26 जुलाई 2026
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प्रतुल शाहदेव का बयान: 'हम लोकतांत्रिक मूल्यों की सरकार हैं', ओवैसी और नई शिक्षा नीति पर BJP का पलटवार

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प्रतुल शाहदेव का बयान: 'हम लोकतांत्रिक मूल्यों की सरकार हैं', ओवैसी और नई शिक्षा नीति पर BJP का पलटवार

सारांश

BJP नेता प्रतुल शाहदेव ने रांची में एक साथ कई मोर्चों पर पार्टी का पक्ष रखा — ओवैसी के बयान को 'नैरेटिव की राजनीति' बताया, प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपे जाने को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा कहा, और नई शिक्षा नीति में इतिहास सुधार को सही ठहराया।

मुख्य बातें

BJP नेता प्रतुल शाहदेव ने 26 जुलाई को रांची में कई मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखा।
असदुद्दीन ओवैसी के बयान को शाहदेव ने 'केवल एक वर्ग की राजनीति' करार दिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया।
केंद्र सरकार ने सीजेपी की माँगें मानीं, जिसके बाद आंदोलन वापस लिया गया।
नकल माफिया के विरुद्ध 10 वर्ष कठोर कारावास और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित।
शाहदेव ने नई शिक्षा नीति में इतिहास सुधार को सही ठहराते हुए पुरानी पाठ्यपुस्तकों को 'मुगल-केंद्रित' बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता प्रतुल शाहदेव ने 26 जुलाई को रांची में कई अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी — जिनमें असदुद्दीन ओवैसी का हालिया बयान, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, और प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा जाना शामिल हैं। शाहदेव ने स्पष्ट किया कि एनडीए सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलती है और हर निर्णय देशहित में लिया जाता है।

ओवैसी के बयान पर BJP का पलटवार

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की टिप्पणी पर शाहदेव ने कहा कि उम्र को राजनीतिक मुद्दा बनाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति की उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वे हमेशा चर्चा में रहते हैं।' शाहदेव के अनुसार ओवैसी केवल एक विशेष वर्ग की राजनीति करते हैं और उनका उद्देश्य नैरेटिव बनाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं जान पड़ता।

सीजेपी आंदोलन और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

सेंट्रल जर्नलिस्ट्स प्रेस (CJP) अध्यक्ष अभिजीत दीपके के बयान पर शाहदेव ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ बातचीत के बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। उनके अनुसार केंद्र सरकार ने सीजेपी की माँगें स्वीकार कर लीं, जिसके बाद संगठन ने स्वयं घर लौटने की बात कही। शाहदेव ने सीजेपी और युवाओं से अपील की कि वे किसी राजनीतिक शक्ति का 'मोहरा' न बनें और अब घर लौट जाएँ।

प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने पर शाहदेव ने कहा कि प्रधान ने 'काफी भावुक पत्र' लिखकर इस्तीफे की वजह बताई। उन्होंने जोशी के व्यापक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था और बेहतर होने की उम्मीद है। शाहदेव ने स्पष्ट किया, 'हम लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलने वाली सरकार हैं।'

नई शिक्षा नीति और इतिहास विवाद

शाहदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर बनाई गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति स्थानीय भाषाओं और संस्कृति को बढ़ावा देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौर में पाठ्यक्रम में 'मुगलों को महान' बताया जाता था, जबकि भाजपा के लिए पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज आदर्श हैं। उन्होंने टीपू सुल्तान को 'स्वतंत्रता सेनानी नहीं, बल्कि दमनकारी राजा' बताया। शाहदेव ने कहा कि इतिहास में इस सुधार से 'टुकड़े-टुकड़े गैंग, कम्युनिस्टों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी' को आपत्ति है, और इसीलिए धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मुहिम चलाई गई।

नकल माफिया पर कठोर कार्रवाई की वकालत

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नकल माफिया संबंधी बयान पर शाहदेव ने कहा कि सीएम का रुख सही है — 'नकल माफिया या तो जेल जाएंगे या फिर नरक।' उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री की ओर से नकल माफिया के विरुद्ध 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान किए जाने की बात कही जा रही है। शाहदेव ने इसे प्रधानमंत्री के संकल्प को मूर्त रूप देने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।

यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार शिक्षा सुधार और परीक्षा पारदर्शिता को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। आने वाले दिनों में प्रह्लाद जोशी की शिक्षा नीति पर रुख और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की दिशा पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को वैधता देना, और नई शिक्षा नीति के इतिहास-सुधार को राष्ट्रवादी फ्रेम में पेश करना। लेकिन जो बात अनकही रह जाती है वह यह है कि धर्मेंद्र प्रधान का 'भावुक इस्तीफा' और उसके तुरंत बाद कार्यभार का हस्तांतरण — यह सब कितना स्वैच्छिक था, इस पर पार्टी ने कोई स्पष्टता नहीं दी। इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव का मुद्दा वैचारिक है, पर इसे 'तथ्य सुधार' कहना विद्वानों के बीच विवादास्पद बना हुआ है। सीजेपी आंदोलन की वापसी को सरकारी सफलता बताना सुविधाजनक है, लेकिन युवाओं की मूल माँगों पर दीर्घकालिक समाधान का कोई रोडमैप अभी सामने नहीं आया।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतुल शाहदेव ने ओवैसी के बयान पर क्या कहा?
शाहदेव ने कहा कि ओवैसी केवल एक विशेष वर्ग की राजनीति करते हैं और नैरेटिव बनाना चाहते हैं। उनके अनुसार ऐसे बयानों पर प्रतिक्रिया देने की कोई औचित्य नहीं है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय किसे सौंपा गया?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। शाहदेव ने कहा कि जोशी के पास लंबा अनुभव है और उनके नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था और बेहतर होगी।
सीजेपी आंदोलन वापस क्यों लिया गया?
शाहदेव के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ बातचीत के बाद केंद्र सरकार ने सीजेपी की माँगें मान लीं, जिसके बाद संगठन ने स्वयं आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। शाहदेव ने सीजेपी और युवाओं से अपील की कि वे किसी राजनीतिक दल का 'मोहरा' न बनें।
नई शिक्षा नीति में इतिहास को लेकर BJP का क्या रुख है?
शाहदेव ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यपुस्तकों में पृथ्वीराज चौहान, महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे भारतीय नायकों को उचित स्थान दिया गया है। उन्होंने टीपू सुल्तान को 'स्वतंत्रता सेनानी नहीं बल्कि दमनकारी राजा' बताया और पुरानी पाठ्यपुस्तकों को 'मुगल-केंद्रित' करार दिया।
नकल माफिया के खिलाफ क्या कदम उठाए जाने की बात कही गई?
शाहदेव ने बताया कि प्रधानमंत्री की ओर से नकल माफिया के विरुद्ध 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान किए जाने की बात कही जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान — 'नकल माफिया या तो जेल जाएंगे या नरक' — का समर्थन किया।
राष्ट्र प्रेस
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