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ओवैसी के 'युवा पीएम' बयान पर सियासी घमासान: BJP, विपक्ष और मुस्लिम संगठनों की अलग-अलग राय

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ओवैसी के 'युवा पीएम' बयान पर सियासी घमासान: BJP, विपक्ष और मुस्लिम संगठनों की अलग-अलग राय

सारांश

ओवैसी के 'युवा पीएम' वाले बयान ने सियासी अखाड़े में नई बहस खड़ी कर दी। BJP ने मोदी की अथक कार्यशैली का हवाला दिया, तो मुस्लिम संगठन खुद दो खेमों में बँट गए — एक ने ओवैसी को 'मुसलमानों का दुश्मन' कहा, दूसरे ने लोकतांत्रिक अधिकार बताया।

मुख्य बातें

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के 'युवा प्रधानमंत्री' वाले बयान पर 26 जुलाई को राजनीतिक विवाद छिड़ा।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि पीएम मोदी की कार्यक्षमता का चौथाई भी ओवैसी नहीं कर सकते।
यूपी मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि मोदी ने पदभार संभालने के बाद एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने ओवैसी को 'मुसलमानों का सबसे बड़ा दुश्मन' बताया।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने ओवैसी के बयान को लोकतांत्रिक अधिकार करार दिया।
विपक्ष ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी इच्छा व्यक्त करने का अधिकार है।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के 'युवा प्रधानमंत्री' वाले बयान ने 26 जुलाई को राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान को सिरे से नकारते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यक्षमता का हवाला दिया, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया और मुस्लिम संगठनों ने अपनी-अपनी राय रखी।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने ओवैसी के बयान पर कहा, 'अब उनकी उम्र हो चुकी है। उन्हें तो यह कहना चाहिए कि हमारे प्रधानमंत्री कितना काम करते हैं, मैं तो उसका चौथाई भी नहीं कर पाता।' शर्मा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की क्षमता, योग्यता, अनुभव और भारत के प्रति समर्पण ही एक प्रशासक के सबसे बड़े गुण होते हैं, और इन सभी में प्रधानमंत्री मोदी सर्वोपरि हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदभार संभाला है, उन्होंने एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली है। उन्होंने यह भी कहा कि देश का विकास तेज करने और भारत को विश्व गुरु बनाने का उनका सपना पूरा हो रहा है।

मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी और अटल बिहारी वाजपेयी ने एक मुसलमान, डॉ. एपीजे. अब्दुल कलाम को देश का राष्ट्रपति बनाया था और पार्टी को उस पर कोई आपत्ति नहीं थी। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग देश-विरोधी बयान देते हैं और अलगाववाद की बात करते हैं, उन्हें भाजपा कभी माफ नहीं करेगी।

मुस्लिम संगठनों की राय

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने ओवैसी की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें 'मुसलमानों का सबसे बड़ा दुश्मन' तक कह दिया। उन्होंने तर्क दिया कि आज़ादी के बाद मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, हुसैन अहमद मदनी और अन्य जाने-माने इस्लामिक विद्वानों ने मुस्लिम लीग को इसलिए अस्वीकार किया था, क्योंकि उनका मानना था कि भारत में कोई भी राजनीतिक दल केवल मुसलमानों के नाम पर सफल नहीं हो सकता। रशीदी ने कहा, 'यहाँ सिर्फ वही पार्टी कामयाब हो सकती है जो सबको साथ लेकर चले।'

इसके विपरीत, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने ओवैसी के बयान को लोकतांत्रिक अधिकार के दायरे में रखा। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी इच्छाओं के अनुसार काम करने का अधिकार है और यही भारत के लोकतांत्रिक तंत्र का सार है।

विपक्ष का रुख

विपक्षी दलों ने इस मामले में संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी नागरिक को अपनी इच्छा व्यक्त करने का अधिकार है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में 2029 के आम चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ धीरे-धीरे बढ़ने लगी हैं।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि ओवैसी की AIMIM लंबे समय से मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश करती रही है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उसकी सफलता सीमित रही है। मुस्लिम संगठनों के भीतर ही इस बयान पर दो अलग-अलग धाराएँ उभरना दर्शाता है कि समुदाय में ओवैसी की राजनीति को लेकर एकमत नहीं है। आने वाले दिनों में यह बहस और गहरी होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उनके मतदाता आधार को सक्रिय रखते हैं लेकिन व्यापक गठबंधन की संभावनाओं को सीमित करते हैं। सबसे उल्लेखनीय यह है कि इस बार खुद मुस्लिम संगठन दो धाराओं में बँट गए — यह संकेत है कि ओवैसी की 'अलग मुस्लिम राजनीति' की रणनीति समुदाय के भीतर ही विवादास्पद होती जा रही है। मुख्यधारा की कवरेज BJP बनाम ओवैसी के ढाँचे तक सिमट जाती है, जबकि असली कहानी यह है कि मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व खुद ओवैसी की प्रासंगिकता पर सवाल उठा रहा है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओवैसी का 'युवा पीएम' वाला बयान क्या था?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने युवा प्रधानमंत्री की इच्छा जताई थी, जिस पर 26 जुलाई को राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। यह बयान सत्ता पक्ष और मुस्लिम संगठनों, दोनों की ओर से विरोध का कारण बना।
BJP ने ओवैसी के बयान पर क्या कहा?
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि पीएम मोदी की कार्यक्षमता का चौथाई भी ओवैसी नहीं कर सकते। यूपी मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि मोदी ने पदभार संभालने के बाद एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली।
मुस्लिम संगठनों ने ओवैसी के बयान पर क्या रुख अपनाया?
मुस्लिम संगठनों में दो अलग-अलग राय सामने आई। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने ओवैसी को 'मुसलमानों का सबसे बड़ा दुश्मन' कहा, जबकि ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताया।
विपक्ष ने इस विवाद पर क्या कहा?
विपक्ष ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी इच्छा व्यक्त करने का लोकतांत्रिक अधिकार है। विपक्ष ने इसे ओवैसी का व्यक्तिगत अधिकार बताया।
मौलाना साजिद रशीदी ने ओवैसी की आलोचना किस आधार पर की?
रशीदी ने तर्क दिया कि आज़ादी के बाद मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे इस्लामिक विद्वानों ने यह स्थापित किया था कि भारत में केवल मुसलमानों के नाम पर कोई पार्टी सफल नहीं हो सकती। उनके अनुसार, यहाँ सिर्फ वही पार्टी कामयाब होती है जो सबको साथ लेकर चले।
राष्ट्र प्रेस
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