राजस्थान कैबिनेट ने यूसीसी और वृक्ष संरक्षण विधेयक को दी हरी झंडी, 20 अगस्त को विधानसभा में होंगे पेश
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान कैबिनेट ने 13 अगस्त 2026 को जयपुर में हुई बैठक में दो ऐतिहासिक विधेयकों — यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल और राजस्थान वृक्ष संरक्षण बिल — को मंजूरी दी। दोनों विधेयक 20 अगस्त से शुरू होने वाले राजस्थान विधानसभा सत्र में प्रस्तुत किए जाएंगे। यह फैसले आगामी पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले लिए गए हैं।
यूसीसी बिल: 'एक राज्य, एक कानून' की दिशा में कदम
कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि सरकार का उद्देश्य 'एक राज्य, एक कानून' के सिद्धांत को अमलीजामा पहनाना है। प्रस्तावित यूसीसी के तहत शादी, तलाक, विरासत, गुजारा-भत्ता और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को एकीकृत कानूनी ढाँचे में लाने का प्रस्ताव है।
विधेयक के अनुसार, विवाह का पंजीकरण 60 दिनों के भीतर अनिवार्य होगा। तलाक का पंजीकरण भी जरूरी होगा और लिव-इन रिलेशनशिप शुरू होने व समाप्त होने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। पंजीकरण की शर्तें पूरी न करने पर ₹10,000 का जुर्माना लगाने का प्रस्ताव है।
कानून बनने के बाद बहुविवाह पर पूर्ण रोक लगेगी। साथ ही, कुछ समुदायों में पहले लागू पाबंदियों के बिना पुनर्विवाह की सुविधा भी मिलेगी। विरासत के नियमों के तहत सभी धर्मों में बेटों और बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने का प्रावधान है। पुश्तैनी संपत्ति पर पोते-पोतियों के अधिकारों को भी संरक्षित किया जाएगा — यदि पिता की मृत्यु दादा के जीवनकाल में हो जाती है, तो भी पोते का अधिकार बना रहेगा।
उल्लेखनीय है कि आदिवासी समुदायों के रीति-रिवाज और परंपराएँ इस प्रस्तावित कानून के दायरे से बाहर रखी गई हैं।
राजस्थान वृक्ष संरक्षण बिल: 29 प्रजातियाँ संरक्षित
कैबिनेट ने राजस्थान वृक्ष संरक्षण बिल को भी स्वीकृति दी, जिसके तहत 29 विशेष प्रजातियों के पेड़ों को काटने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इनमें खेजड़ी (कल्पवृक्ष के रूप में पूजनीय) और रोहिडा (राजस्थान का राज्य वृक्ष) प्रमुख हैं। मंत्री जोगाराम पटेल के अनुसार, यह कदम आध्यात्मिक गुरुओं और पर्यावरणविदों की भावनाओं का सम्मान करते हुए पारिस्थितिक संरक्षण को मजबूत करेगा।
बिना अनुमति संरक्षित पेड़ काटने पर ₹1 लाख तक का जुर्माना और एक साल तक की कैद का प्रावधान है। ये नियम निजी भूमि पर मौजूद पेड़ों पर भी लागू होंगे। विशेष परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति से पेड़ काटने की छूट मिल सकती है, लेकिन इसके बदले कम्पेन्सेटरी प्लांटेशन अनिवार्य होगी — काटे गए पेड़ों की संख्या से 10 प्रतिशत अधिक पेड़ लगाने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी आवेदक को लेनी होगी। यदि आवेदक पेड़ नहीं लगा सकता, तो निर्धारित राशि सरकार के पास जमा करनी होगी।
सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन में राहत
कैबिनेट ने राज्य सरकार के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए प्रमोशन हेतु अनिवार्य सेवा अवधि में दो साल की छूट को भी मंजूरी दी। यह घोषणा राज्य बजट में पहले ही की जा चुकी थी, परंतु कैबिनेट अनुमोदन न होने के कारण अधिसूचना जारी नहीं हो पाई थी। जो कर्मचारी पिछले तीन वर्षों में इस लाभ से वंचित रहे, वे अब निर्धारित शर्तों के तहत इसके पात्र होंगे।
चुनाव से पहले बड़े फैसले
यह सभी निर्णय ऐसे समय में आए हैं जब राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं और आदर्श आचार संहिता लागू होने की संभावना है। गौरतलब है कि यूसीसी जैसे संवेदनशील विधेयक को आचार संहिता से पहले विधानसभा में लाने की रणनीति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 20 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इन विधेयकों पर विस्तृत बहस अपेक्षित है।