जौहर विश्वविद्यालय विध्वंस आदेश पर रोक, संभागीय आयुक्त ने रामपुर प्रशासन को यथास्थिति का निर्देश दिया
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद आजम खान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर को 27 जुलाई 2026 को बड़ी कानूनी राहत मिली, जब उत्तर प्रदेश सरकार के संभागीय आयुक्त ने रामपुर के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा परिसर की 38 इमारतों के विरुद्ध जारी विध्वंस आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। अधिकारियों के अनुसार, रामपुर जिला प्रशासन को यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दे दिया गया है, जिससे परिसर की ओर बढ़ रहे बुलडोजरों पर तत्काल विराम लग गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय परिसर में निरीक्षण के बाद दावा किया कि कुल 40 इमारतों में से 38 आवश्यक स्वीकृतियों और अनुमोदित नक्शों के बिना निर्मित की गई हैं। आरडीए ने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर इन भवनों को स्वयं हटाने का निर्देश दिया था, और चेतावनी दी थी कि ऐसा न होने पर जिला प्रशासन स्वयं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अनधिकृत निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाइयाँ राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन चुकी हैं।
सपा का विरोध प्रदर्शन
विध्वंस आदेश के विरोध में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अयोध्या की सड़कों पर प्रदर्शन किया। पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक तेज नारायण पांडे के नेतृत्व में सैकड़ों सपा कार्यकर्ताओं ने जौहर विश्वविद्यालय के समर्थन में नारे लगाए और सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने शहर के जिला मजिस्ट्रेट को भारत के राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्रस्तावित विध्वंस कार्य को रोकने और सभी पक्षों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर देने की माँग की गई।
सपा नेताओं के आरोप
तेज नारायण पांडे ने कहा कि राज्य प्रशासन को पूरे शिक्षण संस्थान को बंद करने के बजाय दस्तावेजी या तकनीकी खामियों को दूर करने का अवसर देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि 'सरकार स्कूलों को बंद कर उनकी जगह शराब की दुकानें खोलना चाहती है।' पांडे ने यह भी कहा कि 'एक ओर देश को विश्व गुरु बनाने की बात हो रही है, वहीं बच्चों के हाथों से कलम और किताबें छीनने की कोशिश की जा रही है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भवन-निर्माण में कोई वास्तविक खामी है, तो नियमों के अनुसार सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए, न कि सीधे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई।
आगे क्या होगा
संभागीय आयुक्त की ओर से अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन और रामपुर विकास प्राधिकरण दोनों के अपने-अपने कानूनी पक्ष सुने जाने की संभावना है। गौरतलब है कि आजम खान स्वयं कई कानूनी मामलों में घिरे रहे हैं, और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद वर्षों से चले आ रहे हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश में शिक्षण संस्थानों पर प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है।