26 जुलाई 2026
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प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, बोले — 'PM मोदी ने जताया पूरा भरोसा'

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प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, बोले — 'PM मोदी ने जताया पूरा भरोसा'

सारांश

धर्मेंद्र प्रधान के पेपर लीक विवाद के बीच इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय की कमान संभाली। यह नियुक्ति उस समय हुई जब छात्र परीक्षा अनियमितताओं पर जवाबदेही की माँग को लेकर सड़कों पर हैं — और सरकार पर व्यवस्था सुधारने का दबाव पहले से कहीं ज़्यादा है।

मुख्य बातें

प्रह्लाद जोशी ने 26 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया।
जोशी ने कहा — 'PM मोदी ने मुझ पर पूरा भरोसा जताया है'; एक्स पर पोस्ट कर कर्तव्यबोध जताया।
जोशी खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय का प्रभार भी साथ-साथ संभालते रहेंगे।
कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्र आंदोलन जारी है।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 26 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर 'पूरा भरोसा' जताया है और इसी विश्वास के आधार पर उन्हें यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुई, जो कथित पेपर लीक विवादों के बीच देशभर में उठे छात्र-आंदोलन के दबाव में शिक्षा मंत्री पद से हटे थे।

पदभार ग्रहण और पहली प्रतिक्रिया

पद संभालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जोशी ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने मुझ पर पूरा भरोसा जताया है और मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी है। मैं कल कर्नाटक में था, रात को यहाँ पहुँचा और आज सुबह पद संभालने के लिए आया हूँ।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रविवार सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कीं।

जोशी ने कहा, 'यह विषय मेरे लिए नया है, इसलिए इसे पूरी तरह समझने के बाद मैं विस्तार से बात करूँगा।' उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी एक पोस्ट में लिखा, 'आज मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर पदभार संभाला। मुझ पर भरोसा करने और यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभारी हूँ। मैं इसे विनम्रता और कर्तव्य की गहरी भावना के साथ स्वीकार करता हूँ।'

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और राष्ट्रपति की मंजूरी

राष्ट्रपति सचिवालय ने शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। यह इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत स्वीकार किया गया।

राष्ट्रपति ने उसी आदेश में प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। जोशी अपने मौजूदा खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय का काम भी साथ-साथ देखते रहेंगे।

पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि

प्रधान का इस्तीफा केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक बड़े बदलाव का संकेत है। कथित पेपर लीक और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों के चलते छात्र बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरे थे और जवाबदेही की माँग कर रहे थे। यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा मंत्रालय पर जनता और राजनीतिक हलकों की कड़ी नजर बनी हुई है।

गौरतलब है कि प्रधान उस समय शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे थे जब परीक्षा-विवाद अपने चरम पर था। उनके जाने के बाद सरकार पर दबाव है कि नई नियुक्ति से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल हो।

आगे की राह

जोशी ने संकेत दिया कि मंत्रालय की पूरी कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा के बाद वे अपनी प्राथमिकताएँ सार्वजनिक करेंगे। परीक्षा सुधार, पाठ्यक्रम नीति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन को लेकर उनकी दिशा पर सभी की नजर रहेगी। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि पेपर लीक मामले में ठोस कार्रवाई न होने पर आंदोलन जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक दृष्टि का बयान नहीं — और यही इसकी सबसे बड़ी सीमा है। शिक्षा मंत्रालय इस समय देश के सबसे संवेदनशील पोर्टफोलियो में से एक है, जहाँ NEP 2020 का क्रियान्वयन अधूरा है और परीक्षा प्रणाली पर भरोसा डगमगाया हुआ है। जोशी स्वयं स्वीकार करते हैं कि यह विषय उनके लिए 'नया' है — जो ईमानदारी तो दर्शाता है, पर उस संकट की गंभीरता से मेल नहीं खाता जिसने उनके पूर्ववर्ती को कुर्सी छोड़ने पर मजबूर किया। असली सवाल यह है कि क्या दोहरे मंत्रालय का बोझ उठाते हुए वे परीक्षा सुधार की जटिल माँगों पर पर्याप्त ध्यान दे पाएँगे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार क्यों मिला?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री मोदी की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। प्रधान ने कथित पेपर लीक विवाद के चलते देशभर में हो रहे छात्र आंदोलनों के बीच इस्तीफा दिया था।
धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा क्यों दिया?
धर्मेंद्र प्रधान ने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के चलते उठे व्यापक छात्र-विरोध के बीच इस्तीफा दिया। राष्ट्रपति सचिवालय ने शनिवार को आधिकारिक बयान जारी कर इस्तीफे की पुष्टि की।
क्या प्रह्लाद जोशी अब केवल शिक्षा मंत्री हैं?
नहीं। प्रह्लाद जोशी शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि वे खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय के मुखिया भी बने रहेंगे। यह दोहरा प्रभार तब तक जारी रहेगा जब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होती।
पेपर लीक विवाद में शिक्षा मंत्रालय की क्या भूमिका है?
शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली परीक्षा एजेंसियों पर कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिनके कारण छात्र बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इन आरोपों की जवाबदेही की माँग ने ही अंततः धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की राह बनाई।
प्रह्लाद जोशी शिक्षा मंत्रालय में आगे क्या करेंगे?
जोशी ने संकेत दिया है कि मंत्रालय की पूरी कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा के बाद वे अपनी प्राथमिकताएँ सार्वजनिक करेंगे। परीक्षा सुधार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का क्रियान्वयन और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता उनके एजेंडे के केंद्र में रहने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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