यूसीसी पर नितेश राणे का बड़ा बयान: अनुच्छेद 44 में है प्रावधान, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर भी निशाना
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे ने बुधवार, 24 जून 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) का खुलकर समर्थन किया और कहा कि इसका प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में पहले से मौजूद है। उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) और अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की माँग पर भी कड़ा रुख अपनाया।
संविधान और यूसीसी पर राणे का रुख
राणे ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर द्वारा रचित संविधान में ही समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए और भारत का संविधान सर्वोपरि है — किसी भी अन्य व्यवस्था को संविधान से ऊपर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने यूसीसी का विरोध करने वालों पर आरोप लगाया कि वे देश में अलग-अलग कानून व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
मौलाना मदनी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया
मौलाना सैयद अरशद मदनी के एक हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राणे ने कहा कि जो लोग देश में जिहाद की बात करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में तनाव या हिंसा को बढ़ावा देने वाली किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर सवाल
राणे ने एआईएमपीएलबी के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश में एक संविधान लागू है, तो अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की आवश्यकता क्यों है। उन्होंने कहा कि देश में वही संस्थाएँ होनी चाहिए जो संविधान के अनुरूप काम करें और अलग-अलग कानून व्यवस्था की माँग देश की एकता के लिए उचित नहीं है।
पार्तूर स्कूल विवाद और कानून व्यवस्था
पार्तूर में एक स्कूल कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद पर भी राणे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश की शांति और व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों पर समाज और कानून व्यवस्था को गंभीरता से विचार करना चाहिए। कानून व्यवस्था पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए राणे ने पलटवार किया और कहा कि सवाल उठाने से पहले नैतिक आधार होना जरूरी है।
आगे क्या
गौरतलब है कि उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है और केंद्र सरकार भी इस दिशा में विचार कर रही है। राणे के इस बयान को महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की यूसीसी के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।