30 जुलाई 2026
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वंदे मातरम बिल पास: ओवैसी बोले — संविधान किसी को मजबूर नहीं करता, गिरिराज ने कहा राष्ट्रीयता से जुड़ा मामला

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वंदे मातरम बिल पास: ओवैसी बोले — संविधान किसी को मजबूर नहीं करता, गिरिराज ने कहा राष्ट्रीयता से जुड़ा मामला

सारांश

लोकसभा में वंदे मातरम बिल पास होते ही संसदीय राजनीति में नई आग भड़क उठी। ओवैसी ने संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर सरकार को घेरा, तो DMK ने राज्यों के सांस्कृतिक अधिकारों की दुहाई दी। सत्तापक्ष ने इसे राष्ट्रीयता का प्रश्न बताया।

मुख्य बातें

लोकसभा ने 30 जुलाई को वंदे मातरम बिल पास किया, इससे पहले यह राज्यसभा में भी पारित हो चुका था।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अनुच्छेद 19 और 25 तथा बिजो इमैनुएल के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देकर बिल को असंवैधानिक बताया।
राजा ने आरोप लगाया कि सरकार ने संविधान सभा के निर्णय को गलत तरीके से पेश किया — सभा ने केवल शुरुआती दो पद गाने की अनुमति दी थी, पूरे गीत को नहीं।
DMK सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कहा कि तमिलनाडु समेत कई राज्यों के राज्य गीत 50 से अधिक वर्षों से पहले गाए जाते रहे हैं, जो अब तीसरे स्थान पर चले जाएँगे।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिल को भारत की राष्ट्रीयता और स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा; BJP सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि अब 'वंदे मातरम' का अपमान कानूनन संभव नहीं।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन कहा कि संसद से पास बिल को स्वीकार करना होगा।

नई दिल्ली में 30 जुलाई को लोकसभा में वंदे मातरम बिल पास होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया। राज्यसभा में पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक के संसद से पास होते ही समर्थन और विरोध दोनों खेमों से तीखे बयान सामने आए। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में बढ़ रही है, जबकि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसे भारत की राष्ट्रीयता और स्वतंत्रता से जुड़ा विषय बताया।

ओवैसी का संवैधानिक तर्क

नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान ओवैसी ने कहा कि संविधान में बिजो इमैनुएल का ऐतिहासिक निर्णय दर्ज है। उन्होंने कहा, 'अनुच्छेद 19 और 25 यह स्पष्ट करते हैं कि देश से मोहब्बत किसी एक गाने को गाने से नहीं आँकी जाती।' उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग सिख धर्म के हैं या नास्तिक हैं, उन्हें देवी-देवता की उपासना के लिए कैसे बाध्य किया जा सकता है।

ओवैसी ने स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम योगदान का हवाला देते हुए कहा कि हसरत मोहानी ने 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा दिया था और यूसुफ मेहरअली ने 'क्विट इंडिया' का। उन्होंने हैदराबाद के मक्का मस्जिद के इमाम मौलवी अलाउद्दीन का भी उल्लेख किया, जिन्हें रमजान में जुमे का खुत्बा देने के बाद गिरफ्तार किया गया था और जिनके साथी तुरेबाज खान की लाश दस दिन तक सुल्तान बाजार में लटकाई गई थी। उन्होंने कहा, 'यह उन लोगों को शर्मिंदा कर रहे हैं जिन्होंने देश के लिए सब कुछ कुर्बान किया।'

विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि देश में बड़ी मुस्लिम आबादी है और उनकी भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, इस बिल से न रोजगार मिलेगा, न भ्रष्टाचार खत्म होगा, न महंगाई कम होगी और न ही नीट जैसी समस्याओं का समाधान होगा। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हम राष्ट्रगान का विरोध नहीं करते, उसे गाते हैं। राष्ट्रगीत के कुछ शब्द हमारे धर्म से टकराते हैं, इसीलिए विरोध है।'

