मध्य प्रदेश UCC: जस्टिस देसाई कमेटी ने भोपाल में सभी पक्षों से की व्यापक बातचीत, 20 जुलाई को विधानसभा में पेश हो सकता है बिल
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमेटी ने 22 जून 2026 को भोपाल के नरोन्हा प्रशासन अकादमी में संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। यह बैठक सुबह से शाम तक चली और इसे UCC बिल का अंतिम मसौदा तैयार करने में निर्णायक माना जा रहा है। यदि कैबिनेट की मंजूरी मिलती है, तो यह बिल 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
इस बहु-स्तरीय बैठक में विभिन्न आयोगों, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों, धार्मिक नेताओं और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कमेटी ने महिला आयोग, बाल आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों को सुबह के सत्र में आमंत्रित किया। दोपहर के सत्र में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी, जबकि शाम के सत्र में धार्मिक नेताओं के साथ चर्चा की गई।
सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को भी बैठक में बुलाया गया था। गृह विभाग ने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी, जबकि अन्य विभागों ने अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित जानकारी कमेटी के समक्ष रखी।
हजारों सुझाव पहले ही मिल चुके हैं
सूत्रों के अनुसार, कमेटी को ऑनलाइन पोर्टल, सार्वजनिक सुनवाई और अन्य माध्यमों से पहले ही हजारों सुझाव प्राप्त हो चुके हैं। इन सभी सुझावों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है ताकि अंतिम मसौदे में समाज के सभी वर्गों की चिंताओं और हितों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। यह ऐसे समय में आया है जब देश में UCC को लेकर व्यापक सार्वजनिक बहस जारी है और उत्तराखंड पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुका है।
आगे की प्रक्रिया
सोमवार की चर्चा के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट अंतिम रूप देकर राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति इन सुझावों की समीक्षा करेगी। तत्पश्चात यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता वाली कैबिनेट के समक्ष अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।
गौरतलब है कि यदि कैबिनेट से स्वीकृति मिल जाती है, तो UCC बिल को 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। यह मध्य प्रदेश को UCC लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बना सकता है।
व्यापक संदर्भ
मध्य प्रदेश में UCC की यह पहल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उस दीर्घकालिक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है, जिसे पार्टी दशकों से अपने घोषणापत्र में शामिल करती आई है। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक विविधता को देखते हुए एक समान नागरिक संहिता का क्रियान्वयन जटिल होगा। हालाँकि, समर्थकों का तर्क है कि यह लैंगिक न्याय और संवैधानिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।