25 अगस्त 2026
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इलाहाबाद हाई कोर्ट के हिजाब फैसले पर BJP नेताओं की प्रतिक्रिया: 'आस्था और सम्मान को कोई खतरा नहीं'

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इलाहाबाद हाई कोर्ट के हिजाब फैसले पर BJP नेताओं की प्रतिक्रिया: 'आस्था और सम्मान को कोई खतरा नहीं'

सारांश

इलाहाबाद हाई कोर्ट के हिजाब फैसले पर BJP नेताओं ने एकजुट होकर कहा कि शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड की अनिवार्यता संवैधानिक है और इससे किसी की आस्था को कोई खतरा नहीं। मुख्तार अब्बास नकवी से लेकर विहिप तक — सभी ने सांप्रदायिक तनाव से बचने की अपील की।

मुख्य बातें

इलाहाबाद हाई कोर्ट के हिजाब फैसले पर 25 अगस्त को BJP नेताओं की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं।
BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा — हिजाब के नाम पर सांप्रदायिक तनाव पैदा करना उचित नहीं, किसी की आस्था को खतरा नहीं।
BJP अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कोर्ट के फैसले को सही बताया और PM मोदी को सभी अधिकारों का रक्षक कहा।
विहिप के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा — अदालतें कई बार स्पष्ट कर चुकी हैं कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं।
वरिष्ठ वकील नलिन कोहली ने फैसले को संविधान के अनुच्छेद 26 और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के अनुरूप बताया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के हिजाब संबंधी फैसले पर 25 अगस्त को राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने अदालत के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि इससे किसी की धार्मिक आस्था या सम्मान को कोई ठेस नहीं पहुँचती। नेताओं ने एकमत होकर शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड की अनिवार्यता को संविधान-सम्मत बताया।

नकवी की अपील: सांप्रदायिक तनाव से बचें

BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मुझे लगता है कि किसी को भी हिजाब के नाम पर सांप्रदायिक विवाद या तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों के अपने ड्रेस कोड, अनुशासन और नियम होते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी यही बात कही है।' नकवी ने जोर दिया कि इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक संक्रमण पैदा करना उचित नहीं है और सभी को सावधान रहना चाहिए।

BJP अल्पसंख्यक मोर्चा: सरकार सभी की भावनाओं की रक्षक

भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा, 'कोर्ट ने जो कहा है, वह सही कहा है और पूरा देश कोर्ट का सम्मान करता है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी नागरिकों के अधिकारों के रक्षक हैं और सरकार संवैधानिक तरीके से सभी की भावनाओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है।

विहिप का रुख: न्यायपालिका बार-बार दे चुकी है स्पष्ट संकेत

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि अदालतें एक से अधिक बार यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि हिजाब और बुर्का न तो इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा हैं, न ही कुरान का। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूलों में समानता, एकता और भाईचारे की शिक्षा दी जाती है, ऐसे में धार्मिक पहचान के आधार पर बच्चों को अलग-थलग करना उचित नहीं। बंसल ने यह भी कहा कि इस विषय पर बार-बार अदालतों का दरवाज़ा खटखटाने से न्यायपालिका का कीमती समय बर्बाद होता है।

कानूनी नज़रिया: संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर आधारित

वरिष्ठ वकील और BJP नेता नलिन कोहली ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला धर्म की 'आवश्यक प्रथाओं' पर सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों पर आधारित प्रतीत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत अल्पसंख्यक समुदायों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार है, जहाँ वे अपनी परंपराओं के अनुसार पढ़ाई कर सकते हैं। हालाँकि, जो स्कूल धर्म-निरपेक्ष आधार पर संचालित होते हैं, वहाँ यूनिफॉर्म नीति स्वाभाविक रूप से लागू होगी।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार में मंत्री रत्नेश सदा ने कहा कि हर भारतीय नागरिक को कोर्ट का सम्मान करना चाहिए और स्कूलों में निर्धारित यूनिफॉर्म ही पहनी जानी चाहिए, हिजाब नहीं। BJP नेता अशोक वाजपेयी ने कहा कि हाई कोर्ट ने सभी ज़रूरी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही यह फैसला दिया है और यह भी स्पष्ट है कि इस्लाम में कहीं भी हिजाब या बुर्का पहनने का आदेश नहीं दिया गया है।

गौरतलब है कि हिजाब विवाद पहले भी कर्नाटक सहित कई राज्यों में अदालतों तक पहुँच चुका है और सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे पर विभाजित फैसला दे चुका है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस ताज़ा फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस के और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुस्लिम समुदाय के भीतर असली चिंताओं — खासकर लड़कियों की स्कूली शिक्षा पर पड़ने वाले असर — को यह बहस संबोधित नहीं करती। ध्यान देने योग्य है कि 'आवश्यक धार्मिक प्रथा' का सिद्धांत खुद कानूनी विशेषज्ञों के बीच विवादित है। जब तक सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ इस पर अंतिम फैसला नहीं देती, हाई कोर्ट के फैसले राजनीतिक हथियार बनते रहेंगे — समाधान नहीं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हिजाब पर क्या फैसला दिया?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षण संस्थानों के ड्रेस कोड और अनुशासन नियमों को संवैधानिक रूप से उचित ठहराया। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के 'आवश्यक धार्मिक प्रथा' संबंधी पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि हिजाब पहनना इस्लाम की अनिवार्य प्रथा नहीं है।
BJP नेताओं ने हिजाब फैसले पर क्या कहा?
BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी, कुंवर बासित अली, नलिन कोहली और अशोक वाजपेयी सहित कई नेताओं ने फैसले का समर्थन किया। सभी ने कहा कि स्कूलों में यूनिफॉर्म नीति संवैधानिक है और इससे किसी की धार्मिक आस्था या सम्मान को कोई खतरा नहीं है।
क्या हिजाब पर यह पहला अदालती फैसला है?
नहीं, यह पहला फैसला नहीं है। 2022 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी हिजाब प्रतिबंध को बरकरार रखा था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की पीठ ने खंडित फैसला दिया और मामला बड़ी संविधान पीठ को सौंपा गया। विहिप के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट और कई हाई कोर्ट इस मुद्दे पर कई बार फैसले सुना चुके हैं।
संविधान के अनुच्छेद 26 का हिजाब विवाद से क्या संबंध है?
वरिष्ठ वकील नलिन कोहली के अनुसार, संविधान का अनुच्छेद 26 अल्पसंख्यक समुदायों को अपने धार्मिक और शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार देता है। यदि कोई परिवार चाहता है कि उनकी बेटी धार्मिक परंपराओं के अनुसार पढ़े, तो वे ऐसे संस्थानों में प्रवेश ले सकते हैं — लेकिन धर्म-निरपेक्ष स्कूलों में यूनिफॉर्म नीति लागू रहेगी।
इस फैसले का आगे क्या असर हो सकता है?
इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद संबंधित पक्ष सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। चूँकि सुप्रीम कोर्ट में हिजाब का मामला पहले से एक बड़ी पीठ के समक्ष लंबित है, यह नया फैसला उस सुनवाई को और प्रासंगिक बना सकता है। राजनीतिक और सामाजिक बहस के तेज़ होने की भी संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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