बिहार में शराबबंदी के बावजूद घर-घर शराब की डिलीवरी का मामला: अख्तरुल ईमान
सारांश
Key Takeaways
- बिहार में शराबबंदी के बावजूद डिलीवरी जारी है।
- अख्तरुल ईमान ने सरकार को कार्रवाई करने की सलाह दी।
- गांधी जी की शराब नीति को याद किया गया।
- धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान महत्वपूर्ण है।
- सरकार को सामाजिक न्याय पर ध्यान देना चाहिए।
पटना, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। एआईएमआईएम के नेता अख्तरुल ईमान ने आरोप लगाया है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद हर घर में शराब की डिलीवरी हो रही है।
पटना में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए अख्तरुल ईमान ने कहा कि नीतीश कुमार के कई निर्णय गलत हैं, लेकिन उन्होंने शराब पर प्रतिबंध लगाकर एक सही कदम उठाया था। जब स्वतंत्र भारत के लिए महात्मा गांधी से शराब नीति के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि हमारे देश में शराब का सेवन नहीं होना चाहिए। लोग यह कहते थे कि शराब से जो राजस्व मिलता है, उससे कई स्कूल और अस्पताल चलते हैं, लेकिन गांधी जी ने जवाब दिया कि अगर एक बच्चा भी अनपढ़ रह जाए, तो मैं सहन कर लूंगा, लेकिन मैं अपनी नई पीढ़ी को शराब पीने की अनुमति नहीं दूंगा। ऐसे में, बिहार सरकार को इस समस्या पर सख्त कदम उठाने चाहिए।
एआईएमआईएम नेता मुफ्ती इस्माइल के 'टीम इंडिया में खिलाड़ियों को मुस्लिम होने के कारण अवसर नहीं मिल रहा' वाले बयान पर अख्तरुल ईमान ने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय होगी। खेलों से मेरा कोई खास संबंध नहीं है, इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकता। लेकिन यह सच है कि हमारे पूर्वजों ने इस देश के लिए बलिदान दिया है और आज मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है। चाहे वह नौकरियों, दाखिलों, यात्रा या पूजा-पाठ में हो... यह देश के लिए सही नहीं है। हमें न्याय की स्थापना करनी चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे द्वारा मदरसों पर दिए गए बयान पर अख्तरुल ईमान ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो कानून बनाया है, डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जो संविधान हमें दिया है, उसका अनुच्छेद 25 हमें धार्मिक स्वतंत्रता देता है। भारत धर्मनिरपेक्ष है। अपने धर्म का पालन करना आपकी स्वतंत्रता है और दूसरे के धर्म का सम्मान करना आपकी जिम्मेदारी है। ऐसे लोग जो दूसरे धर्मों का अनादर करते हैं, उन्हें जेल में होना चाहिए। मैं कहता हूं कि अपने धर्म का पालन करें और दूसरों के धर्म का सम्मान करें।