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि बिल पारित करने की प्रक्रिया में सभी को भरोसे में लिया जाना चाहिए था, हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संसद से पास होने के बाद इसे स्वीकार करना होगा। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सांसद ए. राजा ने आरोप लगाया कि सरकार 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देना चाहती थी और यह दावा भी किया गया कि संविधान सभा ने पूरे गीत को मंजूरी दी थी, जबकि वास्तव में केवल शुरुआती दो पद ही गाने की अनुमति दी गई थी।

DMK सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि 50 से अधिक वर्षों से राज्य अपना राज्य गीत पहले गाता आया है और इस बिल से कई राज्यों के गीत तीसरे स्थान पर धकेले जाएँगे।

सत्तापक्ष का समर्थन

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि करीब छह-सात महीने पहले की गई चर्चा के बाद बिल का पास होना देश में नई ऊर्जा लाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों बंगाल से हैं और देश का लोकतंत्र विविधता पर टिका है।

राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल ने कहा कि 'वंदे मातरम' आजादी की लड़ाई की धड़कन बन गया था और इसके शब्दों ने लाखों-करोड़ों भारतीयों को प्रेरित किया। BJP सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि अब 'वंदे मातरम' को कानूनी संरक्षण मिल गया है और कोई भी इसका अपमान नहीं कर सकता।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का बयान

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विरोध करने के अधिकार को स्वीकार करते हुए कहा कि यह विधेयक भारत के अस्तित्व, राष्ट्रीयता और स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इस विषय पर और कुछ कहने से परहेज किया।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर बहस नई ऊँचाइयों पर है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के बिजो इमैनुएल फैसले में यह स्थापित किया गया था कि राष्ट्रगान न गाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है। अब यह देखना होगा कि नया कानून न्यायिक समीक्षा की कसौटी पर कैसे खरा उतरता है और राज्य सरकारें इसे किस रूप में लागू करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संवैधानिक है — और यही इसे जटिल बनाता है। सर्वोच्च न्यायालय का बिजो इमैनुएल फैसला स्पष्ट है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अनिवार्य आचरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन हो सकता है। DMK का यह तर्क कि संविधान सभा ने केवल दो पद गाने की अनुमति दी थी, तथ्यात्मक रूप से महत्वपूर्ण है और इसे मुख्यधारा की कवरेज में अपेक्षित गंभीरता नहीं मिली। असली सवाल यह है कि क्या यह कानून न्यायिक समीक्षा में टिकेगा — और यदि नहीं टिका, तो यह विधायी ऊर्जा किस काम आई।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम बिल क्या है और इसमें क्या प्रावधान हैं?
वंदे मातरम बिल एक विधेयक है जिसे राज्यसभा और लोकसभा दोनों में पारित किया गया है। इसके तहत सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' न गाना एक आपराधिक अपराध बनाया गया है और इस राष्ट्रगीत को कानूनी संरक्षण दिया गया है।
ओवैसी ने वंदे मातरम बिल का विरोध क्यों किया?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19 और 25 विचार, अभिव्यक्ति और धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के बिजो इमैनुएल फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी को भी किसी गीत को गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
DMK ने इस बिल पर क्या आपत्ति जताई?
DMK सांसद ए. राजा ने कहा कि सरकार ने यह दावा करके भ्रम फैलाया कि संविधान सभा ने पूरे गीत को मंजूरी दी थी, जबकि सभा ने केवल शुरुआती दो पद गाने की अनुमति दी थी। DMK सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में 50 से अधिक वर्षों से राज्य गीत पहले गाया जाता रहा है, जो अब तीसरे स्थान पर चला जाएगा।
क्या वंदे मातरम न गाना अब कानूनन अपराध है?
बिल के प्रावधानों के अनुसार, सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' न गाना आपराधिक अपराध की श्रेणी में आएगा। हालाँकि, यह कानून सर्वोच्च न्यायालय के बिजो इमैनुएल फैसले के संदर्भ में न्यायिक चुनौती का सामना कर सकता है।
सत्तापक्ष ने इस बिल का समर्थन किस आधार पर किया?
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इसे भारत के अस्तित्व और राष्ट्रीयता से जुड़ा विषय बताया। BJP सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि अब 'वंदे मातरम' को कानूनी संरक्षण मिल गया है। राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल ने कहा कि यह गीत आजादी की लड़ाई की धड़कन था और करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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