महाराष्ट्र यूसीसी: कांग्रेस और शिवसेना-यूबीटी ने ड्राफ्ट सार्वजनिक करने और विपक्ष को चर्चा में शामिल करने की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शुक्रवार, 10 जुलाई को महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति सरकार से यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) पर विपक्ष को चर्चा में शामिल करने और ड्राफ्ट को सार्वजनिक करने की माँग की। यह माँग तब सामने आई जब महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में यूसीसी की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया।
विपक्ष का रुख: समर्थन, लेकिन पारदर्शिता की शर्त
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने स्पष्ट किया कि उन्हें यूसीसी से कोई मूलभूत आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, 'एक से अधिक पत्नियाँ रखना पूरी तरह गलत है — यह महिलाओं के साथ अन्याय है। किसी भी धर्म ने यह नहीं कहा कि महिलाओं के साथ अन्याय करना सही है। महिलाओं को पूरा सम्मान दें और संपत्ति में भी बराबर का अधिकार दें।' हालाँकि, दलवई ने सरकार से अपील की कि यूसीसी का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाए, ताकि आम नागरिक और विपक्षी दल अपनी राय दे सकें।
एक दिन पहले, शिवसेना-यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने भी इसी सुर में बात की थी। उन्होंने कहा था, 'कोई भी यूसीसी का विरोध नहीं कर रहा — इसे लागू होना चाहिए। तलाक हो या दहेज, सभी धर्मों के लिए एक समान कानून होना चाहिए।' साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ड्राफ्ट पर चर्चा होगी, क्या विपक्ष को भरोसे में लिया जाएगा — या फिर 'तानाशाही चलेगी'।
कांग्रेस सांसद का तीखा हमला
कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने भाजपा नेतृत्व वाली सरकारों पर देश की 'विविधता में एकता' को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'जहाँ भी डबल इंजन सरकार है, वे या तो सड़कों और इमारतों के नाम बदलने में लगे हैं, या यूसीसी लागू करने पर जोर दे रहे हैं। वे विभिन्न धर्मों की मान्यताओं का सम्मान नहीं करना चाहते। संविधान गारंटी देता है कि धार्मिक प्रथाएँ कानूनी ढाँचे के भीतर जारी रह सकती हैं — लेकिन वे इसे समाप्त करना चाहते हैं।'
भाजपा का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले का पूरा समर्थन किया। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि वही कांग्रेस पार्टी जिसने संविधान सभा में यूसीसी की वकालत की थी, आज महिलाओं के अधिकारों के बजाय अपने वोट बैंक को प्राथमिकता देते हुए इसके कार्यान्वयन का विरोध कर रही है।
जदयू की सधी हुई प्रतिक्रिया
जनता दल (यूनाइटेड) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि यूसीसी के मामले में सभी पक्षों को भरोसे में लिया जाना चाहिए, क्योंकि सामाजिक सद्भाव ही विकास की बुनियाद है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'समाज के किसी भी वर्ग को ठेस नहीं पहुँचनी चाहिए — सामाजिक सद्भाव बना रहना चाहिए। हालाँकि राज्य सरकार को अपने फैसले लेने का अधिकार है।'
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है — उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र की उच्च-स्तरीय समिति का ड्राफ्ट कब तक तैयार होगा, इसकी कोई समयसीमा अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। विपक्ष की माँग है कि ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई जाए।