10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड की राह: जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी गठित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान में यूनिफॉर्म सिविल कोड की राह: जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी गठित

सारांश

राजस्थान ने UCC की राह पर बड़ा कदम उठाया है — जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी गठित की गई है जो 'राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026' का मसौदा तैयार करेगी। विवाह, तलाक, विरासत और बहुविवाह पर प्रतिबंध जैसे प्रावधान इसमें शामिल होने की संभावना है।

मुख्य बातें

राजस्थान सरकार ने 'राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026' का मसौदा तैयार करने के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित की।
कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी।
UCC लागू करने का निर्णय 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया था।
प्रस्तावित कानून में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध , विवाह-तलाक का अनिवार्य पंजीकरण और पैतृक संपत्ति में बेटे-बेटी को समान अधिकार शामिल होंगे।
आदिवासी समुदायों के रीति-रिवाजों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया गया।
नागरिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए सीधे कमेटी को सुझाव दे सकेंगे।

राजस्थान सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए 'राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026' का मसौदा तैयार करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने सोमवार, 22 जून 2026 को जयपुर स्थित सरकारी सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। इस कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी।

कैबिनेट का फैसला और संवैधानिक आधार

पटेल ने बताया कि UCC की दिशा में कदम उठाने का निर्णय 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया था। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है और राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास करने का निर्देश देता है। साथ ही, पटेल ने स्पष्ट किया कि आदिवासी समुदायों के रीति-रिवाजों, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।

कमेटी की संरचना और सदस्य

बेढम ने कमेटी के सदस्यों का विवरण देते हुए बताया कि इसमें रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, राजस्थान उच्च न्यायालय के एडिशनल एडवोकेट जनरल बसंत सिंह छाबा, श्रीगंगानगर के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल रामस्वरूप अग्रवाल और डॉ. शुचि चौहान शामिल हैं। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) को कमेटी का सदस्य-सचिव नियुक्त किया गया है।

जनभागीदारी और परामर्श प्रक्रिया

गृह राज्य मंत्री बेढम ने बताया कि कमेटी डिविजनल स्तर पर व्यापक परामर्श करेगी ताकि प्रस्तावित कानून समावेशी, पारदर्शी और जनमत को प्रतिबिंबित करने वाला हो। नागरिक एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे कमेटी को अपने सुझाव भेज सकेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पहले ही UCC लागू कर चुका है और इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।

प्रस्तावित कानून के मुख्य प्रावधान

मंत्रियों के अनुसार, प्रस्तावित UCC का दायरा विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और गुजारा-भत्ते जैसे नागरिक मामलों को कवर करेगा — चाहे व्यक्ति का धर्म, जाति या समुदाय कोई भी हो। फिलहाल ये मामले अलग-अलग पर्सनल लॉ के तहत संचालित होते हैं।

प्रस्तावित ढाँचे में शामिल हैं: विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध, लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण, तथा पैतृक संपत्ति में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार। गौरतलब है कि ये प्रावधान लैंगिक समानता और महिला अधिकारों को मज़बूत करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

आगे की राह

राज्य सरकार का कहना है कि वह एक ऐसा संतुलित, प्रगतिशील और समावेशी कानून बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जो राजस्थान की विविध सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए सभी नागरिकों के लिए समानता और न्याय सुनिश्चित करे। कमेटी की रिपोर्ट और ड्राफ्ट विधेयक आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि राजस्थान UCC को किस रूप में अमल में लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती क्रियान्वयन में है — खासकर तब जब राज्य में विविध आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय हैं जिनकी परंपराएँ पर्सनल लॉ से गहराई से जुड़ी हैं। जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में कमेटी को विश्वसनीयता मिलती है, पर डिविजनल परामर्श की प्रक्रिया कितनी वास्तविक और समावेशी होगी, यह देखना होगा। बहुविवाह प्रतिबंध और लिव-इन पंजीकरण जैसे प्रावधान राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं और विधानसभा में इनका मार्ग सरल नहीं होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड 2026 क्या है?
यह राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तावित एक समान नागरिक संहिता है जो विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और गुजारा-भत्ते जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी नागरिकों पर — चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो — एक समान कानूनी ढाँचा लागू करेगी। इसका मसौदा तैयार करने के लिए जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में हाई-लेवल कमेटी गठित की गई है।
राजस्थान UCC कमेटी में कौन-कौन शामिल हैं?
कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। अन्य सदस्यों में रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, राजस्थान उच्च न्यायालय के एडिशनल एडवोकेट जनरल बसंत सिंह छाबा, पूर्व प्रिंसिपल रामस्वरूप अग्रवाल और डॉ. शुचि चौहान शामिल हैं। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) सदस्य-सचिव हैं।
राजस्थान UCC में बहुविवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के बारे में क्या प्रावधान हैं?
प्रस्तावित UCC ढाँचे में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण शामिल है। इसके अलावा विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण तथा पैतृक संपत्ति में पुत्र-पुत्री को समान अधिकार देने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
आदिवासी समुदायों पर राजस्थान UCC का क्या असर होगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समुदायों के रीति-रिवाजों, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि यह पहल संवैधानिक प्रावधानों के तहत आदिवासी हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए की जा रही है।
राजस्थान UCC के मसौदे में आम नागरिक कैसे भाग ले सकते हैं?
नागरिक एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे कमेटी को अपने सुझाव भेज सकेंगे। इसके अलावा कमेटी डिविजनल स्तर पर व्यापक परामर्श भी आयोजित करेगी ताकि प्रस्तावित कानून समावेशी और जनमत को प्रतिबिंबित करने वाला हो।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले