जम्मू रिंग रोड कॉरिडोर पर JDA का सबसे बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान, 15 से अधिक अवैध निर्माण ढहाए
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) ने 4 मई 2026 को जम्मू रिंग रोड कॉरिडोर के किनारे अब तक का सबसे बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान चलाया, जिसमें बिना अनुमति के बनाए गए 15 से अधिक अवैध ढाँचों को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई सुनियोजित शहरी विकास सुनिश्चित करने और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अतिक्रमणों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से की गई।
मुख्य घटनाक्रम
JDA के अनुसार, ध्वस्त किए गए सभी निर्माण स्वीकृत भूमि उपयोग मानकों और भवन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन कर रहे थे। प्रारंभिक जाँच में पाया गया कि इन अवैध ढाँचों को सक्षम प्राधिकरण से आवश्यक निर्माण अनुमति लिए बिना खड़ा किया गया था। इनमें से कई संरचनाएँ संरचनात्मक रूप से कमज़ोर थीं अथवा महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अतिक्रमण कर बनाई गई थीं, जिससे आसपास के आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जानमाल का खतरा बढ़ गया था।
कार्रवाई कैसे हुई
यह ध्वस्तीकरण अभियान JDA के प्रवर्तन विंग द्वारा स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था एजेंसियों की सहायता से चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, पूरी कार्रवाई शांतिपूर्वक और बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुई। गौरतलब है कि नियमों के तहत संबंधित लोगों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे, ताकि उन्हें नियमों का पालन करने का पर्याप्त अवसर मिल सके।
JDA की प्रतिबद्धता और चेतावनी
प्राधिकरण ने जम्मू में नियोजित विकास बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा को भी खतरे में डालते हैं। JDA ने आम जनता से अपील की कि वे निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी आवश्यक अनुमतियाँ अवश्य लें और भवन नियमों का सख्ती से पालन करें। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
जम्मू-श्रीनगर में नियामक ढाँचा
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू शहर में जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) और श्रीनगर शहर में श्रीनगर विकास प्राधिकरण (SDA) दोनों नगर निगमों के साथ मिलकर विकास योजनाओं और निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। इसका उद्देश्य दोनों राजधानी शहरों का सुरक्षित, व्यवस्थित और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। आने वाले समय में रिंग रोड कॉरिडोर के किनारे और भी कड़ी निगरानी अपेक्षित है।