जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण रोकी, मंडलायुक्त ने आरडीए के आदेश पर लगाई अंतरिम रोक
सारांश
मुख्य बातें
रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी को 27 जुलाई 2026 को बड़ी कानूनी राहत मिली, जब मुरादाबाद मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के 38 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी। विश्वविद्यालय प्रबंधन की वैधानिक अपील पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह निर्देश जारी किया गया, जिससे फिलहाल परिसर में बुलडोजर कार्रवाई टल गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
आरडीए ने 15 जुलाई को विश्वविद्यालय के 40 भवनों में से 38 को बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्मित बताते हुए अवैध घोषित किया था। प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को 20 दिन के भीतर इन भवनों को स्वयं ध्वस्त करने का निर्देश दिया था, और आदेश का पालन न होने की स्थिति में प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
अपील और अंतरिम राहत
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 20 जुलाई को मंडलायुक्त न्यायालय में वैधानिक अपील दायर की और साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय का भी रुख किया। दोनों मामलों में 28 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित थी, किंतु मुरादाबाद में वरिष्ठ अधिवक्ता आमोद अग्रवाल के निधन के कारण न्यायिक कार्य स्थगित होने की आशंका को देखते हुए विश्वविद्यालय की ओर से सोमवार को ही शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया गया। मंडलायुक्त न्यायालय ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद आरडीए के ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
जौहर ट्रस्ट और छात्रों का विरोध
आरडीए के आदेश के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन, जौहर ट्रस्ट, छात्र और कर्मचारी लगातार विरोध जता रहे थे। विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों का धरना भी जारी है। जौहर ट्रस्ट का कहना है कि प्राधिकरण ने उपलब्ध अभिलेखों और दस्तावेजों पर समुचित विचार किए बिना ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया है।
आगे क्या होगा
विश्वविद्यालय के अधिवक्ता जुनैद एजाज ने बताया कि अब मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाइयाँ तेज हो रही हैं और न्यायिक हस्तक्षेप की माँग बढ़ती जा रही है।