ओवैसी की राजनीति मुसलमानों के लिए नाकाफी: मौलाना साजिद रशीदी का सीधा हमला
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 26 जुलाई को नई दिल्ली में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ओवैसी की राजनीति से मुस्लिम समुदाय को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा और सपा जौहर यूनिवर्सिटी विवाद में आजम खान के समर्थन में मज़बूती से खड़ी नहीं हुई।
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर रशीदी का पक्ष
मौलाना रशीदी ने जौहर यूनिवर्सिटी का बचाव करते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने कुछ निर्माण कार्यों को अवैध करार दिया है, तो उसका समाधान पूरी संस्था को नुकसान पहुँचाना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, 'किसी व्यक्ति की गलती का खामियाजा उस संस्थान के छात्रों और कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए।'
उन्होंने एक सटीक उपमा देते हुए कहा, 'यदि माता-पिता से कोई भूल हो जाए, तो उसकी सज़ा बच्चे को नहीं मिलनी चाहिए। इसी तर्क से, यदि आजम खान से कोई चूक हुई है, तो जौहर यूनिवर्सिटी को उसका दंड क्यों दिया जाए।'
सरकार को सुझाव: यूनिवर्सिटी अपने नियंत्रण में ले
रशीदी ने सुझाव दिया कि सरकार चाहे तो यूनिवर्सिटी को अपने प्रशासनिक नियंत्रण में ले सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान की ज़मीन अनुचित तरीके से ली गई है, तो उसे उचित मुआवज़ा दिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, 'शिक्षा संस्थान को राजनीति से अलग रखते हुए छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।'
ओवैसी की राजनीति पर सीधा प्रहार
मौलाना रशीदी ने असदुद्दीन ओवैसी की राजनीतिक रणनीति पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत में केवल एक समुदाय के नाम पर कोई राजनीतिक दल दीर्घकाल तक सफल नहीं हो सकता। उनके शब्दों में, 'देश में वही राजनीति टिकती है, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चले।'
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में मुस्लिम वोटों के विभाजन को लेकर बहस तेज़ हो रही है। रशीदी ने याद दिलाया कि आज़ादी के बाद से ही अनेक मुस्लिम नेताओं और विद्वानों ने धर्म-आधारित राजनीति का समर्थन नहीं किया और मुख्यधारा के दलों के साथ जुड़कर राजनीतिक भागीदारी की।
वोट विभाजन की चेतावनी
रशीदी ने एआईएमआईएम को लेकर स्पष्ट किया कि यदि पार्टी वास्तव में मुस्लिम हितों की पैरोकार है, तो उसे पहले अपने प्रभाव क्षेत्रों में ठोस राजनीतिक आधार तैयार करना होगा। उन्होंने आगाह किया कि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दलों के मुस्लिम उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से वोटों का बिखराव होता है, जिसका अंततः नुकसान स्वयं समुदाय को उठाना पड़ता है।
आगे की राह
गौरतलब है कि जौहर यूनिवर्सिटी विवाद उत्तर प्रदेश में मुस्लिम राजनीति के व्यापक संदर्भ में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। मौलाना रशीदी की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब विभिन्न राजनीतिक दल मुस्लिम मतदाताओं को लेकर अपनी-अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं। यह देखना होगा कि ओवैसी और सपा इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।