मध्य प्रदेश UCC रिपोर्ट CM यादव को सौंपी: 404 धाराएं, 7 अनुसूचियां, आदिवासी बाहर
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने 13 जुलाई 2026 को अपना विस्तृत प्रतिवेदन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दिया। तीन खंडों में संकलित यह रिपोर्ट विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों पर एक व्यापक विधायी ढाँचा प्रस्तुत करती है। समिति ने अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने की स्पष्ट अनुशंसा की है।
प्रतिवेदन की संरचना और मुख्य घटनाक्रम
समिति का प्रतिवेदन तीन खंडों में विभाजित है। पहले खंड में 10 अध्यायों में अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विधियों और प्रथाओं का तुलनात्मक विश्लेषण कर समिति की अनुशंसाएं प्रस्तुत की गई हैं। दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक का मसौदा है, जिसमें 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं — यह मसौदा मध्यप्रदेश की प्रचलित विधियों और नियमों के अनुरूप तैयार किया गया है।
तीसरे खंड में जन-परामर्श प्रतिवेदन है, जिसमें जिला स्तर, राज्य स्तर और वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त 9.58 लाख से अधिक परामर्शों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण शामिल है। यह आँकड़ा इस प्रक्रिया की व्यापक जन-भागीदारी को रेखांकित करता है।
समिति की प्रमुख अनुशंसाएं
समिति ने लैंगिक समानता सुनिश्चित करना, विविध अनुष्ठानिक प्रथाओं को अप्रभावित रखना और प्रचलित रीति-रिवाजों का सम्मान करना — इन तीन मूल सिद्धांतों को आधार बनाया है। संवैधानिक उपबंधों के अनुरूप कार्य करते हुए समिति ने अनुसूचित जनजातियों को UCC से बाहर रखने की अनुशंसा की है, जो इस प्रतिवेदन का सबसे चर्चित बिंदु बनने की संभावना है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजातियों की आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 21% है और उनकी परंपरागत प्रथाएं सामान्य नागरिक कानूनों से भिन्न हैं।
समिति की संरचना और सरकार की प्रतिक्रिया
इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने की। समिति में वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह और सदस्य अनूप नायर भी शामिल थे। मुख्यमंत्री यादव ने प्रतिवेदन प्राप्त करने के बाद तीनों सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने UCC लागू किया है, और अन्य भाजपा-शासित राज्य भी इस दिशा में सक्रिय हैं।
आगे की प्रक्रिया और विधानसभा में पेशी की संभावना
प्रतिवेदन को राज्य शासन के विधि विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। विधेयक के परिमार्जन और वरिष्ठ सचिव समिति की समीक्षा के बाद, इसे मंत्रि-परिषद की स्वीकृति के लिए रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार, विधेयक को मानसून सत्र में ही मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो मध्यप्रदेश उत्तराखंड के बाद UCC विधेयक पारित करने वाला दूसरा राज्य बन सकता है।