केजरीवाल का भाजपा को खुला चैलेंज: गुजरात-पंजाब के 1000-1000 स्कूलों का मीडिया के सामने संयुक्त निरीक्षण हो
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 25 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सीधी चुनौती देते हुए माँग की कि गुजरात और पंजाब के 1,000-1,000 सरकारी स्कूलों का मीडिया और जनता की उपस्थिति में संयुक्त निरीक्षण कराया जाए। केजरीवाल ने दावा किया कि पंजाब में AAP सरकार के साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में सरकारी स्कूलों की स्थिति गुजरात की 30 वर्ष पुरानी भाजपा सरकार से बेहतर हो चुकी है।
चुनौती का स्वरूप
केजरीवाल ने कहा कि भाजपा गुजरात के 1,000 स्कूलों की सूची तैयार करे और AAP पंजाब के 1,000 स्कूलों की सूची उपलब्ध कराएगी। इसके बाद पूरे देश और मीडिया के सामने दोनों राज्यों के स्कूलों का एक साथ निरीक्षण हो, ताकि जनता स्वयं तय कर सके कि किस राज्य की शिक्षा व्यवस्था बेहतर है। उन्होंने कहा कि यह निरीक्षण 30 वर्षों बनाम साढ़े चार वर्षों के शासन की तुलना का सबसे पारदर्शी तरीका होगा।
पंजाब के स्कूलों पर दावे
केजरीवाल के अनुसार, पंजाब में कुल 19,700 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें से 19,200 स्कूलों को उनकी सरकार ने बेहतर स्थिति में पहुँचा दिया है। शेष करीब 500 स्कूलों में सुधार कार्य जारी है और अगले डेढ़ से दो वर्षों में उन्हें भी उन्नत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि 2022 में AAP सरकार के सत्ता में आने के समय पंजाब शिक्षा के मामले में देश में काफी पीछे था, लेकिन अब राज्य शीर्ष स्थान पर पहुँच गया है।
पुराने वीडियो पर पलटवार
भाजपा द्वारा पंजाब के स्कूलों की खराब स्थिति दर्शाने वाले वीडियो सामने लाए जाने पर केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ वीडियो वर्ष 2018 के हैं, जब पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी। उन्होंने कहा कि पुराने वीडियो और कथित फर्जी तस्वीरों के ज़रिए वर्तमान सरकार के कामकाज पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
सुधार में सामूहिक भागीदारी का दावा
केजरीवाल ने यह भी कहा कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में आया बदलाव केवल सरकारी प्रयास का नतीजा नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, अभिभावकों और विद्यार्थियों का सामूहिक योगदान रहा है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि अकाली दल समर्थक रतन ढिल्लों ने हाल ही में एक स्कूल की स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था, जिसके बाद शिक्षा मंत्री ने उन्हें बुलाकर संबंधित स्कूल के लिए ग्रांट जारी की। केजरीवाल के अनुसार, बाद में ढिल्लों ने स्वयं सरकार के प्रयासों की सराहना की।
आगे क्या
केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्कूल में वास्तविक कमी सामने आती है तो सरकार उसे दूर करने के लिए तैयार है। भाजपा की ओर से इस चुनौती पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षा व्यवस्था एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।