ओवैसी आक्रमणकारियों की जगह देश के असली नायकों को याद करें: भाजपा सांसद दिनेश शर्मा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने 8 जून 2026 को लखनऊ में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के प्रस्तावित धार्मिक दौरे पर तीखी टिप्पणी की। शर्मा ने कहा कि यह व्यक्तिगत निर्णय है कि कोई कहाँ जाए, किंतु यह अधिक उचित होगा कि ओवैसी उन आक्रमणकारियों के प्रति सहानुभूति जताने की बजाय भारत के देशभक्त नायकों को सम्मान दें, जिन्होंने उन आक्रांताओं से लोहा लिया था।
ओवैसी के दौरे पर दिनेश शर्मा की प्रतिक्रिया
शर्मा ने स्पष्ट किया कि किसी के धार्मिक दौरे पर आपत्ति नहीं है, परंतु ऐतिहासिक संदर्भ को नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन आक्रमणकारियों ने इस देश पर हमले किए, उनके प्रति अनावश्यक श्रद्धा दिखाने की बजाय उन वीरों को याद किया जाना चाहिए जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत की रक्षा की।
अखिलेश यादव और राम जन्मभूमि विवाद पर निशाना
शर्मा ने समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव पर भी प्रहार किया। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम और उनसे जुड़े विषयों पर बिना तथ्यात्मक आधार के विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी चंपत राय पहले ही इस मसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। शर्मा ने नेताओं से अपील की कि वे किसी भी धार्मिक स्थल या आस्था के केंद्र को लेकर भ्रामक बयान देने से बचें।
इंडिया अलायंस पर तीखा हमला
इंडिया गठबंधन की बैठकों और उसकी एकजुटता पर सवाल उठाते हुए शर्मा ने कहा कि विपक्षी दल केवल नाम के लिए एकत्र हैं — असल में वे एकजुट नहीं दिखते। उनके अनुसार जनता ने इस गठबंधन को पहले ही नकार दिया है और विपक्ष अब बैकफुट पर है।
शर्मा ने दावा किया कि अलग-अलग राज्यों में गठबंधन के घटक दल आपस में ही आरोप-प्रत्यारोप लगाते रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चुनावों के बाद समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए थे।
गठबंधन को बताया 'विखंडनकारी'
शर्मा ने इंडिया अलायंस को 'विखंडनकारी गठबंधन' की संज्ञा देते हुए कहा कि इसमें राष्ट्रीय हितों की कोई स्पष्ट दृष्टि नहीं है। उनके अनुसार यह गठबंधन केवल सत्ता प्राप्ति के लिए बना है और इसके घटकों में आपसी विश्वास का अभाव है। उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर सहयोगी दल एक-दूसरे पर धोखाधड़ी के आरोप लगाते रहे हैं, जिससे इसकी स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है और विभिन्न दल अपनी-अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटे हैं। गौरतलब है कि ओवैसी और अखिलेश यादव दोनों ही हाल के समय में धार्मिक और ऐतिहासिक मसलों पर बयानबाज़ी करते रहे हैं, जिस पर BJP लगातार पलटवार करती आई है।