26 अगस्त 2026
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हिजाब विवाद पर ओवैसी को एनडीए का करारा जवाब: 'भारत में रहना है तो संविधान मानना होगा'

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हिजाब विवाद पर ओवैसी को एनडीए का करारा जवाब: 'भारत में रहना है तो संविधान मानना होगा'

सारांश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हिजाब याचिका खारिज करने के बाद ओवैसी की आलोचना पर एनडीए एकजुट हो गया। गिरिराज सिंह से लेकर मुख्तार अब्बास नकवी तक — सभी ने एक सुर में कहा कि संस्थाओं के ड्रेस कोड का सम्मान करना संविधान की भावना है, न कि उसका उल्लंघन।

मुख्य बातें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज के एक स्कूल में यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति माँगने वाली नाबालिग छात्र की याचिका खारिज की।
असदुद्दीन ओवैसी ने फैसले की आलोचना की, जिस पर एनडीए नेताओं ने एकजुट होकर पलटवार किया।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा — 'भारत में रहना है तो संविधान मानना होगा।' BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने स्पष्ट किया कि हिजाब भारत में प्रतिबंधित नहीं, लेकिन संस्थाओं के ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य है।
शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा कि यूनिफॉर्म से अनुशासन और समानता आती है, जो धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है।
BJP सांसद गुलाम अली खटाना ने ओवैसी पर वोटबैंक की राजनीति का आरोप लगाया।

नई दिल्ली में 26 अगस्त को सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने हिजाब विवाद पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणियों पर तीखा पलटवार किया। नेताओं ने ओवैसी पर वोटबैंक की राजनीति करने और मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा व प्रगति के मुद्दे को 'सांप्रदायिक रंग' देने का आरोप लगाया।

विवाद की पृष्ठभूमि

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में प्रयागराज के एक स्कूल के नाबालिग छात्र की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें तय स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति माँगी गई थी। ओवैसी ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी, जिसके बाद एनडीए नेताओं ने एकजुट होकर प्रतिक्रिया दी।

सरकार और एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सीधे शब्दों में कहा, 'असदुद्दीन ओवैसी अपने आप को क्या समझते हैं, यही समझ नहीं आता। क्या वे भारत के संविधान को मानने वाले लोग हैं या संविधान के विरुद्ध चलने वाले लोग हैं। अगर उनके मनमुताबिक फैसला कोर्ट दे तो वो ठीक, अगर मनमुताबिक फैसला नहीं हो तो कोर्ट का विरोध करते हैं। भारत में अगर रहना है तो भारत के संविधान को ही मानना पड़ेगा।'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता नलिन कोहली ने कहा, 'कांग्रेस हो या ओवैसी हो, अगर वो कह रहे हैं कि हिजाब पहनना जरूरी है तो उन्हें जवाब देना होगा कि जो मुस्लिम बहन-बेटियाँ हिजाब पहनने से इनकार करती हैं तो क्या वे मुस्लिम नहीं हैं। इस देश और दुनिया में अनेकों मुस्लिम बहन-बेटियाँ हिजाब नहीं पहनती हैं।'

BJP सांसद गुलाम अली खटाना ने कहा, 'ओवैसी अपनी वोटबैंक की राजनीति करते हैं। इस्लाम सिखाता है कि जिस देश में आप रह रहे हैं, वहाँ के नियमों व कानूनों का सम्मान करें और उनका पालन करें।'

विहिप और शिवसेना का रुख

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, 'जब बराबरी, एकता, अखंडता या महिलाओं के अधिकारों की बात आती है, तो उनके कहने और करने में साफ फर्क दिखता है। देश की बेटियाँ अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी हैं और फाइटर जेट उड़ा रही हैं, फिर भी आप उन्हें हिजाब और बुर्के में ही सीमित रखना चाहते हैं।'

शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा, 'व्यक्तिगत रूप से, हम हिजाब पहनने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि इस्लाम में महिलाओं को हिजाब पहनना ही चाहिए। यूनिफॉर्म से अनुशासन और समानता आती है, जो धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है।'

नकवी और दयाशंकर सिंह का बयान

BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, 'कुछ लोग मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा और तरक्की को तालिबान की तरह रोकना चाहते हैं। हिजाब के नाम पर कभी सांप्रदायिक भ्रम पैदा करने की कोशिश होती है, तो कभी शिक्षा को सांप्रदायिक रंग देने की।' उन्होंने स्पष्ट किया कि हिजाब भारत में प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन संस्थाओं के अपने ड्रेस कोड होते हैं और उनका सम्मान सभी को करना होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा, 'जो मामले कोर्ट के सामने हैं, उन पर हम कुछ नहीं कह सकते। न्यायपालिका सर्वोच्च है और वह जो भी आदेश देती है, हम सभी उसका पालन करते हैं।'

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब हिजाब से जुड़े मामले देश के कई उच्च न्यायालयों में विचाराधीन हैं और यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। गौरतलब है कि 2022 में कर्नाटक हिजाब विवाद के बाद यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर तीखी बहस छिड़ी हो। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाती है कि यह मुद्दा उनके लिए भी चुनावी दृष्टि से उतना ही प्रासंगिक है। विडंबना यह है कि जो नेता ओवैसी पर वोटबैंक की राजनीति का आरोप लगा रहे हैं, वे स्वयं भी इस विवाद को उतनी ही तेज़ी से राष्ट्रीय बहस में ले आए। असली सवाल — कि स्कूल यूनिफॉर्म नीति और धार्मिक अभिव्यक्ति के बीच संवैधानिक संतुलन कैसे बने — इस राजनीतिक शोर में दब जाता है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हिजाब याचिका क्यों खारिज की?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रयागराज के एक स्कूल के नाबालिग छात्र की वह याचिका खारिज की जिसमें तय स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति माँगी गई थी। न्यायालय ने संस्थागत ड्रेस कोड को प्राथमिकता दी।
ओवैसी ने हाईकोर्ट के फैसले पर क्या कहा था?
असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इस फैसले की कड़ी आलोचना की थी। उनकी इस टिप्पणी के बाद एनडीए नेताओं ने उन पर वोटबैंक की राजनीति और शिक्षा के मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया।
क्या भारत में हिजाब पहनना प्रतिबंधित है?
नहीं, भारत में हिजाब प्रतिबंधित नहीं है। BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने स्पष्ट किया कि हिजाब भारत में बैन नहीं है, जबकि कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। हालाँकि, शैक्षणिक संस्थाओं के अपने ड्रेस कोड होते हैं जिनका पालन सभी को करना होता है।
एनडीए नेताओं ने ओवैसी पर क्या आरोप लगाए?
एनडीए नेताओं ने ओवैसी पर वोटबैंक की राजनीति करने, मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा और प्रगति के मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने और न्यायपालिका के फैसलों का चयनात्मक विरोध करने के आरोप लगाए। गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत में रहना है तो संविधान मानना होगा।
यह विवाद 2022 के कर्नाटक हिजाब मामले से कैसे अलग है?
2022 में कर्नाटक में सरकारी कॉलेजों में हिजाब पर पाबंदी का मामला था जो सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा था। इस बार प्रयागराज के एक स्कूल में यूनिफॉर्म के साथ हिजाब की अनुमति माँगने वाली नाबालिग की याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने खारिज की है, जो एक अलग न्यायिक संदर्भ है।
राष्ट्र प्रेस
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