22 जुलाई 2026
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जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर ध्वस्तीकरण आदेश: प्रबंधन ने कमिश्नर कोर्ट में दी चुनौती, सपा का प्रतिनिधिमंडल 23 जुलाई को रामपुर रवाना

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जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों पर ध्वस्तीकरण आदेश: प्रबंधन ने कमिश्नर कोर्ट में दी चुनौती, सपा का प्रतिनिधिमंडल 23 जुलाई को रामपुर रवाना

सारांश

रामपुर में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों पर ध्वस्तीकरण का आदेश अब अदालती लड़ाई में बदल गया है। प्रबंधन का तर्क है कि निर्माण 2018 में हुआ, जबकि आरडीए का अधिकार क्षेत्र 2024 में बढ़ा — और सपा इसे राजनीतिक रंग देने मैदान में उतर आई है।

मुख्य बातें

मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट में आरडीए के ध्वस्तीकरण आदेश को चुनौती दी; सुनवाई 28 जुलाई को।
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत नक्शे का मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया।
प्रबंधन का तर्क: इमारतें 2018 में बनीं, जबकि क्षेत्र 27 सितंबर 2024 को आरडीए के अधिकार क्षेत्र में आया — इसलिए आरडीए प्रावधान लागू नहीं होते।
अधिवक्ता के अनुसार, प्रक्रियागत उल्लंघन पर अधिकतम ₹500 जुर्माना लगाया जा सकता है, ध्वस्तीकरण नहीं।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय के नेतृत्व में 23 जुलाई को प्रतिनिधिमंडल रामपुर जाएगा।
कुछ स्थानीय निवासियों ने विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण के बजाय सरकारी अधिग्रहण की माँग की है।

मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर के परिसर की 38 इमारतों को गिराने के रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के आदेश को विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मुरादाबाद मंडलायुक्त (कमिश्नर) कोर्ट में कानूनी चुनौती दी है। इस अपील पर 28 जुलाई को सुनवाई निर्धारित है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने 23 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रामपुर भेजने की घोषणा की है।

मुख्य घटनाक्रम

मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता जुनैद एजाज ने मुरादाबाद कमिश्नर कोर्ट में अपील दाखिल कर ध्वस्तीकरण आदेश पर तत्काल रोक की माँग की है। इससे पहले 28 जून को आरडीए के क्षेत्रीय अवर अभियंता ने वाद दर्ज कर ट्रस्ट के सचिव और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया था, और 8 जुलाई तक 38 भवनों के स्वीकृत नक्शे प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। विश्वविद्यालय का जवाब आने और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने इन 38 भवनों को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया।

प्रबंधन के कानूनी तर्क

अधिवक्ता जुनैद एजाज के अनुसार, विवाद की जड़ में ग्राम सिंघन खेड़ा है, जिसे 27 सितंबर 2024 को आरडीए के अधिकार क्षेत्र में शामिल किया गया। जबकि विश्वविद्यालय की संबंधित इमारतें वर्ष 2018 में निर्मित हो चुकी थीं। प्रबंधन का तर्क है कि निर्माण के समय यह क्षेत्र आरडीए के दायरे में नहीं था, इसलिए उस पर आरडीए के प्रावधान लागू नहीं होते।

इसके अतिरिक्त, प्रबंधन का कहना है कि संबंधित क्षेत्र में न तो कोई मास्टर प्लान लागू है और न ही जोनल डेवलपमेंट प्लान, और यह क्षेत्र नियंत्रित ग्राम क्षेत्र (कंट्रोल्ड विलेज एरिया) में नहीं आता। इसलिए भवन निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की कोई बाध्यता नहीं थी। अधिवक्ता ने यह भी कहा कि यदि किसी प्रक्रियागत उल्लंघन को मान भी लिया जाए, तो नियमानुसार अधिकतम ₹500 का जुर्माना लगाया जा सकता है — ध्वस्तीकरण का आदेश नहीं।

सरकार और प्राधिकरण का पक्ष

आरडीए का दावा है कि जाँच में विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतें बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित पाई गईं। प्राधिकरण के अनुसार, विश्वविद्यालय को नोटिस दिया गया, जवाब माँगा गया और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया — इसके बाद ही ध्वस्तीकरण का आदेश पारित हुआ।

समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर 23 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रामपुर जाएगा। यह प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मुलाकात कर ध्वस्तीकरण पर रोक की माँग करेगा और ज्ञापन सौंपेगा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल अपनी रिपोर्ट पार्टी नेतृत्व को सौंपेगा। गौरतलब है कि यह विश्वविद्यालय सपा नेता आज़म खान से जुड़ा रहा है, जो इस समय कानूनी विवादों में घिरे हैं।

आम जनता और स्थानीय माँगें

स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ रामपुरवासियों ने विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने के बजाय सरकार से उसका अधिग्रहण (टेकओवर) करने की माँग की है। साथ ही उन्होंने आज़म खान से भी अपील की है कि वे विश्वविद्यालय को राष्ट्रहित में देश को सौंप दें। यह मामला अब केवल एक कानूनी विवाद नहीं रहा — इसने रामपुर की राजनीतिक और सामाजिक बहस को नया आयाम दे दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी परतें कहीं गहरी हैं। आरडीए का अधिकार क्षेत्र 2024 में बढ़ाया गया और निर्माण 2018 में हुआ — यह कालक्रम का सवाल अदालत में निर्णायक साबित हो सकता है। साथ ही, सपा का इस मुद्दे पर तत्परता से उतरना यह संकेत देता है कि पार्टी इसे आज़म खान से जुड़े मतदाता आधार को साधने के अवसर के रूप में देख रही है। स्थानीय निवासियों की 'टेकओवर' माँग एक तीसरा रास्ता सुझाती है जिस पर न सरकार ने कोई स्पष्ट रुख लिया है, न विपक्ष ने — और यही इस पूरी बहस का सबसे अनुत्तरित पहलू है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों पर ध्वस्तीकरण का आदेश क्यों दिया गया?
रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की जाँच में विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतें बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित पाई गईं। नोटिस और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने इन्हें अवैध मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कमिश्नर कोर्ट में क्या तर्क दिए हैं?
प्रबंधन का मुख्य तर्क यह है कि संबंधित इमारतें 2018 में बनी थीं, जबकि वह क्षेत्र (ग्राम सिंघन खेड़ा) 27 सितंबर 2024 को आरडीए के अधिकार क्षेत्र में आया। इसलिए निर्माण के समय नक्शा स्वीकृत कराने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी और आरडीए के प्रावधान पूर्वव्यापी रूप से लागू नहीं हो सकते।
मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
मुरादाबाद मंडलायुक्त (कमिश्नर) कोर्ट में इस अपील पर 28 जुलाई को सुनवाई निर्धारित है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने की माँग की है।
समाजवादी पार्टी इस मामले में क्या भूमिका निभा रही है?
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर 23 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रामपुर जाएगा। यह प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिलकर ध्वस्तीकरण रोकने की माँग करेगा और ज्ञापन सौंपेगा।
स्थानीय लोगों की विश्वविद्यालय के भविष्य को लेकर क्या माँग है?
कुछ रामपुरवासियों ने विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने के बजाय सरकार से उसका अधिग्रहण (टेकओवर) करने की माँग की है। उन्होंने आज़म खान से भी अपील की है कि वे विश्वविद्यालय को राष्ट्रहित में देश को सौंप दें।
राष्ट्र प्रेस
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