प्रहलाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, राम कदम बोले — युवाओं के हित में काम करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रहलाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन चल रहा था। महाराष्ट्र भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक राम कदम ने 26 जुलाई को मुंबई में कहा कि जोशी देश के युवाओं के हित में काम करेंगे।
राम कदम का बयान — प्रहलाद जोशी और युवा हित
मुंबई में मीडिया से बातचीत में भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि पाकिस्तान में बैठकर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया के ज़रिए देश के युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया और अब धीरे-धीरे सारी सच्चाई सामने आ रही है। उन्होंने कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान ने अपना पूरा जीवन छात्रों के लिए समर्पित किया है। वे स्वयं छात्र आंदोलनों में शामिल रहे हैं। जिस दिन यह मामला सामने आया, उसी दिन उन्होंने जाँच CBI को सौंप दी।' कदम ने स्पष्ट किया कि जो भी दोषी हैं, उन्हें किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया पर पलटवार
प्रधान के इस्तीफे को विपक्ष द्वारा अपनी जीत बताए जाने पर राम कदम ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और केवल हताशा तथा निराशा बची है। कदम ने कहा कि संसद का मानसून सत्र चल रहे होने के बावजूद विपक्ष नकारात्मक और ओछी राजनीति में लगा हुआ है।
पीओके और राजनाथ सिंह के बयान पर समर्थन
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) संबंधी बयान पर राम कदम ने पूरा समर्थन जताया। उन्होंने दृढ़ता से कहा, 'पीओके हमारा है और यह होकर रहेगा।'
मन की बात और युवा प्रेरणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम पर राम कदम ने कहा कि प्रधानमंत्री इस मंच के ज़रिए लगातार युवाओं को संबोधित और प्रेरित करते रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जिस दिन से उन्होंने देश की बागडोर संभाली है, तब से वे लगातार युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। देश का युवा ही देश की असली ताकत है।'
कारगिल विजय दिवस पर श्रद्धांजलि
कारगिल विजय दिवस का उल्लेख करते हुए भाजपा विधायक राम कदम ने उन सभी वीर सैनिकों को नमन किया जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि 1999 में कारगिल की दुर्गम चोटियों पर असाधारण साहस दिखाने वाले उन सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति देशवासी सदा ऋणी रहेंगे। भारतीय सेना का बलिदान और अटूट संकल्प आने वाली पीढ़ियों को देशप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रेरित करता रहेगा।