9 अगस्त 2026
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मध्य प्रदेश UCC: जस्टिस देसाई कमेटी ने भोपाल में सभी पक्षों से की व्यापक बातचीत, 20 जुलाई को विधानसभा में पेश हो सकता है बिल

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मध्य प्रदेश UCC: जस्टिस देसाई कमेटी ने भोपाल में सभी पक्षों से की व्यापक बातचीत, 20 जुलाई को विधानसभा में पेश हो सकता है बिल

सारांश

मध्य प्रदेश में UCC की राह तेज हो गई है — जस्टिस देसाई कमेटी ने भोपाल में आयोगों, राजनीतिक दलों और धार्मिक नेताओं से एक ही दिन में व्यापक बातचीत की। कैबिनेट की मंजूरी मिली तो 20 जुलाई के मॉनसून सत्र में बिल पेश हो सकता है, जो MP को उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाला दूसरा राज्य बना देगा।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमेटी ने 22 जून 2026 को भोपाल में UCC पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
बैठक में महिला आयोग, बाल आयोग, SC आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के प्रतिनिधि, राजनीतिक दल और धार्मिक नेता शामिल हुए।
कमेटी को ऑनलाइन पोर्टल और सार्वजनिक सुनवाई के जरिये पहले ही हजारों सुझाव मिल चुके हैं।
कमेटी की रिपोर्ट के बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन की समिति समीक्षा करेगी, फिर मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट में प्रस्ताव जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर UCC बिल 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमेटी ने 22 जून 2026 को भोपाल के नरोन्हा प्रशासन अकादमी में संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। यह बैठक सुबह से शाम तक चली और इसे UCC बिल का अंतिम मसौदा तैयार करने में निर्णायक माना जा रहा है। यदि कैबिनेट की मंजूरी मिलती है, तो यह बिल 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस बहु-स्तरीय बैठक में विभिन्न आयोगों, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों, धार्मिक नेताओं और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कमेटी ने महिला आयोग, बाल आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों को सुबह के सत्र में आमंत्रित किया। दोपहर के सत्र में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी, जबकि शाम के सत्र में धार्मिक नेताओं के साथ चर्चा की गई।

सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को भी बैठक में बुलाया गया था। गृह विभाग ने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी, जबकि अन्य विभागों ने अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित जानकारी कमेटी के समक्ष रखी।

हजारों सुझाव पहले ही मिल चुके हैं

सूत्रों के अनुसार, कमेटी को ऑनलाइन पोर्टल, सार्वजनिक सुनवाई और अन्य माध्यमों से पहले ही हजारों सुझाव प्राप्त हो चुके हैं। इन सभी सुझावों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है ताकि अंतिम मसौदे में समाज के सभी वर्गों की चिंताओं और हितों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। यह ऐसे समय में आया है जब देश में UCC को लेकर व्यापक सार्वजनिक बहस जारी है और उत्तराखंड पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुका है।

आगे की प्रक्रिया

सोमवार की चर्चा के बाद कमेटी अपनी रिपोर्ट अंतिम रूप देकर राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति इन सुझावों की समीक्षा करेगी। तत्पश्चात यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता वाली कैबिनेट के समक्ष अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।

गौरतलब है कि यदि कैबिनेट से स्वीकृति मिल जाती है, तो UCC बिल को 20 जुलाई से प्रारंभ होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। यह मध्य प्रदेश को UCC लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बना सकता है।

व्यापक संदर्भ

मध्य प्रदेश में UCC की यह पहल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उस दीर्घकालिक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है, जिसे पार्टी दशकों से अपने घोषणापत्र में शामिल करती आई है। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक विविधता को देखते हुए एक समान नागरिक संहिता का क्रियान्वयन जटिल होगा। हालाँकि, समर्थकों का तर्क है कि यह लैंगिक न्याय और संवैधानिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उसकी गहराई में है — एक ही दिन में आयोगों, राजनीतिक दलों और धार्मिक नेताओं से बातचीत की गति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या यह वास्तविक सहमति-निर्माण है या केवल प्रक्रियागत औपचारिकता। उत्तराखंड का अनुभव बताता है कि UCC का मसौदा बनाना और उसे ज़मीन पर लागू करना दो अलग-अलग चुनौतियाँ हैं। 20 जुलाई की समयसीमा राजनीतिक इच्छाशक्ति तो दर्शाती है, लेकिन विविध धार्मिक और सामाजिक समुदायों की वैध चिंताओं का समाधान इतनी तेज़ रफ्तार में कितना संभव होगा, यह देखना बाकी है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) क्या है और इसकी प्रक्रिया कहाँ तक पहुँची है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड एक समान नागरिक कानून है जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा। मध्य प्रदेश में जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली कमेटी 22 जून 2026 को भोपाल में व्यापक परामर्श कर चुकी है और रिपोर्ट तैयार करने के अंतिम चरण में है।
UCC बिल मध्य प्रदेश विधानसभा में कब पेश होगा?
कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर UCC बिल 20 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। इससे पहले मुख्य सचिव अनुराग जैन की समिति और मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट इसकी समीक्षा करेगी।
जस्टिस देसाई कमेटी की बैठक में किन-किन पक्षों को शामिल किया गया?
बैठक में महिला आयोग, बाल आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, धार्मिक नेता तथा सभी विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।
कमेटी को जनता से कितने सुझाव मिले हैं?
सूत्रों के अनुसार, कमेटी को ऑनलाइन पोर्टल, सार्वजनिक सुनवाई और अन्य माध्यमों से हजारों सुझाव पहले ही प्राप्त हो चुके हैं। इन सभी सुझावों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है ताकि अंतिम मसौदे में समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।
UCC लागू होने के बाद मध्य प्रदेश का क्या महत्व होगा?
यदि मध्य प्रदेश UCC लागू करता है, तो वह उत्तराखंड के बाद यह कदम उठाने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा। यह भारतीय जनता पार्टी के दीर्घकालिक राजनीतिक एजेंडे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा और अन्य BJP-शासित राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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