10 अगस्त 2026
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महाराष्ट्र में यूसीसी पर सियासी संग्राम: मंत्री नितेश राणे बोले — 'संविधान मानते हो तो यूसीसी मानना होगा'

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महाराष्ट्र में यूसीसी पर सियासी संग्राम: मंत्री नितेश राणे बोले — 'संविधान मानते हो तो यूसीसी मानना होगा'

सारांश

महाराष्ट्र में यूसीसी पर सियासी तापमान बढ़ा — मंत्री नितेश राणे ने संविधान की दुहाई देकर खुला समर्थन किया, शिवसेना के संजय निरुपम ने पर्सनल लॉ बोर्ड को चेताया, और मंत्री रावल ने 'अध्ययन' का रास्ता चुना। एक ही गठबंधन में तीन अलग-अलग सुर।

मुख्य बातें

मंत्री नितेश राणे ने 23 जून को यूसीसी को संविधान का अनिवार्य हिस्सा बताते हुए खुला समर्थन किया।
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने यूसीसी के पक्ष में बोलते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को कड़ी चेतावनी दी।
मंत्री जयकुमार रावल ने कहा — महाराष्ट्र में अभी यूसीसी पर कोई चर्चा नहीं, लेकिन अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन होगा।
महायुति गठबंधन के भीतर यूसीसी पर एकमत नहीं — एक ही सरकार में आक्रामक समर्थन और सतर्क रुख दोनों दिखे।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विधायी प्रस्ताव नहीं।

समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में 23 जून को नई गर्मी आ गई, जब राज्य सरकार के मंत्रियों और शिवसेना नेताओं ने एक के बाद एक अपने रुख स्पष्ट किए। मंत्री नितेश राणे ने यूसीसी को संविधान का अनिवार्य हिस्सा बताते हुए इसके पक्ष में खुलकर बयान दिया, जबकि मंत्री जयकुमार रावल ने सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि फिलहाल राज्य में इस पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं है, लेकिन अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन ज़रूर होगा।

मंत्री राणे का स्पष्ट रुख

मंत्री नितेश राणे ने कहा कि हमारे संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रावधान है। उनके अनुसार, 'जो कोई भी इस देश के संविधान में विश्वास करता है और डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को मानता है, उसे यूसीसी को स्वीकार करना होगा।' राणे ने यह भी कहा कि जो लोग भारत में शरिया कानून चाहते हैं, वे उन स्थानों पर जा सकते हैं जहाँ इसे माना जाता है। उनका तर्क था कि भारत में संविधान का पालन होता है और संविधान में यूसीसी का उल्लेख है, इसलिए इसे लागू किया जाएगा।

शिवसेना प्रवक्ता का समर्थन और चेतावनी

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने भी यूसीसी का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि इसे किसी के धर्म को नष्ट करने के लिए नहीं लाया जा रहा। उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि बोर्ड लोगों को भड़काने का प्रयास करता है तो वह भी शांति से नहीं रह पाएगा। निरुपम ने यह भी जोड़ा कि पर्सनल लॉ बोर्ड को अपने धार्मिक कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन यदि धर्म की आड़ में समाज को भड़काकर दंगा-फसाद कराने की कोशिश की गई तो सरकार और पुलिस ऐसे लोगों को नहीं बख्शेगी।

मंत्री रावल का सतर्क संदेश

मंत्री जयकुमार रावल ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि वर्तमान में महाराष्ट्र में यूसीसी को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि देश के अन्य राज्यों ने देशहित में यूसीसी लागू किया है, तो महाराष्ट्र सरकार उसका अध्ययन और परीक्षण करेगी। रावल के अनुसार, 'यदि यह महाराष्ट्र और देश के हित में पाया जाता है, तो राज्य सरकार निश्चित रूप से इसे लागू करने पर विचार करेगी।'

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह बयानबाजी ऐसे समय में आई है जब उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है और केंद्र सरकार पर भी इस दिशा में कदम उठाने का दबाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर भी इस मुद्दे पर एकमत नहीं दिखती — एक ओर राणे जैसे नेता आक्रामक समर्थन में हैं, तो दूसरी ओर रावल जैसे मंत्री अभी 'अध्ययन' की बात कर रहे हैं।

आगे क्या होगा

आलोचकों का कहना है कि यूसीसी पर इस तरह के बयान चुनावी मौसम में राजनीतिक ध्रुवीकरण को हवा दे सकते हैं। फिलहाल महाराष्ट्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रस्ताव या विधायी कदम सामने नहीं आया है। सियासी हलकों में यह देखा जा रहा है कि क्या राज्य सरकार अन्य राज्यों के 'अध्ययन' के बाद कोई ठोस नीतिगत घोषणा करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि कोई ठोस सहमति अभी बनी नहीं है। राणे का 'शरिया वाले जा सकते हैं' वाला बयान संविधानिक बहस को साम्प्रदायिक रंग देने का जोखिम उठाता है, जो यूसीसी की मूल भावना से भटकाव है। उत्तराखंड के अनुभव से सबक लेना ज़रूरी है, जहाँ यूसीसी लागू तो हुआ पर क्रियान्वयन की चुनौतियाँ अभी भी हल नहीं हुई हैं। बिना विधायी रोडमैप के इस तरह के बयान केवल चुनावी ध्रुवीकरण का औज़ार बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में यूसीसी को लेकर क्या हो रहा है?
23 जून को महाराष्ट्र के मंत्रियों और शिवसेना नेताओं ने समान नागरिक संहिता पर अलग-अलग बयान दिए। मंत्री नितेश राणे ने खुला समर्थन किया, जबकि मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि राज्य में अभी कोई औपचारिक चर्चा नहीं है।
मंत्री नितेश राणे ने यूसीसी पर क्या कहा?
राणे ने कहा कि संविधान में यूसीसी का प्रावधान है और जो डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान को मानता है, उसे यूसीसी स्वीकार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि शरिया कानून चाहने वाले उन देशों में जा सकते हैं जहाँ वह लागू है।
शिवसेना के संजय निरुपम ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर क्या कहा?
निरुपम ने कहा कि यदि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड लोगों को भड़काने का प्रयास करता है तो वह शांति से नहीं रह पाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म की आड़ में दंगा-फसाद कराने की कोशिश पर सरकार और पुलिस कार्रवाई करेगी।
क्या महाराष्ट्र में यूसीसी लागू होने वाला है?
फिलहाल नहीं। मंत्री जयकुमार रावल ने स्पष्ट किया कि राज्य में अभी यूसीसी पर कोई चर्चा नहीं है। सरकार केवल अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन करेगी और यदि यह महाराष्ट्र के हित में पाया गया तो भविष्य में विचार किया जाएगा।
यूसीसी पर महाराष्ट्र सरकार के भीतर मतभेद क्यों दिख रहे हैं?
महायुति गठबंधन में शामिल दलों के नेताओं के अलग-अलग राजनीतिक आधार और मतदाता वर्ग हैं, जिस कारण एक ही सरकार में आक्रामक समर्थन और सतर्क रुख दोनों दिख रहे हैं। यह आंतरिक असहमति बताती है कि अभी कोई साझा नीतिगत सहमति नहीं बनी है।
राष्ट्र प्रेस
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