768 नशा-मुक्ति केंद्रों से 8.20 लाख लोगों को इलाज, 2020 से 294% की वृद्धि
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, देशभर में स्थापित 768 नशा-मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में अब तक 8.20 लाख से अधिक लोग इलाज और पुनर्वास सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं। 4 जुलाई 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई, जो नशे की लत से जूझ रहे लाखों नागरिकों तक सरकारी सहायता की पहुँच में उल्लेखनीय विस्तार को दर्शाती है।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने बताया कि 2020 में जहाँ इन सेवाओं का लाभ उठाने वालों की संख्या 2.08 लाख थी, वह 2025 तक बढ़कर 8.20 लाख से अधिक हो गई — यानी पाँच वर्षों में 294 प्रतिशत की वृद्धि। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि बिना किसी भेदभाव या सामाजिक कलंक के इलाज कराने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने सभी हितधारकों — राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों, संबंधित मंत्रालयों और नागरिक समाज — से मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 'पूरे-सरकार और पूरे-समाज' के दृष्टिकोण से नशा-मुक्त समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
समस्या का दायरा: 2019 का राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण
मंत्री वीरेंद्र कुमार ने बताया कि 2019 में मंत्रालय द्वारा कराए गए पहले राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण ने इस समस्या की गहराई को उजागर किया। सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 7 करोड़ से अधिक लोग सब्सटेंस यूज डिसऑर्डर (नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी समस्या) से प्रभावित थे, जिनमें लगभग 1.2 करोड़ बच्चे और 58 लाख महिलाएँ शामिल थीं। यह आँकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि नशे की समस्या केवल वयस्क पुरुषों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमज़ोर वर्गों को भी प्रभावित करती है।
सरकार की नीतिगत पहलें
मंत्रालय ने नशीले पदार्थों की माँग घटाने के लिए 'राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPDDR)' शुरू की है, जिसका उद्देश्य रोकथाम, जागरूकता, क्षमता निर्माण, इलाज, पुनर्वास और समाज में पुनः एकीकरण को एक व्यापक ढाँचे में जोड़ना है। इसके साथ ही, 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नशा-मुक्त भारत' के विजन के अनुरूप 'नशा-मुक्त भारत अभियान (NMBA)' की शुरुआत की गई।
गौरतलब है कि पिछले महीने उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय (DSVV) में 17 से 26 जून तक आयोजित 'नशा-मुक्त भारत सप्ताह' में 1.31 करोड़ से अधिक नागरिकों ने भाग लिया।
हेल्पलाइन और तकनीकी पहल
मंत्रालय की टोल-फ्री नशा-मुक्ति हेल्पलाइन 14446 पर अब तक 4.69 लाख कॉल आ चुके हैं, जो मदद की ज़रूरत वाले लोगों और उनके परिवारों के लिए पहली संपर्क कड़ी बनी है। इसके अलावा, NMBA ऐप 2.0 के लॉन्च से राज्यों, ज़िलों, आध्यात्मिक संगठनों और अन्य संस्थाओं को फील्ड-आधारित गतिविधियों का डेटा रियल-टाइम में अपलोड करने की सुविधा मिली है।
आगे की राह
मंत्री वीरेंद्र कुमार ने ज़ोर देकर कहा कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई जागरूकता, सहानुभूति और साझा जिम्मेदारी के आधार पर लड़ी जानी चाहिए। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने सभी नागरिकों, युवा संगठनों, शिक्षण संस्थानों और समुदायों से 'नशा मुक्त भारत, खुशहाल भारत' के विजन को साकार करने में सहयोग का आग्रह किया है।