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क्या ओवैसी के पास आरएसएस प्रमुख पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है?

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क्या ओवैसी के पास आरएसएस प्रमुख पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है?

सारांश

भाजपा और शिवसेना ने ओवैसी की आरएसएस प्रमुख भागवत पर की गई टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की है। जानिए दोनों पक्षों की बातें और इस विवाद का क्या महत्व है।

मुख्य बातें

ओवैसी की आरएसएस प्रमुख भागवत पर टिप्पणियाँ विवाद का कारण बनीं।
भाजपा और शिवसेना ने ओवैसी को नैतिक अधिकार नहीं दिया।
'लव जिहाद' पर चर्चा ने राजनीतिक तनाव को बढ़ाया।
भागवत ने परिवारों में संवाद की कमी को कारण बताया।
लव मैरिज और लव जिहाद में स्पष्ट अंतर है।

नई दिल्ली, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना ने सोमवार को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर की गई टिप्पणियों की तीखी निंदा की।

ओवैसी ने 'लव जिहाद' पर टिप्पणी की थी। दोनों पार्टियों ने कहा कि ओवैसी के पास आरएसएस प्रमुख को चुनौती देने का नैतिक और राजनीतिक अधिकार नहीं है।

भागवत ने भोपाल में स्त्री शक्ति संवाद कार्यक्रम में कहा था कि 'लव जिहाद' संबंधी घटनाएँ परिवारों में संवाद और नैतिक मूल्यों की कमी के कारण होती हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को रोकने का प्रयास घर से ही शुरू होना चाहिए।

ओवैसी ने इस आधार और शब्दावली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वयस्कों को अपने जीवनसाथी को चुनने का कानूनी और संवैधानिक अधिकार है।

उन्होंने कहा, "अगर 'लव जिहाद' सचमुच हो रहा है, तो संसद में आंकड़े पेश करें। इस शब्द को परिभाषित करें और पिछले 11 वर्षों के रिकॉर्ड दिखाएं।"

ओवैसी की टिप्पणियों पर भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राष्ट्र प्रेस को बताया, "ओवैसी के पास आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर सवाल उठाने का न तो नैतिक अधिकार है और न ही राजनीतिक। लव जिहाद तब होता है जब कोई मुस्लिम युवक या किसी अन्य धर्म का व्यक्ति मासूम बनकर और हिंदू नाम अपनाकर हिंदू लड़कियों को धोखा देता है।"

उन्होंने कहा कि इस अवधारणा को अंतरधार्मिक विवाहों के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।

शाहदेव ने आगे कहा, "लव मैरिज और लव जिहाद में स्पष्ट अंतर है। लव मैरिज में व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता होती है। वहीं, लव जिहाद वह स्थिति है, जब विवाह के अगले दिन से ही पति अपनी पत्नी पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालना शुरू कर देता है। लव जिहाद एक कड़वी सच्चाई है और हमारी सरकार इस मामले में बहुत सख्त है।"

शिवसेना नेता शाइना एनसी ने भी आरएसएस प्रमुख के समर्थन में कहा कि भागवत की टिप्पणियों की गलत व्याख्या की जा रही है।

उन्होंने कहा, "मोहन भागवत कहते हैं कि यदि हम अपने समाज में, अपने परिवार की संरचना में अच्छे मूल्यों को स्थापित करें, तो विवाह अटूट रहेगा। अन्य विचार प्रक्रियाओं को दूर करने के लिए, हमें विचारधारा, मूल्य प्रणाली और संस्कृति-सभ्यता का एक मजबूत आधार चाहिए।"

उन्होंने कहा, "ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख की हर बात को गलत समझा है। उन्होंने 'लव जिहाद' पर आंकड़े मांगे हैं। लव जिहाद वह है जब एक लड़का किसी लड़की को बहला-फुसलाकर शादी के बंधन में बांधता है और विवाह संस्था को कलंकित करता है।"

उन्होंने आगे कहा कि यह मुद्दा अलग-अलग पृष्ठभूमि के सहमति देने वाले वयस्कों के बीच विवाह का विरोध करने के बारे में नहीं है।

उन्होंने कहा, "यहां, आप (ओवैसी) यह सुझाव देने की कोशिश कर रहे हैं कि अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के दो वयस्क आपस में शादी नहीं कर सकते? यह किसने कहा? हम कह रहे हैं कि लड़के द्वारा लड़की को धोखा देना गलत है। अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लोग शादी कर सकते हैं। यही विविधता में एकता की सुंदरता है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि राजनीतिक संवाद में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है। लेकिन जब यह नैतिकता और राजनीतिक जिम्मेदारी की बात आती है, तो सभी को अपनी सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। समाज की विविधता में एकता बनाए रखना सभी का दायित्व है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ओवैसी की टिप्पणियों का राजनीतिक महत्व है?
ओवैसी की टिप्पणियों ने राजनीतिक दलों के बीच विवाद को बढ़ा दिया है, जिससे यह मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की टिप्पणियाँ क्या थीं?
भागवत ने कहा कि 'लव जिहाद' की घटनाएँ मुख्य रूप से परिवारों में संवाद की कमी के कारण होती हैं।
भाजपा और शिवसेना की प्रतिक्रिया क्या है?
भाजपा और शिवसेना ने ओवैसी की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि उनके पास आरएसएस प्रमुख पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं है।
क्या लव मैरिज और लव जिहाद में कोई अंतर है?
हाँ, लव मैरिज में व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता होती है, जबकि लव जिहाद में विवाह के बाद धर्म परिवर्तन का दबाव होता है।
राष्ट्र प्रेस
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