इलाहाबाद हाई कोर्ट के हिजाब फैसले पर BJP नेताओं की प्रतिक्रिया: 'आस्था और सम्मान को कोई खतरा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
इलाहाबाद हाई कोर्ट के हिजाब संबंधी फैसले पर 25 अगस्त को राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने अदालत के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि इससे किसी की धार्मिक आस्था या सम्मान को कोई ठेस नहीं पहुँचती। नेताओं ने एकमत होकर शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड की अनिवार्यता को संविधान-सम्मत बताया।
नकवी की अपील: सांप्रदायिक तनाव से बचें
BJP नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मुझे लगता है कि किसी को भी हिजाब के नाम पर सांप्रदायिक विवाद या तनाव पैदा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। शिक्षण संस्थानों के अपने ड्रेस कोड, अनुशासन और नियम होते हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी यही बात कही है।' नकवी ने जोर दिया कि इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक संक्रमण पैदा करना उचित नहीं है और सभी को सावधान रहना चाहिए।
BJP अल्पसंख्यक मोर्चा: सरकार सभी की भावनाओं की रक्षक
भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने कहा, 'कोर्ट ने जो कहा है, वह सही कहा है और पूरा देश कोर्ट का सम्मान करता है।' उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी नागरिकों के अधिकारों के रक्षक हैं और सरकार संवैधानिक तरीके से सभी की भावनाओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है।
विहिप का रुख: न्यायपालिका बार-बार दे चुकी है स्पष्ट संकेत
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि अदालतें एक से अधिक बार यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि हिजाब और बुर्का न तो इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा हैं, न ही कुरान का। उन्होंने तर्क दिया कि स्कूलों में समानता, एकता और भाईचारे की शिक्षा दी जाती है, ऐसे में धार्मिक पहचान के आधार पर बच्चों को अलग-थलग करना उचित नहीं। बंसल ने यह भी कहा कि इस विषय पर बार-बार अदालतों का दरवाज़ा खटखटाने से न्यायपालिका का कीमती समय बर्बाद होता है।
कानूनी नज़रिया: संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर आधारित
वरिष्ठ वकील और BJP नेता नलिन कोहली ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला धर्म की 'आवश्यक प्रथाओं' पर सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों पर आधारित प्रतीत होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत अल्पसंख्यक समुदायों को अपने शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार है, जहाँ वे अपनी परंपराओं के अनुसार पढ़ाई कर सकते हैं। हालाँकि, जो स्कूल धर्म-निरपेक्ष आधार पर संचालित होते हैं, वहाँ यूनिफॉर्म नीति स्वाभाविक रूप से लागू होगी।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
बिहार सरकार में मंत्री रत्नेश सदा ने कहा कि हर भारतीय नागरिक को कोर्ट का सम्मान करना चाहिए और स्कूलों में निर्धारित यूनिफॉर्म ही पहनी जानी चाहिए, हिजाब नहीं। BJP नेता अशोक वाजपेयी ने कहा कि हाई कोर्ट ने सभी ज़रूरी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही यह फैसला दिया है और यह भी स्पष्ट है कि इस्लाम में कहीं भी हिजाब या बुर्का पहनने का आदेश नहीं दिया गया है।
गौरतलब है कि हिजाब विवाद पहले भी कर्नाटक सहित कई राज्यों में अदालतों तक पहुँच चुका है और सर्वोच्च न्यायालय इस मुद्दे पर विभाजित फैसला दे चुका है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस ताज़ा फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस के और तेज़ होने की संभावना है।