क्या बिहार में दुकानों में हिजाब-मास्क बैन पर कांग्रेस का विरोध सही है?
सारांश
Key Takeaways
- संविधान की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
- राजनीतिक विवाद से निपटने के लिए संवाद आवश्यक है।
- भाजपा के निर्णयों पर सवाल उठाना आवश्यक है।
- सामाजिक सौहार्द को बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए।
- कांग्रेस ने अपनी आवाज उठाई है।
पटना, ८ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस ने बिहार में दुकानों में हिजाब, मास्क और हेलमेट पर बैन के निर्णय का विरोध किया है। कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष राजेश राम ने यह आरोप लगाया कि एक खास वर्ग को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। भाजपा सीधे तौर पर संविधान को समाप्त करना चाहती है।
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कहा, "देश का सौहार्द बिगाड़ा जा रहा है। जहाँ भी भाजपा की सरकार है, ऐसे आदेश लागू हो रहे हैं। हमारा सेक्युलर संविधान कमजोर किया जा रहा है।"
उन्होंने कहा कि विपक्ष के रूप में हम यह कहते हैं कि संविधान धार्मिक आस्था की रक्षा करता है, फिर भी कई अधिकारों पर हमला हो रहा है और भाजपा अपने हमलों को जारी रखे हुए है।
मधुबनी जिले में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प पर राजेश राम ने स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा, "हर पार्टी कार्यकर्ता काम करना चाहता है और प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने हितों के अनुसार पद चाहता है। इससे एक राष्ट्रीय पार्टी में स्वाभाविक रूप से संतोष या असंतोष पैदा होता है। यह एक परंपरा है। मधुबनी की घटना पहली नजर में चर्चा के लायक नहीं है। एक कार्यकर्ता ने आवाज उठाई, बाद में पता चला कि वह बाहरी था।"
उन्होंने आगे बताया कि 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार' योजना जैसे अच्छे कामों को रोक दिया गया है। महात्मा गांधी के विचारों को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। हम इसके लिए लड़ते रहेंगे। कभी-कभी ऐसे मामलों में बाहरी लोग भी शामिल हो जाते हैं।
राजेश राम ने फिर से दोहराया कि मधुबनी में एक बाहरी व्यक्ति ने आकर बैठक को खराब करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, "बिहार में कांग्रेस की रैली के दौरान कुछ बाहरी लोग आए, लोगों को परेशान किया और गाली-गलौज की। बाद में पता चला कि वे कांग्रेस कार्यकर्ता नहीं थे। इसी तरह, इस मामले में भी शामिल लोग बाहरी थे।"
बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए राजेश राम ने कहा कि टीचर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से लेकर छात्रों तक, अपने अधिकारियों के लिए आवाज उठाने पर उन्हें पीटा जाता है। कई लोगों को बेहोशी की हालत में अस्पताल भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि यह सरकार हेरफेर करके सत्ता में आई है, इसलिए घमंडी है और बिना किसी डर के काम करती है।