ओवैसी का UCC पर हमला: 'हिंदू पर्सनल लॉ को मुसलमानों पर क्यों थोपें?', हिजाब फैसले को बताया 'इस्लाम पर हमला'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार, 26 अगस्त 2026 को हैदराबाद स्थित दारुस्सलाम में पार्टी मुख्यालय पर आयोजित 'जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन' सभा में उत्तराखंड, असम और गुजरात में लागू किए गए यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब संबंधी फैसले को 'इस्लाम पर हमला' करार देते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 का उल्लंघन बताया।
UCC पर ओवैसी की मुख्य आपत्ति
ओवैसी ने सभा को संबोधित करते हुए सवाल उठाया कि जो कानून हिंदू पर्सनल लॉ के प्रावधानों पर आधारित हों, उन्हें 'यूनिफॉर्म' कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने कहा, 'उत्तराखंड, असम और गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया गया है। अगर लागू किए जा रहे कानून असल में हिंदू मैरिज एक्ट, हिंदू डिवोर्स एक्ट और हिंदू सक्सेशन एक्ट के प्रावधानों पर आधारित हैं, तो उन्हें वास्तव में यूनिफॉर्म सिविल कोड कैसे कहा जा सकता है? जब ये कानून हिंदू पर्सनल लॉ पर आधारित हैं, तो मुसलमानों पर इन्हें क्यों थोपा जाना चाहिए?'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुसलमानों को उनकी धार्मिक आस्था से अलग करने की कोशिशें कामयाब नहीं होंगी। उनके शब्दों में, 'याद रखें, हमें हमारे विश्वास से दूर करने की कोशिशें नाकाम होंगी। जो लोग इस्लाम में विश्वास रखते हैं, वे कुरान और सुन्नत की शिक्षाओं का पालन करते रहेंगे। हम अपने दीन को नहीं छोड़ेंगे।'
हिजाब फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रयागराज के एक स्कूल की नाबालिग छात्रा की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने निर्धारित स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति माँगी थी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता कोई ऐसा धार्मिक ग्रंथ या सामग्री पेश करने में असफल रही जिससे यह सिद्ध हो सके कि स्कार्फ पहनना उसके धर्म का 'जरूरी' अंग है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में पेश तस्वीरों में उसी समुदाय की अन्य छात्राएँ बिना स्कार्फ के स्कूल जाती दिख रही थीं।
ओवैसी ने इस फैसले को सिरे से नकारते हुए कहा, 'मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से सहमत नहीं हूँ। आज का फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 का उल्लंघन करता है। आप कौन होते हैं यह तय करने वाले कि इस्लाम के लिए क्या जरूरी है? लड़कियाँ हिजाब अपने सिर पर पहनती हैं, दिमाग पर नहीं। यह इस्लाम पर हमला है।' उन्होंने यह भी बताया कि सबरीमाला मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, जहाँ जरूरी धार्मिक प्रथाओं के मुद्दे पर विचार चल रहा है।
RSS और BJP पर मनुस्मृति का आरोप
ओवैसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर यह आरोप भी लगाया कि इन संगठनों ने ऐतिहासिक रूप से संविधान की जगह मनुस्मृति को तरजीह दी है। उन्होंने कहा, '26 नवंबर 1949 को हमने संविधान अपनाया था। हालाँकि, चार दिन बाद, 30 नवंबर को RSS के एक मुखपत्र ने इसके खिलाफ शिकायत छापी, जिसमें कहा गया कि यह संविधान नहीं था और इसकी जगह मनुस्मृति होनी चाहिए थी। उन्हें बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान से दिक्कत थी।'
भारत के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश
ओवैसी ने अपने संबोधन में मुसलमानों की देशभक्ति को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'हम इस देश से प्यार करते हैं, हम इस देश की रक्षा करेंगे और अपने विश्वास के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए हम भारत को महाशक्ति बनाने के लिए काम करेंगे।' उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी तुर्रेबाज खान सहित उन लोगों के बलिदान को याद किया जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी जान दी और कहा कि उनके योगदान को भुलाया नहीं जाना चाहिए।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब UCC को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है और हिजाब का मुद्दा एक बार फिर न्यायिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। ओवैसी के इस संबोधन के बाद आने वाले दिनों में विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रतिक्रियाएँ महत्वपूर्ण होंगी। सबरीमाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय का रुख भी हिजाब जैसे धार्मिक प्रथाओं से जुड़े भविष्य के मामलों पर असर डाल सकता है।