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क्या ओवैसी के कहने से प्रधानमंत्री तय होता है? भाजपा सांसद भोला सिंह का जवाब

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क्या ओवैसी के कहने से प्रधानमंत्री तय होता है? भाजपा सांसद भोला सिंह का जवाब

सारांश

एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान पर भाजपा सांसद भोला सिंह ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री का चयन जनता करती है। जानिए इस बयान पर क्या है राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आम जनता की राय।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री का चुनाव जनता के द्वारा होता है।
महिला नेतृत्व का महत्व बढ़ रहा है।
ओवैसी के बयान पर विविध प्रतिक्रियाएं आई हैं।
जाति और धर्म से परे काबिलियत सबसे महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक विमर्श को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए।

नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला देश की प्रधानमंत्री बनेगी।

इस पर भाजपा के नेताओं, मंत्रियों और आम जनता की प्रतिक्रियाएं विविध रही हैं, जिससे राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

भाजपा सांसद भोला सिंह ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसका निर्णय देश की जनता करती है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि कोई महिला प्रधानमंत्री नहीं बन सकती। भोला सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री का चुनाव राजनीतिक दलों के आंतरिक नेतृत्व और जनता के मतदान के आधार पर होता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में देश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के रूप में एक महिला नेतृत्व मिला है। ओवैसी के बयान से यह तय नहीं होता कि कौन सी पार्टी सत्ता में आएगी या कौन प्रधानमंत्री बनेगा, बल्कि यह निर्णय जनता और राजनीतिक दल के शीर्ष नेतृत्व द्वारा किया जाता है।

वहीं, मंत्री दया शंकर मिश्रा ने ओवैसी के बयान को मनगढ़ंत करार देते हुए कहा कि ये उनके व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ओवैसी अक्सर मुख्यधारा से हटकर बयान देते हैं और यह भी उसी श्रृंखला का हिस्सा है। ऐसे विचार गंभीर राजनीतिक विमर्श का आधार नहीं बन सकते और इन्हें व्यक्तिगत राय के रूप में लिया जाना चाहिए।

मंत्री संजय शिरसाट ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि ओवैसी को उनकी बात कहने का अधिकार है, लेकिन इसे जाति या धर्म का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। यदि कोई मुस्लिम महिला देश के किसी प्रमुख पद पर पहुँचती है, तो यह गर्व की बात होनी चाहिए। किसी भी पद के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज काबिलियत और देश के लिए काम करने की इच्छा है, न कि व्यक्ति की जाति, धर्म या पहनावा।

इसके अलावा, सूफी फाउंडेशन के अध्यक्ष कशिश वारसी ने कहा, "असदुद्दीन ओवैसी ऐसे बयानों के माध्यम से मुसलमानों का दिल जीतना चाहते हैं, लेकिन मुसलमान समझदार हैं और ऐसी राजनीतिक चालों में नहीं फंसते।"

इस बयान पर आम जनता की भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में हिजाब पहनने वाली महिला भी प्रधानमंत्री बन सकती है और यह पूरी तरह संभव है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में निश्चित रूप से कुछ कहना मुश्किल है, क्योंकि इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छा काम कर रहे हैं और जनता चाहती है कि वे नेतृत्व में बने रहें।

एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि ओवैसी ने सोच-समझकर यह बयान दिया होगा, लेकिन वर्तमान हालात में ऐसा होना संभव नहीं दिखता।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकारें अच्छा काम कर रही हैं, महिलाएं सुरक्षित हैं, देश सुरक्षित है और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है। ऐसे में अभी किसी बदलाव की जरूरत महसूस नहीं होती और जब समय आएगा, तब जनता फैसला करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जनता के समर्थन से होती है। यह आवश्यक है कि हम ऐसे बयानों को गंभीरता से लें और राजनीतिक विमर्श को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाएं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ओवैसी का बयान राजनीतिक है?
हां, ओवैसी का बयान राजनीतिक है और यह समाज में हिजाब पहनने वाली महिलाओं की स्थिति पर एक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
क्या हिजाब पहनने वाली महिलाएं प्रधानमंत्री बन सकती हैं?
बिल्कुल, लोकतांत्रिक देश में हिजाब पहनने वाली महिला भी प्रधानमंत्री बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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