बोम्मई का सिद्धारमैया सरकार पर हमला: स्कूलों में हिजाब की अनुमति 'तुष्टीकरण की राजनीति'

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बोम्मई का सिद्धारमैया सरकार पर हमला: स्कूलों में हिजाब की अनुमति 'तुष्टीकरण की राजनीति'

सारांश

कर्नाटक सरकार ने स्कूलों में हिजाब समेत धार्मिक प्रतीकों की अनुमति देते हुए 2022 का पुराना आदेश पलट दिया। पूर्व CM बोम्मई ने इसे 'तुष्टीकरण की राजनीति' बताया और चेताया कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित होने के बावजूद यह फैसला छात्रों में धार्मिक विभाजन को बढ़ावा देगा।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने 5 फरवरी 2022 का स्कूल यूनिफॉर्म आदेश वापस लेकर हिजाब, पगड़ी, पवित्र धागे सहित धार्मिक प्रतीकों की अनुमति दी।
BJP सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इसे 'तुष्टीकरण की राजनीति' और 'गैर-जिम्मेदाराना फैसला' बताया।
बोम्मई ने चेतावनी दी कि आदेश वापस न लेने पर सिद्धारमैया सरकार भविष्य में छात्रों के बीच किसी भी भेदभाव के लिए जिम्मेदार होगी।
हिजाब विवाद से जुड़ा मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, जहाँ पहले विभाजित फैसला आ चुका है।
बोम्मई ने राज्य सरकार पर शिक्षकों की कमी और शैक्षणिक स्तर में गिरावट जैसी असली समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने शुक्रवार, 15 मई को कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार के उस फैसले की कड़ी निंदा की, जिसमें राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब सहित अन्य धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति दी गई है। बोम्मई ने इसे 'अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना' और 'तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित' कदम करार दिया, जो छात्रों के बीच धार्मिक आधार पर विभाजन की जड़ें बो सकता है।

नया आदेश क्या है

कर्नाटक सरकार ने बुधवार को 5 फरवरी 2022 के अपने पुराने स्कूल यूनिफॉर्म आदेश को वापस ले लिया और नए दिशानिर्देश जारी किए। इन दिशानिर्देशों के तहत राज्यभर के शिक्षण संस्थानों में छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ-साथ हिजाब, पवित्र धागा, पगड़ी और अन्य धार्मिक प्रतीक पहनने की छूट दी गई है। इस फैसले ने कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छेड़ दी है।

बोम्मई की मुख्य आपत्तियाँ

एक प्रेस बयान में बोम्मई ने वैश्विक संदर्भ का हवाला देते हुए दावा किया कि सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों में महिलाएं और लड़कियाँ अपने रोज़मर्रा के जीवन में हिजाब से धीरे-धीरे दूर हो रही हैं। उनके अनुसार, ऐसे वैश्विक बदलाव के दौर में कर्नाटक में इस तरह का आदेश जारी करना लड़कियों को पीछे धकेलने जैसा है।

बोम्मई ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना किसी सार्वजनिक माँग के और शिक्षा व्यवस्था के शांतिपूर्ण संचालन के बावजूद यह विवाद खड़ा किया है। उन्होंने कहा, 'यह जिम्मेदार शासन नहीं है। यह एक बेहद गैर-जिम्मेदार फैसला है।'

कानूनी पृष्ठभूमि

बोम्मई ने याद दिलाया कि उनके मुख्यमंत्री काल में सरकार ने 1980 के स्कूल यूनिफॉर्म नियमों के तहत एक स्पष्टीकरण आदेश जारी किया था, जिसे कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी सही ठहराया था। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा, जहाँ विभाजित फैसला आया और मामला अभी भी वहाँ लंबित है। उन्होंने कहा, 'भले ही यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, फिर भी सरकार एक बार फिर बच्चों के बीच विभाजन और चिंता का माहौल पैदा कर रही है।'

सरकार पर शिक्षा कुप्रबंधन का आरोप

बोम्मई ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था के कुप्रबंधन का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, राज्य में शिक्षकों की कमी और शैक्षणिक स्तर में गिरावट जैसी गंभीर समस्याएँ हैं, जिन पर ध्यान देने की बजाय सरकार ने विवादास्पद आदेश जारी करना उचित समझा।

चेतावनी और आगे की राह

बोम्मई ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, 'यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो भविष्य में छात्रों के बीच होने वाली किसी भी चिंता और भेदभाव के लिए सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।' उन्होंने माँग की कि सरकार यह स्पष्ट करे कि उसने अचानक यह फैसला क्यों लिया, और कहा कि 'तुष्टीकरण की राजनीति के अलावा इस कदम में और कुछ नज़र नहीं आता।' यह विवाद आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में और गहरा हो सकता है, खासकर जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका यह सवाल वाजिब है कि जब शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी और गुणवत्ता की समस्याएँ ज्वलंत हैं, तो सरकार ने इस विवादास्पद मुद्दे को प्राथमिकता क्यों दी। दूसरी ओर, यह भी उतना ही सच है कि 2022 का पुराना आदेश खुद एक राजनीतिक निर्णय था — दोनों पक्ष शिक्षा को राजनीति के मैदान की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, और इस पूरी बहस में असली नुकसान छात्रों का हो रहा है।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सरकार ने स्कूलों में हिजाब की अनुमति देने का फैसला क्यों लिया?
कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने 5 फरवरी 2022 के पुराने यूनिफॉर्म आदेश को वापस लेते हुए नए दिशानिर्देश जारी किए, जिनमें हिजाब, पगड़ी, पवित्र धागे सहित सीमित पारंपरिक और आस्था-आधारित प्रतीकों को यूनिफॉर्म के साथ पहनने की अनुमति दी गई है। सरकार ने अभी तक इस फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह विस्तार से नहीं बताई है।
बसवराज बोम्मई ने इस फैसले पर क्या कहा?
पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इसे 'तुष्टीकरण की राजनीति' और 'अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना फैसला' बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो छात्रों के बीच होने वाले किसी भी धार्मिक भेदभाव के लिए सरकार खुद जिम्मेदार होगी।
कर्नाटक हिजाब विवाद का कानूनी स्तर पर क्या हाल है?
हिजाब विवाद से जुड़ा मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 2022 में पुराने आदेश को सही ठहराया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में विभाजित फैसला आया था और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
2022 का पुराना स्कूल यूनिफॉर्म आदेश क्या था?
5 फरवरी 2022 को तत्कालीन बोम्मई सरकार ने 1980 के स्कूल यूनिफॉर्म नियमों के तहत एक स्पष्टीकरण आदेश जारी किया था, जिसमें कक्षाओं में धार्मिक पोशाक पर रोक लगाई गई थी। इसी आदेश को अब सिद्धारमैया सरकार ने वापस लिया है।
इस विवाद से कर्नाटक के छात्रों पर क्या असर पड़ सकता है?
बोम्मई के अनुसार, यह आदेश स्कूलों में धार्मिक आधार पर विभाजन और अशांति का माहौल बना सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है, तब इस तरह का एकतरफा राज्य-स्तरीय निर्णय कानूनी और सामाजिक जटिलताएँ बढ़ा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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