्रभावशाली लोग कानून की पकड़ से बाहर रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को और मज़बूत करना चाहिए ताकि अधिकारी इस कानून का दुरुपयोग न कर सकें।

गुजरात मॉडल का तर्क

मांझी ने महात्मा गांधी की जन्मभूमि गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी शराबबंदी लागू है, लेकिन आम लोगों को वैसी परेशानियों और निराशाओं का सामना नहीं करना पड़ता जैसी बिहार में देखने को मिलती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री और बिहार सरकार तक अपनी बात पहुँचाना चाहते हैं। गौरतलब है कि मांझी लंबे समय से बिहार में गुजरात जैसी शराबबंदी व्यवस्था लागू करने की वकालत करते आ रहे हैं।

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी नीति वापस नहीं ली जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर ही इस नीति को लेकर मतभेद सार्वजनिक होते दिख रहे हैं — मांझी स्वयं NDA का हिस्सा हैं, फिर भी कई बार इस मुद्दे पर असहमति जता चुके हैं।

आर्थिक पहलू: NCAER की रिपोर्ट

नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की एक शोध रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या बिहार की शराबबंदी अपने सभी उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल कर पाई है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि शराबबंदी हटाई जाती है तो बिहार के आंतरिक राजस्व में लगभग 14 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में सरकार शराबबंदी लागू कराने और अवैध शराब कारोबार पर रोक लगाने के लिए बड़े पैमाने पर खर्च कर रही है, जो नीति हटने की स्थिति में कम हो सकता है।

आगे की राह

मांझी की यह माँग बिहार की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकती है, खासकर तब जब NCAER जैसी संस्था के आर्थिक विश्लेषण नीति की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहे हों। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से उठ रही इन आवाज़ों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय महत्त्वपूर्ण है — NDA के भीतर से ही सत्तारूढ़ नीति पर बार-बार सार्वजनिक असहमति यह संकेत देती है कि बिहार की शराबबंदी राजनीतिक रूप से अब उतनी अभेद्य नहीं रही। NCAER के आँकड़े 14-15% राजस्व वृद्धि की बात करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछती कि गुजरात मॉडल स्वयं कितना प्रभावी है — वहाँ भी अवैध शराब की समस्या बनी रहती है। असली सवाल क्रियान्वयन की खामियों का है, न कि मॉडल बदलने का — और इस पर किसी भी पक्ष के पास ठोस जवाब नहीं है।
RashtraPress
9 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीतनराम मांझी ने बिहार शराबबंदी पर क्या माँग की है?
मांझी ने माँग की है कि बिहार में शराबबंदी को गुजरात मॉडल की तर्ज पर लागू किया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा कानून का उद्देश्य सही है, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर इसके क्रियान्वयन में अनियमितताएँ हैं।
गुजरात मॉडल और बिहार की शराबबंदी में क्या फर्क है?
दोनों राज्यों में शराबबंदी लागू है, लेकिन मांझी का तर्क है कि गुजरात में आम लोगों को बिहार जैसी परेशानियों और निराशाओं का सामना नहीं करना पड़ता। उनके अनुसार, गुजरात में निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही अधिक प्रभावी है।
NCAER की रिपोर्ट में बिहार शराबबंदी के बारे में क्या कहा गया है?
NCAER की शोध रिपोर्ट के अनुसार यदि बिहार में शराबबंदी हटाई जाती है तो राज्य के आंतरिक राजस्व में लगभग 14 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अवैध शराब पर रोक लगाने के लिए सरकार अभी बड़े पैमाने पर खर्च कर रही है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बिहार शराबबंदी पर क्या रुख है?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी नीति वापस नहीं ली जाएगी और बिहार में शराबबंदी जारी रहेगी।
क्या मांझी NDA में रहते हुए भी बिहार सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं?
हाँ, जीतनराम मांझी NDA का हिस्सा होने के बावजूद कई बार बिहार की शराबबंदी नीति के क्रियान्वयन पर सवाल उठा चुके हैं। यह उनकी उस स्थायी असहमति का हिस्सा है जिसमें वह गरीब और कमजोर वर्ग पर कार्रवाई के असमान बोझ को उजागर करते रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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