प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार, बोले — 'PM मोदी ने जताया पूरा भरोसा'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 26 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर 'पूरा भरोसा' जताया है और इसी विश्वास के आधार पर उन्हें यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुई, जो कथित पेपर लीक विवादों के बीच देशभर में उठे छात्र-आंदोलन के दबाव में शिक्षा मंत्री पद से हटे थे।
पदभार ग्रहण और पहली प्रतिक्रिया
पद संभालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जोशी ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने मुझ पर पूरा भरोसा जताया है और मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी है। मैं कल कर्नाटक में था, रात को यहाँ पहुँचा और आज सुबह पद संभालने के लिए आया हूँ।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रविवार सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा बैठकें कीं।
जोशी ने कहा, 'यह विषय मेरे लिए नया है, इसलिए इसे पूरी तरह समझने के बाद मैं विस्तार से बात करूँगा।' उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी एक पोस्ट में लिखा, 'आज मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर पदभार संभाला। मुझ पर भरोसा करने और यह जिम्मेदारी सौंपने के लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभारी हूँ। मैं इसे विनम्रता और कर्तव्य की गहरी भावना के साथ स्वीकार करता हूँ।'
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और राष्ट्रपति की मंजूरी
राष्ट्रपति सचिवालय ने शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। यह इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत स्वीकार किया गया।
राष्ट्रपति ने उसी आदेश में प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा। जोशी अपने मौजूदा खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय का काम भी साथ-साथ देखते रहेंगे।
पेपर लीक विवाद और छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि
प्रधान का इस्तीफा केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक बड़े बदलाव का संकेत है। कथित पेपर लीक और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों के चलते छात्र बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरे थे और जवाबदेही की माँग कर रहे थे। यह ऐसे समय में आया है जब शिक्षा मंत्रालय पर जनता और राजनीतिक हलकों की कड़ी नजर बनी हुई है।
गौरतलब है कि प्रधान उस समय शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे थे जब परीक्षा-विवाद अपने चरम पर था। उनके जाने के बाद सरकार पर दबाव है कि नई नियुक्ति से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल हो।
आगे की राह
जोशी ने संकेत दिया कि मंत्रालय की पूरी कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा के बाद वे अपनी प्राथमिकताएँ सार्वजनिक करेंगे। परीक्षा सुधार, पाठ्यक्रम नीति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन को लेकर उनकी दिशा पर सभी की नजर रहेगी। छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया है कि पेपर लीक मामले में ठोस कार्रवाई न होने पर आंदोलन जारी रहेगा।