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ओवैसी का सतीश महाना के बयान पर पलटवार: 'विधानसभा की गरिमा दांव पर, कानून सबके लिए एक होना चाहिए'

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ओवैसी का सतीश महाना के बयान पर पलटवार: 'विधानसभा की गरिमा दांव पर, कानून सबके लिए एक होना चाहिए'

सारांश

UP विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के राम मंदिर-विरोधियों पर कथित बयान ने AIMIM प्रमुख ओवैसी को संवैधानिक बहस छेड़ने पर मजबूर किया — वक्फ, हिंदू एंडोमेंट बोर्ड और तीन तलाक को एक ही तराजू पर रखते हुए उन्होंने पूछा: कानून सबके लिए एक है या नहीं?

मुख्य बातें

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 4 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर UP विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।
महाना के कथित बयान में कहा गया था कि राम मंदिर का विरोध करने वालों को दान की रसीद दिखानी होगी तभी चोरी की बात मानी जाएगी।
ओवैसी ने तर्क दिया कि स्पीकर की कुर्सी से आया बयान विधानसभा की संवैधानिक गरिमा का प्रश्न है।
उन्होंने वक्फ बोर्ड और हिंदू एंडोमेंट बोर्ड के बीच कथित कानूनी असमानता को भी उठाया।
BJP पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने तीन तलाक कानून को असंवैधानिक बताया और कहा कि लोकसभा में एक भी मुस्लिम सांसद न होने वाली पार्टी को ऐसा कानून बनाने का अधिकार नहीं।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना के एक बयान पर तीखी आपत्ति जताई है। मंगलवार, 4 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए ओवैसी ने कहा कि स्पीकर की कुर्सी से दिया गया यह बयान महज एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि विधानसभा की संवैधानिक गरिमा से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।

विवाद की जड़: महाना का बयान

ओवैसी ने अपनी पोस्ट में सतीश महाना के उस कथित बयान को उद्धृत किया जिसमें कहा गया था — 'जिन लोगों ने राम मंदिर का विरोध किया, अगर उन्होंने दान दिया है, तो वे रसीद दिखाएं, फिर हम देखेंगे कि उनका पैसा चोरी हुआ या नहीं।' ओवैसी के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के पद से आया यह वक्तव्य संस्थागत निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।

संवैधानिक प्रश्न: आस्था और अभिव्यक्ति

ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित विधायक को अपनी धार्मिक आस्था के आधार पर किसी अपराध को उसके सही नाम से पुकारने का अधिकार नहीं रहा। उन्होंने कहा, 'क्या अब लोगों को हत्या को हत्या या डकैती को डकैती कहने से पहले अपने धर्म का हलफनामा देना होगा?' यह तर्क उन्होंने विधायी जवाबदेही के व्यापक संदर्भ में रखा।

वक्फ और हिंदू एंडोमेंट बोर्ड की तुलना

ओवैसी ने इस तर्क को आगे बढ़ाते हुए वक्फ बोर्ड और हिंदू एंडोमेंट बोर्ड के बीच कथित असमानता की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि यदि 'राम मंदिर-विरोध' को किसी की विश्वसनीयता की कसौटी माना जाएगा, तो यही सिद्धांत वक्फ बोर्डों पर भी लागू होना चाहिए — जहाँ, उनके अनुसार, गैर-मुसलमानों को जबरदस्ती शामिल किया जाता है। उन्होंने यह भी पूछा कि हिंदू एंडोमेंट बोर्डों को वह संवैधानिक संरक्षण क्यों नहीं मिलता जो वक्फ को प्राप्त है।

तीन तलाक कानून पर निशाना

ओवैसी ने अपनी पोस्ट में तीन तलाक कानून का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'और जिस पार्टी का लोकसभा में एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है, उसे तीन तलाक जैसे असंवैधानिक कानून बनाने का अधिकार कैसे मिल जाता है, जो सिर्फ मुसलमानों से जुड़ा है?' यह टिप्पणी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा निशाना मानी जा रही है।

ओवैसी का केंद्रीय तर्क

अपनी पोस्ट का समापन करते हुए ओवैसी ने कहा कि कानून और संवैधानिक सिद्धांत सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अगर सिद्धांत एक है, तो वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।' गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में धार्मिक संस्थाओं और कानूनी समानता को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में और प्रतिक्रियाएँ आ सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस बड़ी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें धार्मिक संस्थाओं की कानूनी असमानता को मुद्दा बनाकर विपक्षी स्थान मजबूत किया जाता है। विधानसभा अध्यक्ष के पद की संवैधानिक तटस्थता पर सवाल उठाना — चाहे वह किसी भी राज्य में हो — एक गंभीर संस्थागत चिंता है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर व्यक्तिगत बयानबाजी में दफन कर देती है। वक्फ-हिंदू एंडोमेंट तुलना और तीन तलाक पर ओवैसी के तर्क विधिक दृष्टि से जटिल हैं और इन पर न्यायिक व्याख्याएँ भिन्न रही हैं — इसलिए इन्हें केवल राजनीतिक बयान के रूप में नहीं, बल्कि संवैधानिक बहस के प्रस्थान-बिंदु के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सतीश महाना के किस बयान पर ओवैसी ने आपत्ति जताई?
UP विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कथित तौर पर कहा था कि जिन लोगों ने राम मंदिर का विरोध किया, वे दान की रसीद दिखाएं तभी चोरी की बात मानी जाएगी। ओवैसी ने इसे स्पीकर पद की संवैधानिक निष्पक्षता के विरुद्ध बताया।
ओवैसी ने विधानसभा की गरिमा का सवाल क्यों उठाया?
ओवैसी का तर्क है कि स्पीकर की कुर्सी एक संवैधानिक पद है और उससे दिया गया बयान किसी एक धार्मिक आस्था के आधार पर किसी निर्वाचित सदस्य की विश्वसनीयता तय नहीं कर सकता। उनके अनुसार यह विधायी संस्था की गरिमा और निष्पक्षता का प्रश्न है।
ओवैसी ने वक्फ बोर्ड और हिंदू एंडोमेंट बोर्ड की तुलना क्यों की?
ओवैसी ने तर्क दिया कि यदि राम मंदिर-विरोध को कसौटी माना जाएगा तो वही सिद्धांत वक्फ बोर्डों पर भी लागू होना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि हिंदू एंडोमेंट बोर्डों को वह संवैधानिक सुरक्षा क्यों नहीं मिलती जो वक्फ को प्राप्त है।
ओवैसी ने तीन तलाक कानून पर क्या कहा?
ओवैसी ने तीन तलाक कानून को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि जिस पार्टी का लोकसभा में एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है, उसे केवल मुसलमानों से जुड़ा कानून बनाने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं होना चाहिए।
इस विवाद का UP की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब UP में धार्मिक संस्थाओं, कानूनी समानता और विधायी आचरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। आने वाले दिनों में BJP और अन्य दलों की प्रतिक्रियाएँ इस मुद्दे को और व्यापक रूप दे सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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