महाराष्ट्र में यूसीसी लागू करने की तैयारी: मुख्यमंत्री फडणवीस ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति को दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए 23 जून 2026 को हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने को मंजूरी दे दी है। यह समिति यूसीसी का मसौदा तैयार कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद राज्य में संहिता को लागू किया जाएगा।
विधानसभा में हुई घोषणा
राज्य के गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने के पक्ष में है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाने को मंजूरी दे दी है। समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद यूसीसी लागू किया जाएगा।'
कदम यह बयान भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधायक देवयानी फरांदे द्वारा नासिक जिले में ट्रिपल तलाक के मामलों को लेकर उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दे रहे थे।
ट्रिपल तलाक और बहुविवाह पर बहस
विधायक देवयानी फरांदे ने दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा तत्काल तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें तीन मुस्लिम महिलाओं की शिकायतें मिली हैं, जिनमें पतियों द्वारा धमकी, हिंसा और ट्रिपल तलाक देने के आरोप लगाए गए हैं। फरांदे ने यह भी कहा कि पाकिस्तान में भी अब बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया है और उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी यूसीसी लागू होगा।
इस पर गृह राज्यमंत्री कदम ने स्पष्ट किया कि जब यूसीसी लागू होगा, तो उसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध का प्रावधान भी शामिल होगा। उन्होंने कहा, 'सरकार किसी धर्म या व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। यूसीसी लागू होने पर यह सभी लोगों पर समान रूप से लागू होगा, चाहे उनका धर्म कोई भी हो।'
सत्तारूढ़ दल में भी उठे सवाल
चर्चा के दौरान सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की विधायक सना मलिक ने फरांदे के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या केवल मुस्लिम महिलाएँ ही हिंसा का शिकार होती हैं और क्या बहुविवाह सिर्फ इस्लाम में ही मौजूद है। मलिक ने यह भी स्पष्ट किया, 'केवल तत्काल तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया गया है, पूरे ट्रिपल तलाक पर नहीं।' उनके इस बयान के बाद विपक्षी सदस्य उनके समर्थन में आ गए, जबकि BJP विधायकों ने कहा कि राज्य संविधान के अनुसार चलेगा, किसी धार्मिक ग्रंथ के अनुसार नहीं। सदन में कुछ मिनटों तक हंगामा भी हुआ।
ट्रिपल तलाक के आँकड़े
गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने सदन को बताया कि वर्ष 2024 में ट्रिपल तलाक के 42 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 152 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं 2025 में 39 मामले दर्ज हुए और 95 गिरफ्तारियाँ हुईं। उन्होंने कहा, 'यह दर्शाता है कि यह प्रथा अब भी मौजूद है और इससे कानून के ज़रिए सख्ती से निपटने की जरूरत है।' मंत्री ने आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था जिसने यूसीसी लागू की, और अब महाराष्ट्र इस राह पर आगे बढ़ने की तैयारी में है। यह ऐसे समय में आया है जब यूसीसी राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही राज्य सरकार यूसीसी के क्रियान्वयन की समयसीमा तय करेगी।