25 अगस्त 2026
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हिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सियासत तेज, BJP-कांग्रेस-सपा नेताओं की अलग-अलग राय

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हिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सियासत तेज, BJP-कांग्रेस-सपा नेताओं की अलग-अलग राय

सारांश

इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब फैसले ने एक बार फिर धर्म और शिक्षा की सीमा-रेखा पर बहस छेड़ दी। BJP ने फैसले का समर्थन किया, सपा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने की बात कही और कांग्रेस ने संतुलन की वकालत की — तीन अलग-अलग रुख, एक ही सवाल।

मुख्य बातें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिजाब को स्कूल यूनिफॉर्म से अलग मानने का फैसला सुनाया।
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने फैसले को 'बिल्कुल सही' बताया और कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कोर्ट के निर्देश का पालन करेगी।
सपा नेता आशुतोष वर्मा ने फैसले पर सवाल उठाए और सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की माँग की।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने स्कूल प्रशासन के नियमों के पालन और धार्मिक सद्भाव दोनों की वकालत की।
यह विवाद 2022 के कर्नाटक हिजाब मामले के बाद देश में इस मुद्दे पर दूसरी बड़ी न्यायिक प्रतिक्रिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा हिजाब को स्कूल यूनिफॉर्म से अलग मानने के फैसले पर 25 अगस्त को देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया। बिहार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष संजय सरावगी ने फैसले को 'बिल्कुल सही' करार दिया, जबकि विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की माँग की।

संजय सरावगी की प्रतिक्रिया

बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'यह सही फैसला है। स्कूल में धार्मिक कपड़े क्यों पहनने चाहिए? हिजाब क्यों पहनना चाहिए? इसलिए, यह बिल्कुल सही फैसला है। कोर्ट का जो भी फैसला होगा, उत्तर प्रदेश सरकार उसे मानेगी और लागू करेगी।'

सरावगी ने आगे कहा कि चाहे बिहार की सरकार हो या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की सरकार, छात्रों और नौजवानों के विषय पर दोनों गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों के लिए पोर्टल बनाए गए हैं और कड़े कानूनी प्रावधान किए गए हैं।

समाजवादी पार्टी की राय

समाजवादी पार्टी (सपा) नेता आशुतोष वर्मा ने फैसले पर असहमति जताते हुए कहा, 'माननीय सुप्रीम कोर्ट जो भी कहेगा, हम उसे मानेंगे, लेकिन स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने में क्या समस्या है? अगर कोई व्यक्ति अपनी आस्था के तहत हिजाब पहनता है, तो इसमें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि राज्य सरकारों को खुश करने के लिए कोई निर्णय लिया जा रहा है, तो वे उसका विरोध करेंगे।

कांग्रेस का संतुलित रुख

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) नेता सुरेंद्र राजपूत ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा, 'पूरे देश में एक ही कानून है और सभी को धार्मिक सद्भाव बनाए रखने की आज़ादी है। स्कूल यूनिफॉर्म स्कूल प्रशासन के नियमों के तहत आती है, इसलिए उनका उल्लंघन नहीं होना चाहिए, ताकि सभी छात्र एकरूपता बनाए रखें।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी धर्म विशेष पर चोट नहीं पहुँचनी चाहिए और स्कूल व जिला प्रशासन को इसके लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए।

फैसले का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि हिजाब और स्कूल यूनिफॉर्म का विवाद पहली बार नहीं उठा है। 2022 में कर्नाटक में इसी मुद्दे पर व्यापक विवाद हुआ था, जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा था। यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक पहचान और शैक्षणिक संस्थाओं के नियमों के बीच संतुलन पर बहस जारी है। सपा नेता ने स्पष्ट किया कि वे सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय का इंतज़ार करेंगे, जिससे यह मामला उच्चतम न्यायालय में जाने की संभावना बनी हुई है।

आगे क्या होगा

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच यह स्पष्ट है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। सपा ने शीर्ष अदालत से सभी पक्षों से विचार-विमर्श की माँग की है। उत्तर प्रदेश सरकार ने संकेत दिया है कि वह कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ बताती हैं कि असली लड़ाई अदालत से बाहर है। BJP का समर्थन और सपा का विरोध उस परिचित ध्रुवीकरण को दर्शाता है जो 2022 के कर्नाटक विवाद में भी देखा गया था — जहाँ कानून कम और चुनावी गणित अधिक बोला। कांग्रेस का 'संतुलन' वाला रुख दिखाता है कि वह इस मुद्दे पर किसी पाले में खड़ी होने से बच रही है। असली सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एकसमान राष्ट्रीय मानक तय करेगा, या यह राज्य-दर-राज्य विवाद बना रहेगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिजाब पर क्या फैसला दिया?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिजाब को स्कूल यूनिफॉर्म से अलग माना है, यानी स्कूल परिसर में यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने को अनिवार्य नहीं माना जा सकता। यह फैसला स्कूलों में धार्मिक पहनावे और संस्थागत नियमों के बीच की सीमा तय करता है।
BJP नेता संजय सरावगी ने फैसले पर क्या कहा?
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने फैसले को 'बिल्कुल सही' बताया और कहा कि स्कूल में धार्मिक कपड़े पहनने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कोर्ट के फैसले को मानेगी और लागू करेगी।
समाजवादी पार्टी ने इस फैसले पर क्या रुख अपनाया?
सपा नेता आशुतोष वर्मा ने फैसले पर असहमति जताई और कहा कि अगर कोई अपनी आस्था के तहत हिजाब पहनता है तो इसमें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से सभी पक्षों से बात कर निर्णय लेने की माँग की।
कांग्रेस का इस मामले पर क्या कहना है?
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म के नियमों का पालन होना चाहिए ताकि एकरूपता बनी रहे, लेकिन साथ ही किसी धर्म विशेष पर चोट नहीं पहुँचनी चाहिए।
क्या यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जा सकता है?
सपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की माँग करते हैं। 2022 में कर्नाटक हिजाब मामले की तरह, इस फैसले को भी उच्चतम न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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