रामपुर जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर बुलडोजर का आदेश, RDA ने अवैध निर्माण पर की बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने 15 जुलाई 2025 को मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बिना नक्शा स्वीकृति के खड़े 38 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत की गई है और राज्य में अवैध निर्माण के विरुद्ध जारी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय परिसर के निर्माणों की जाँच शुरू की गई। प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 8 जुलाई को लिखित जवाब दाखिल किया और 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों के अधिकारी एवं अधिवक्ता उपस्थित रहे।
जाँच के दौरान जिला पंचायत रामपुर से प्राप्त अभिलेखों से स्पष्ट हुआ कि केवल मेडिकल कॉलेज भवन और अकादमिक ब्लॉक के नक्शे ही स्वीकृत पाए गए। शेष 38 भवनों के लिए किसी सक्षम प्राधिकारी से कोई वैध अनुमति उपलब्ध नहीं थी।
विश्वविद्यालय की दलीलें और प्राधिकरण का रुख
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से तर्क दिया गया कि जिस ग्राम सिंगनखेड़ा में परिसर स्थित है, वह 27 सितंबर 2024 से पहले RDA के विकास क्षेत्र में शामिल नहीं था। इसलिए निर्माण के समय नक्शा स्वीकृति की आवश्यकता नहीं थी। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि निर्माण काफी पहले किए गए थे और उन्हें वर्तमान नियमों के आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता।
प्राधिकरण ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि निर्माण के समय संबंधित सक्षम निकाय से नक्शा स्वीकृति लेना अनिवार्य था। प्राधिकरण ने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन स्वयं इस आवश्यकता से अवगत था, क्योंकि उसने दो भवनों के लिए जिला पंचायत से अनुमति प्राप्त की थी। इसके बावजूद शेष भवन बिना अनुमोदन के बनाए गए।
कानूनी आधार
RDA ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा-59 के तहत ऐसे निर्माणों पर कार्रवाई की जा सकती है, भले ही वह क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हुआ हो। विश्वविद्यालय की ओर से मास्टर प्लान, जोनल प्लान तथा अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए जो कानूनी तर्क प्रस्तुत किए गए, प्राधिकरण ने उन्हें 'गलत व्याख्या' करार दिया।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आज़म खान द्वारा स्थापित संस्थान है, जो पहले से ही कई कानूनी विवादों में घिरा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार पूरे राज्य में अवैध निर्माणों के खिलाफ व्यापक अभियान चला रही है।
आगे की स्थिति
ध्वस्तीकरण आदेश जारी होने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन के पास न्यायालय में चुनौती देने का विकल्प खुला है। 38 भवनों की वास्तविक तोड़फोड़ कब होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्राधिकरण का आदेश कानूनी रूप से लागू करने योग्य है। यह मामला उत्तर प्रदेश में भू-उपयोग नियमों के प्रवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।