28 जुलाई 2026
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जौहर यूनिवर्सिटी बुलडोजर कार्रवाई पर रोक का स्वागत, मुफ्ती इस्माइल बोले — शिक्षा में भेदभाव नहीं

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जौहर यूनिवर्सिटी बुलडोजर कार्रवाई पर रोक का स्वागत, मुफ्ती इस्माइल बोले — शिक्षा में भेदभाव नहीं

सारांश

जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों पर बुलडोजर रोक को एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती इस्माइल ने राष्ट्रव्यापी राहत बताया। साथ ही उन्होंने ओवैसी के SP गठबंधन प्रस्ताव का समर्थन किया और नीट आंदोलन में गिरफ्तार छात्रों के मामले में पूर्व सहमति का पालन करने की माँग की।

मुख्य बातें

एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई की अस्थायी रोक को देशभर के लिए राहत भरी खबर बताया।
जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था, जो अब अस्थायी रूप से रोका गया है।
असदुद्दीन ओवैसी के समाजवादी पार्टी के साथ UP चुनाव गठबंधन प्रस्ताव पर मुफ्ती इस्माइल ने अखिलेश यादव से सकारात्मक विचार की अपील की।
वंदे मातरम विधेयक पर मुफ्ती इस्माइल ने विधेयक सामने आने तक प्रतीक्षा की नीति अपनाई।
सर्वोच्च न्यायालय ने 18 वर्ष से कम आयु के प्रदर्शनकारियों के मामले वापस लेने और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वालों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है।

एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने 28 जुलाई को मुंबई में जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई पर लगी अस्थायी रोक को देशभर के लिए राहत भरी खबर बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों को धार्मिक भेदभाव और विवादों से दूर रखा जाना चाहिए।

जौहर यूनिवर्सिटी विवाद और रोक का संदर्भ

मुफ्ती इस्माइल ने बताया कि जब वर्षों पहले जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई थी, उस समय रामपुर विकास प्राधिकरण से जुड़े वर्तमान नियम और नक्शा स्वीकृति की व्यवस्था उस स्वरूप में लागू नहीं थी। इसी आधार पर जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था, जिससे शिक्षा जगत और आम जनता में बेचैनी का माहौल बन गया था।

उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अधिकारियों की ओर से इस कार्रवाई पर रोक लगाई गई है, तो यह उन सभी लोगों के लिए अच्छी खबर है जो शिक्षा के क्षेत्र में रुचि रखते हैं। शिक्षा में किसी भी प्रकार की नफरत या धार्मिक भेदभाव का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

ओवैसी का गठबंधन प्रस्ताव और विपक्षी एकता

एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव दिए जाने पर मुफ्ती इस्माइल ने कहा कि ओवैसी पहले भी विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की पहल करते रहे हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भी ओवैसी ने अन्य दलों से गठबंधन की बात की थी, लेकिन उस समय प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। मुफ्ती इस्माइल ने उम्मीद जताई कि अखिलेश यादव इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेंगे, ताकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ विपक्षी वोटों का बिखराव रोका जा सके।

वंदे मातरम विधेयक पर प्रतीक्षा की नीति

वंदे मातरम के अपमान पर प्रस्तावित विधेयक के बारे में पूछे जाने पर मुफ्ती इस्माइल ने कहा कि जब यह विधेयक सदन में पेश होगा, तब संविधान के दायरे में रहते हुए विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग अपनी राय रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधेयक का पाठ सामने आने के बाद ही विस्तृत प्रतिक्रिया दी जाएगी।

छात्र आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया

सीजेपी के प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश — जिसमें 18 वर्ष से कम आयु के प्रदर्शनकारियों के मामले वापस लेने और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने की बात कही गई है — पर प्रतिक्रिया देते हुए मुफ्ती इस्माइल ने कहा कि यह आंदोलन नीट परीक्षा पेपर लीक और अन्य राज्यों में हुए पेपर लीक के मामलों को लेकर चलाया गया था।

उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान सरकार और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच जो सहमति बनी थी, उसी के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए। बाद में नई शर्तें जोड़ना उचित नहीं है। यदि पहले से तय सहमति के बाद अलग-अलग आधारों पर शर्तें लगाई जा रही हैं, तो यह सही तरीका नहीं माना जा सकता।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में शिक्षा संस्थानों पर प्रशासनिक कार्रवाइयों और छात्र आंदोलनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। आने वाले दिनों में जौहर यूनिवर्सिटी मामले में न्यायालय की अगली सुनवाई और UP चुनावी गठबंधन की दिशा, दोनों पर निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि रामपुर विकास प्राधिकरण के नियमों की पूर्वव्यापी लागू करने की यह प्रवृत्ति केवल इस संस्था तक सीमित क्यों नहीं रही। आलोचकों का कहना है कि देशभर में बुलडोजर कार्रवाइयों का पैटर्न दर्शाता है कि प्रशासनिक नियमों का चयनात्मक उपयोग एक राजनीतिक औजार बनता जा रहा है। ओवैसी का SP गठबंधन प्रस्ताव रणनीतिक रूप से समझ में आता है, परंतु महाराष्ट्र की नजीर बताती है कि विपक्षी एकता की बात और जमीनी हकीकत में बड़ा फर्क रहता है। नीट आंदोलन के छात्रों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप यह रेखांकित करता है कि सहमति के बाद शर्तें बदलने की प्रवृत्ति संस्थागत विश्वसनीयता को कमजोर करती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई क्यों हो रही थी?
जिला प्रशासन ने रामपुर विकास प्राधिकरण के नियमों और नक्शा स्वीकृति के आधार पर विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। विश्वविद्यालय की स्थापना के समय ये नियम उस स्वरूप में लागू नहीं थे, जिस आधार पर अब कार्रवाई की जा रही थी।
बुलडोजर कार्रवाई पर रोक किसने लगाई?
संबंधित अधिकारियों की ओर से यह अस्थायी रोक लगाई गई है। एआईएमआईएम विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल ने इसे शिक्षा जगत के लिए राहत भरा कदम बताया है।
ओवैसी ने अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव क्यों दिया?
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने UP विधानसभा चुनाव में BJP को रोकने के लिए समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट करने की नीति के तहत समाजवादी पार्टी को गठबंधन का प्रस्ताव दिया है। मुफ्ती इस्माइल ने कहा कि विपक्षी वोटों का बिखराव रोकने के लिए यह जरूरी कदम है।
सर्वोच्च न्यायालय ने छात्र प्रदर्शनकारियों के बारे में क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 18 वर्ष से कम आयु के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया है। यह आंदोलन नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में चलाया गया था।
वंदे मातरम विधेयक पर मुफ्ती इस्माइल का क्या रुख है?
मुफ्ती इस्माइल ने कहा कि जब यह विधेयक सदन में पेश होगा, तब संविधान के दायरे में रहते हुए विभिन्न समुदायों के लोग अपनी राय रखेंगे। उन्होंने विधेयक का पाठ सामने आने तक विस्तृत प्रतिक्रिया देने से परहेज किया।
राष्ट्र प्रेस
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