9 अगस्त 2026
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बिहार शराबबंदी कानून पर जीतन राम मांझी का बड़ा सवाल: गुजरात मॉडल लागू करे सरकार

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बिहार शराबबंदी कानून पर जीतन राम मांझी का बड़ा सवाल: गुजरात मॉडल लागू करे सरकार

सारांश

NDA सहयोगी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बिहार के शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर खुलकर सवाल उठाए — आरोप लगाया कि 11-12 लाख लोगों पर मुकदमे हैं और अधिकारी गरीबों को फँसाकर पैसा कमाते हैं। उन्होंने गुजरात मॉडल अपनाने की माँग की।

मुख्य बातें

जीतन राम मांझी ने 9 अगस्त को पटना में बिहार के शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर गंभीर आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि कानून के तहत अब तक 11-12 लाख लोगों पर मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें गरीब वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है।
मांझी ने गुजरात मॉडल की शराबबंदी को बिहार में लागू करने की माँग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि कानून की खामियों का फायदा उठाकर कुछ अधिकारी अनुचित धन अर्जित करते हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से कानून की समीक्षा और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की अपील की गई।

केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने 9 अगस्त 2026 को पटना में बिहार के शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नशाबंदी का कानून अपनी जगह सही है, लेकिन इसके अमल में खामियों के चलते आम जनता — खासकर गरीब और कमजोर वर्ग — को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है। मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपील की कि कानून के क्रियान्वयन की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।

मांझी की मुख्य आपत्तियाँ

मांझी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'नशाबंदी का जो कानून है, वह ठीक कानून होना चाहिए। उसके इंप्लीमेंटेशन में गड़बड़ी होने से कहीं-कहीं अनेक प्रकार की बातें सामने आती हैं।' उनका आरोप है कि कानून की खामियों का फायदा उठाकर कुछ अधिकारी अनुचित तरीके से धन अर्जित करते हैं और गरीब लोगों को मुकदमों में फँसाया जाता है। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत अब तक 11-12 लाख लोगों पर किसी न किसी प्रकार का मुकदमा दर्ज हो चुका है, जिनमें उनकी पार्टी के छह-सात गरीब कार्यकर्ता भी शामिल हैं।

गुजरात मॉडल की वकालत

मांझी ने गुजरात में लागू शराबबंदी का उदाहरण सामने रखा और कहा कि बिहार को उसी मॉडल को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जहाँ गांधी जी का जन्म हुआ था, वहाँ भी शराबबंदी है, लेकिन वहाँ लोगों में निराशा नहीं है। हम तो पहले से ही कह रहे हैं कि गुजरात मॉडल की शराबबंदी बिहार में लागू हो।' गौरतलब है कि गुजरात में दशकों से शराबबंदी लागू है और वहाँ का प्रशासनिक ढाँचा इस कानून को अपेक्षाकृत सुव्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए जाना जाता है।

गरीबों पर असर और अधिकारियों की जवाबदेही

मांझी ने यह भी कहा कि शराबबंदी कानून के नाम पर दर्ज होने वाले मुकदमों का बोझ सबसे अधिक गरीब और वंचित तबके पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, 'शराबबंदी के चलते पदाधिकारी लोग पैसा अर्जित करते हैं और गरीबों को फंसाते हैं।' उन्होंने माँग की कि अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि कानून का दुरुपयोग रोका जा सके और निर्दोष नागरिकों को अनावश्यक कानूनी उलझनों से बचाया जा सके।

सरकार से समीक्षा की अपील

मांझी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया कि शराबबंदी कानून की व्यापक समीक्षा की जाए और इसके क्रियान्वयन में मौजूद कमियों को दूर किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार तेज होती रही है। मांझी स्वयं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा हैं, जिससे यह टिप्पणी सत्तारूढ़ खेमे के भीतर से उठी आवाज़ के रूप में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्ता के भीतर से आई है। बिहार में शराबबंदी कानून 2016 से लागू है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर न्यायपालिका भी चिंता जता चुकी है। 11-12 लाख मुकदमों का आँकड़ा — अगर सही है — तो यह बताता है कि कानून का बोझ न्यायिक तंत्र पर भी भारी पड़ रहा है। गुजरात मॉडल की माँग तार्किक लगती है, लेकिन दोनों राज्यों की सामाजिक-आर्थिक संरचना में बड़ा अंतर है; बिना उस संदर्भ के तुलना अधूरी होगी।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीतन राम मांझी ने बिहार शराबबंदी कानून पर क्या कहा?
मांझी ने कहा कि नशाबंदी का कानून सही है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में खामियों के कारण गरीब लोगों को अनावश्यक मुकदमों में फँसाया जा रहा है और कुछ अधिकारी इसका फायदा उठाकर पैसा कमाते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से कानून की समीक्षा की माँग की।
बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू करने की माँग क्यों उठ रही है?
मांझी का तर्क है कि गुजरात में दशकों से शराबबंदी है, फिर भी वहाँ आम जनता में निराशा नहीं है और कानून का क्रियान्वयन अधिक सुव्यवस्थित है। उनका मानना है कि बिहार को उसी प्रशासनिक ढाँचे को अपनाना चाहिए।
बिहार शराबबंदी कानून के तहत कितने लोगों पर मुकदमे हैं?
मांझी के अनुसार बिहार में शराबबंदी कानून के तहत अब तक 11-12 लाख लोगों पर किसी न किसी प्रकार का मुकदमा दर्ज है। उन्होंने कहा कि इनमें उनकी पार्टी के छह-सात गरीब कार्यकर्ता भी शामिल हैं।
क्या जीतन राम मांझी बिहार सरकार के विरोध में हैं?
नहीं, मांझी NDA गठबंधन के घटक और केंद्रीय मंत्री हैं। उनकी यह आलोचना सत्तारूढ़ खेमे के भीतर से आई है और उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सुधार की अपील की है, न कि कानून को समाप्त करने की माँग।
बिहार में शराबबंदी कानून कब से लागू है?
बिहार में शराबबंदी कानून अप्रैल 2016 से लागू है। तब से इसके क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और न्यायिक स्तर पर कई बार सवाल उठाए जा चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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