महाराष्ट्र में UCC लागू होगा जल्द: रामदास आठवले, रंजना देसाई की अध्यक्षता में कमेटी गठित
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 9 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) शीघ्र लागू की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस दिशा में सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जा चुकी है, जो यूसीसी का अध्ययन कर उसका मसौदा तैयार करेगी।
कमेटी का गठन और जिम्मेदारी
आठवले ने बताया कि यूसीसी के मसौदे की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई को सौंपी है। उनके नेतृत्व में गठित समिति कानून की रूपरेखा तैयार करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो। आठवले ने कहा, "यह कानून मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं है — इस बिल के बनने के समय इस बात का ध्यान देना होगा कि किसी के साथ अन्याय न हो।"
जनसंख्या नियंत्रण पर जोर
आठवले ने जनसंख्या नियंत्रण के विषय पर भी बात करते हुए कहा कि देश की जनसंख्या कम करने की आवश्यकता है। उन्होंने 'हम दो हमारे दो' के नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे जनसंख्या पर नियंत्रण हुआ है और परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों की बेहतर परवरिश और शिक्षा भी संभव हुई है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
अन्य राज्यों में UCC की स्थिति
आठवले ने यह भी बताया कि कई राज्यों में यूसीसी पहले ही लागू हो चुकी है और महाराष्ट्र भी इस पहल को जल्द अमल में लाएगा। गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था जिसने यूसीसी को लागू किया था, और तब से यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में केंद्रीय बना हुआ है।
शिंदे-पवार मुलाकात पर आठवले का बयान
इसी दौरान आठवले से डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार की हालिया मुलाकात पर भी सवाल पूछे गए। आठवले ने इसे व्यक्तिगत मुलाकात बताया और कहा कि शरद पवार महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय और वरिष्ठ नेता हैं — हर कोई उनसे मिलता है और उनकी सलाह लेता है। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि इस दौरान किसी राजनीतिक मुद्दे पर चर्चा हुई होगी।"
आगे क्या होगा
रंजना देसाई समिति के मसौदे के बाद महाराष्ट्र सरकार यूसीसी विधेयक को विधानसभा में पेश कर सकती है। यह देखना अहम होगा कि क्या सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के सभी घटक दल इस पर एकमत रहते हैं, और विपक्षी दल किस रुख के साथ इसका सामना करते हैं।