14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मध्य प्रदेश UCC रिपोर्ट CM यादव को सौंपी: 404 धाराएं, 7 अनुसूचियां, आदिवासी बाहर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मध्य प्रदेश UCC रिपोर्ट CM यादव को सौंपी: 404 धाराएं, 7 अनुसूचियां, आदिवासी बाहर

सारांश

मध्यप्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम — उच्च स्तरीय समिति ने CM यादव को 404 धाराओं और 7 अनुसूचियों वाला मसौदा सौंपा, 9.58 लाख जन-परामर्शों के आधार पर। अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखने की अनुशंसा और मानसून सत्र में विधानसभा में पेशी की संभावना इसे राज्य की सबसे बड़ी विधायी पहलों में से एक बनाती है।

मुख्य बातें

मोहन यादव को 13 जुलाई 2026 को UCC समिति का तीन-खंडीय प्रतिवेदन सौंपा गया।
प्रस्तावित विधेयक में 4 भाग , 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां हैं।
समिति को 9.58 लाख से अधिक जन-परामर्श प्राप्त हुए — जिला, राज्य और ऑनलाइन स्तर पर।
समिति ने अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की।
प्रतिवेदन विधि विभाग को सौंपा गया; मानसून सत्र में विधानसभा में विधेयक पेश होने की संभावना।
समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (सेवानिवृत्त, सर्वोच्च न्यायालय) ने की।

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने 13 जुलाई 2026 को अपना विस्तृत प्रतिवेदन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दिया। तीन खंडों में संकलित यह रिपोर्ट विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों पर एक व्यापक विधायी ढाँचा प्रस्तुत करती है। समिति ने अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने की स्पष्ट अनुशंसा की है।

प्रतिवेदन की संरचना और मुख्य घटनाक्रम

समिति का प्रतिवेदन तीन खंडों में विभाजित है। पहले खंड में 10 अध्यायों में अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विधियों और प्रथाओं का तुलनात्मक विश्लेषण कर समिति की अनुशंसाएं प्रस्तुत की गई हैं। दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक का मसौदा है, जिसमें 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं — यह मसौदा मध्यप्रदेश की प्रचलित विधियों और नियमों के अनुरूप तैयार किया गया है।

तीसरे खंड में जन-परामर्श प्रतिवेदन है, जिसमें जिला स्तर, राज्य स्तर और वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त 9.58 लाख से अधिक परामर्शों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण शामिल है। यह आँकड़ा इस प्रक्रिया की व्यापक जन-भागीदारी को रेखांकित करता है।

समिति की प्रमुख अनुशंसाएं

समिति ने लैंगिक समानता सुनिश्चित करना, विविध अनुष्ठानिक प्रथाओं को अप्रभावित रखना और प्रचलित रीति-रिवाजों का सम्मान करना — इन तीन मूल सिद्धांतों को आधार बनाया है। संवैधानिक उपबंधों के अनुरूप कार्य करते हुए समिति ने अनुसूचित जनजातियों को UCC से बाहर रखने की अनुशंसा की है, जो इस प्रतिवेदन का सबसे चर्चित बिंदु बनने की संभावना है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजातियों की आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 21% है और उनकी परंपरागत प्रथाएं सामान्य नागरिक कानूनों से भिन्न हैं।

समिति की संरचना और सरकार की प्रतिक्रिया

इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने की। समिति में वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर भी शामिल थे। मुख्यमंत्री यादव ने प्रतिवेदन प्राप्त करने के बाद तीनों सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने UCC लागू किया है, और अन्य भाजपा-शासित राज्य भी इस दिशा में सक्रिय हैं।

आगे की प्रक्रिया और विधानसभा में पेशी की संभावना

प्रतिवेदन को राज्य शासन के विधि विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। विधेयक के परिमार्जन और वरिष्ठ सचिव समिति की समीक्षा के बाद, इसे मंत्रि-परिषद की स्वीकृति के लिए रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, विधेयक को मानसून सत्र में ही मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो मध्यप्रदेश उत्तराखंड के बाद UCC विधेयक पारित करने वाला दूसरा राज्य बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जटिलता अनुसूचित जनजातियों को छूट देने की अनुशंसा में छिपी है — यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील निर्णय है जो राज्य की 21% आदिवासी आबादी को प्रभावित करता है। 9.58 लाख जन-परामर्श एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आभास देते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इन परामर्शों का अंतिम मसौदे पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ा। मानसून सत्र में विधेयक पेश करने की जल्दबाजी इस प्रश्न को और तीखा बनाती है कि क्या विधि विभाग की समीक्षा और मंत्रि-परिषद की स्वीकृति महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश UCC समिति ने क्या रिपोर्ट सौंपी है?
उच्च स्तरीय समिति ने 13 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को तीन-खंडीय प्रतिवेदन सौंपा, जिसमें अनुशंसाएं, 404 धाराओं व 7 अनुसूचियों वाला विधेयक मसौदा और 9.58 लाख जन-परामर्शों का विश्लेषण शामिल है। यह विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत विषयों को कवर करता है।
क्या मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजातियों पर UCC लागू होगा?
नहीं — समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की स्पष्ट अनुशंसा की है। यह अनुशंसा उनकी परंपरागत प्रथाओं और सांस्कृतिक विविधता के सम्मान के आधार पर की गई है।
मध्यप्रदेश UCC विधेयक विधानसभा में कब पेश होगा?
रिपोर्ट विधि विभाग को सौंप दी गई है और परिमार्जन व मंत्रि-परिषद की स्वीकृति के बाद विधेयक मानसून सत्र में ही विधानसभा में रखे जाने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, अंतिम तिथि की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
UCC समिति की अध्यक्षता किसने की और इसमें कौन शामिल थे?
समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने की। वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर भी समिति में शामिल थे।
मध्यप्रदेश UCC में कितने जन-परामर्श शामिल किए गए?
समिति को जिला स्तर, राज्य स्तर और वेबसाइट के माध्यम से 9.58 लाख से अधिक परामर्श प्राप्त हुए। इनका प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण रिपोर्ट के तीसरे खंड में शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले