बोम्मई का सिद्धारमैया सरकार पर हमला: स्कूलों में हिजाब की अनुमति 'तुष्टीकरण की राजनीति'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने शुक्रवार, 15 मई को कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार के उस फैसले की कड़ी निंदा की, जिसमें राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब सहित अन्य धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति दी गई है। बोम्मई ने इसे 'अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना' और 'तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित' कदम करार दिया, जो छात्रों के बीच धार्मिक आधार पर विभाजन की जड़ें बो सकता है।
नया आदेश क्या है
कर्नाटक सरकार ने बुधवार को 5 फरवरी 2022 के अपने पुराने स्कूल यूनिफॉर्म आदेश को वापस ले लिया और नए दिशानिर्देश जारी किए। इन दिशानिर्देशों के तहत राज्यभर के शिक्षण संस्थानों में छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ-साथ हिजाब, पवित्र धागा, पगड़ी और अन्य धार्मिक प्रतीक पहनने की छूट दी गई है। इस फैसले ने कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छेड़ दी है।
बोम्मई की मुख्य आपत्तियाँ
एक प्रेस बयान में बोम्मई ने वैश्विक संदर्भ का हवाला देते हुए दावा किया कि सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों में महिलाएं और लड़कियाँ अपने रोज़मर्रा के जीवन में हिजाब से धीरे-धीरे दूर हो रही हैं। उनके अनुसार, ऐसे वैश्विक बदलाव के दौर में कर्नाटक में इस तरह का आदेश जारी करना लड़कियों को पीछे धकेलने जैसा है।
बोम्मई ने आरोप लगाया कि सरकार ने बिना किसी सार्वजनिक माँग के और शिक्षा व्यवस्था के शांतिपूर्ण संचालन के बावजूद यह विवाद खड़ा किया है। उन्होंने कहा, 'यह जिम्मेदार शासन नहीं है। यह एक बेहद गैर-जिम्मेदार फैसला है।'
कानूनी पृष्ठभूमि
बोम्मई ने याद दिलाया कि उनके मुख्यमंत्री काल में सरकार ने 1980 के स्कूल यूनिफॉर्म नियमों के तहत एक स्पष्टीकरण आदेश जारी किया था, जिसे कर्नाटक उच्च न्यायालय ने भी सही ठहराया था। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा, जहाँ विभाजित फैसला आया और मामला अभी भी वहाँ लंबित है। उन्होंने कहा, 'भले ही यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है, फिर भी सरकार एक बार फिर बच्चों के बीच विभाजन और चिंता का माहौल पैदा कर रही है।'
सरकार पर शिक्षा कुप्रबंधन का आरोप
बोम्मई ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर शिक्षा व्यवस्था के कुप्रबंधन का भी आरोप लगाया। उनके अनुसार, राज्य में शिक्षकों की कमी और शैक्षणिक स्तर में गिरावट जैसी गंभीर समस्याएँ हैं, जिन पर ध्यान देने की बजाय सरकार ने विवादास्पद आदेश जारी करना उचित समझा।
चेतावनी और आगे की राह
बोम्मई ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, 'यदि इस आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो भविष्य में छात्रों के बीच होने वाली किसी भी चिंता और भेदभाव के लिए सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।' उन्होंने माँग की कि सरकार यह स्पष्ट करे कि उसने अचानक यह फैसला क्यों लिया, और कहा कि 'तुष्टीकरण की राजनीति के अलावा इस कदम में और कुछ नज़र नहीं आता।' यह विवाद आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में और गहरा हो सकता है, खासकर जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।