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ओवैसी की राजनीति मुसलमानों के लिए नाकाफी: मौलाना साजिद रशीदी का सीधा हमला

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ओवैसी की राजनीति मुसलमानों के लिए नाकाफी: मौलाना साजिद रशीदी का सीधा हमला

सारांश

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने एक साथ दो मोर्चे खोले — ओवैसी की एकल-समुदाय राजनीति को नाकाफी बताया और सपा पर आजम खान को अकेला छोड़ने का आरोप लगाया। जौहर यूनिवर्सिटी विवाद की आड़ में यह बयान मुस्लिम राजनीति की दिशा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 26 जुलाई को कहा कि ओवैसी की राजनीति से मुस्लिम समुदाय को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में सपा पर आजम खान के समर्थन में मज़बूती से न खड़े होने का आरोप लगाया।
रशीदी ने सुझाया कि सरकार यूनिवर्सिटी को अपने नियंत्रण में ले और किसानों को उचित मुआवज़ा दे।
उन्होंने चेतावनी दी कि कई दलों के मुस्लिम उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से वोट विभाजन होता है, जो समुदाय के लिए नुकसानदेह है।
आज़ादी के बाद से मुस्लिम नेताओं ने धर्म-आधारित राजनीति की बजाय मुख्यधारा के दलों को प्राथमिकता दी है — रशीदी।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 26 जुलाई को नई दिल्ली में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ओवैसी की राजनीति से मुस्लिम समुदाय को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा और सपा जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में आजम खान के समर्थन में मज़बूती से खड़ी नहीं हुई।

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर रशीदी का पक्ष

मौलाना रशीदी ने जौहर यूनिवर्सिटी का बचाव करते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने कुछ निर्माण कार्यों को अवैध करार दिया है, तो उसका समाधान पूरी संस्था को नुकसान पहुँचाना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, 'किसी व्यक्ति की गलती का खामियाजा उस संस्थान के छात्रों और कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए।'

उन्होंने एक सटीक उपमा देते हुए कहा, 'यदि माता-पिता से कोई भूल हो जाए, तो उसकी सज़ा बच्चे को नहीं मिलनी चाहिए। इसी तर्क से, यदि आजम खान से कोई चूक हुई है, तो जौहर यूनिवर्सिटी को उसका दंड क्यों दिया जाए।'

सरकार को सुझाव: यूनिवर्सिटी अपने नियंत्रण में ले

रशीदी ने सुझाव दिया कि सरकार चाहे तो यूनिवर्सिटी को अपने प्रशासनिक नियंत्रण में ले सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान की ज़मीन अनुचित तरीके से ली गई है, तो उसे उचित मुआवज़ा दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, 'शिक्षा संस्थान को राजनीति से अलग रखते हुए छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।'

ओवैसी की राजनीति पर सीधा प्रहार

मौलाना रशीदी ने असदुद्दीन ओवैसी की राजनीतिक रणनीति पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत में केवल एक समुदाय के नाम पर कोई राजनीतिक दल दीर्घकाल तक सफल नहीं हो सकता। उनके शब्दों में, 'देश में वही राजनीति टिकती है, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चले।'

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में मुस्लिम वोटों के विभाजन को लेकर बहस तेज़ हो रही है। रशीदी ने याद दिलाया कि आज़ादी के बाद से ही अनेक मुस्लिम नेताओं और विद्वानों ने धर्म-आधारित राजनीति का समर्थन नहीं किया और मुख्यधारा के दलों के साथ जुड़कर राजनीतिक भागीदारी की।

वोट विभाजन की चेतावनी

रशीदी ने एआईएमआईएम को लेकर स्पष्ट किया कि यदि पार्टी वास्तव में मुस्लिम हितों की पैरोकार है, तो उसे पहले अपने प्रभाव क्षेत्रों में ठोस राजनीतिक आधार तैयार करना होगा। उन्होंने आगाह किया कि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दलों के मुस्लिम उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से वोटों का बिखराव होता है, जिसका अंततः नुकसान स्वयं समुदाय को उठाना पड़ता है।

आगे की राह

गौरतलब है कि जौहर यूनिवर्सिटी विवाद उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीति के व्यापक संदर्भ में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। मौलाना रशीदी की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब विभिन्न राजनीतिक दल मुस्लिम मतदाताओं को लेकर अपनी-अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं। यह देखना होगा कि ओवैसी और सपा इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी गहराई में उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक पुनर्संरचना की आहट है। ओवैसी पर 'वोट-कटवा' का आरोप नया नहीं, पर इमाम एसोसिएशन जैसे प्रभावशाली धार्मिक मंच से आना इसे अलग वज़न देता है। विडंबना यह है कि जो दल मुस्लिम हितों का दावा करते हैं — सपा और एआईएमआईएम दोनों — वे इस बयान में एक साथ कटघरे में खड़े हैं। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज़ बयानबाज़ी मान सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मुस्लिम मतदाता अब अपनी राजनीतिक भागीदारी का पुनर्मूल्यांकन करने की स्थिति में हैं।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने ओवैसी पर क्या आरोप लगाए?
मौलाना रशीदी ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति से मुस्लिम समुदाय को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। उनके अनुसार, केवल एक समुदाय के नाम पर चलने वाली राजनीति भारत में दीर्घकाल तक सफल नहीं हो सकती।
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद क्या है और रशीदी का क्या रुख है?
जौहर यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में आजम खान द्वारा स्थापित संस्थान है, जिस पर कुछ निर्माण कार्यों को अवैध बताए जाने का विवाद है। रशीदी ने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती का दंड पूरे संस्थान के छात्रों और कर्मचारियों को नहीं मिलना चाहिए।
रशीदी ने समाजवादी पार्टी की आलोचना क्यों की?
रशीदी ने आरोप लगाया कि सपा जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में आजम खान के समर्थन में मज़बूती से खड़ी नहीं हुई। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
वोट विभाजन को लेकर रशीदी ने क्या चेतावनी दी?
रशीदी ने कहा कि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दलों के मुस्लिम उम्मीदवारों के चुनाव मैदान में उतरने से वोटों का बिखराव होता है, जिसका नुकसान अंततः मुस्लिम समुदाय को ही उठाना पड़ता है।
रशीदी ने जौहर यूनिवर्सिटी के भविष्य को लेकर क्या सुझाव दिया?
उन्होंने सुझाया कि सरकार चाहे तो यूनिवर्सिटी को अपने प्रशासनिक नियंत्रण में ले सकती है और यदि किसी किसान की ज़मीन अनुचित तरीके से ली गई है, तो उसे उचित मुआवज़ा दिया जाना चाहिए। शिक्षा संस्थान को राजनीति से दूर रखना उनकी प्राथमिक माँग है।
राष्ट्र प्रेस
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