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राजस्थान यूसीसी पैनल ने 19 सवालों पर जनमत माँगा, 25 जुलाई तक ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित

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राजस्थान यूसीसी पैनल ने 19 सवालों पर जनमत माँगा, 25 जुलाई तक ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित

सारांश

राजस्थान में यूसीसी बिल से पहले जनमत की अनोखी पहल — जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली कमिटी 19 सवालों पर राय माँग रही है, जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन प्रमुख मुद्दा है। सुझाव 25 जुलाई तक आमंत्रित।

मुख्य बातें

राजस्थान यूसीसी हाई-पावर्ड कमिटी ने 19 सवालों पर जनता से राय माँगी है, जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप, तलाक और संपत्ति अधिकार शामिल हैं।
ऑनलाइन सुझाव राज्य के विशेष यूसीसी पोर्टल पर 25 जुलाई 2026 तक भेजे जा सकते हैं।
कमिटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
जयपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा और भरतपुर में 7 से 14 जुलाई के बीच जन-सुनवाइयाँ निर्धारित हैं।
जनप्रतिक्रियाओं के आधार पर तैयार ड्राफ्ट बिल राजस्थान विधानसभा के अगले सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद है।

राजस्थान सरकार की यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) हाई-पावर्ड कमिटी ने 6 जुलाई 2026 को जनता से 19 अहम सवालों पर राय माँगी है, जिसमें लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से लेकर तलाक, विरासत और संपत्ति अधिकारों तक के मुद्दे शामिल हैं। नागरिक 25 जुलाई 2026 तक राज्य के विशेष यूसीसी पोर्टल पर अपने सुझाव ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। जनता की प्रतिक्रियाओं को समेटकर ड्राफ्ट बिल राजस्थान विधानसभा के अगले सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद है।

कमिटी की संरचना और नेतृत्व

सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित इस हाई-पावर्ड कमिटी ने राज्य के विभिन्न डिवीजनल हेडक्वार्टर का दौरा शुरू किया है। कमिटी ऑनलाइन पोर्टल के साथ-साथ आमने-सामने की जन-सुनवाइयों के माध्यम से नागरिकों की राय एकत्र कर रही है। यह ढाँचा सुनिश्चित करता है कि डिजिटल और ग़ैर-डिजिटल दोनों तरह के नागरिक इस प्रक्रिया में भाग ले सकें।

19 सवालों के प्रमुख विषय

कमिटी के सामने रखे गए सवालों में संविधान के अनुच्छेद 44 की जानकारी, यूसीसी की संवैधानिक वैधता, लैंगिक समानता, तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, और सभी समुदायों के लिए एकसमान भरण-पोषण कानून जैसे मुद्दे शामिल हैं। विशेष रूप से, कमिटी यह जानना चाहती है कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप समाप्त होने पर तलाक से संबंधित कानूनी प्रावधान लागू होने चाहिए — जो अब तक भारतीय कानून में अनिर्धारित क्षेत्र रहा है। इसके अलावा संपत्ति में पुरुषों और महिलाओं के समान अधिकार और पारिवारिक विवादों पर यूसीसी के संभावित असर पर भी राय माँगी गई है।

जन-सुनवाइयों का कार्यक्रम

कमिटी ने राज्य के पाँच प्रमुख स्थानों पर जन-सुनवाइयाँ निर्धारित की हैं। जयपुर में समिति सदस्य शत्रुघ्न सिंह की उपस्थिति में 10-11 जुलाई को सुनवाई होगी। अजमेर में समिति सदस्य बसंत सिंह छाबा की उपस्थिति में 7 जुलाई को सुनवाई तय है। उदयपुर में 13-14 जुलाई और कोटा में 7-8 जुलाई को सुनवाइयाँ होंगी, जबकि भरतपुर में 9-10 जुलाई को समिति सदस्य रामस्वरूप अग्रवाल सुनवाई करेंगे।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड पहले ही यूसीसी लागू कर चुका है और केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी लाने का दबाव बना हुआ है। राजस्थान की यह परामर्श प्रक्रिया उस दृष्टिकोण से अलग है, जिसमें विधेयक पहले पेश करके बाद में संशोधन किए जाते हैं। गौरतलब है कि यूसीसी के प्रावधान सभी धर्मों और समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित करेंगे, इसलिए इस परामर्श प्रक्रिया का व्यापक सामाजिक महत्व है।

आगे की राह

अधिकारियों के अनुसार, 25 जुलाई 2026 की समयसीमा के बाद कमिटी सभी प्रतिक्रियाओं को संकलित कर ड्राफ्ट बिल तैयार करेगी। इसके बाद इसे राज्य सरकार के विचार के लिए सौंपा जाएगा और फिर राजस्थान विधानसभा के अगले सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। यह प्रक्रिया राजस्थान में यूसीसी के कानूनी स्वरूप को अंतिम रूप देने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 19 प्रश्नों की यह सूची वास्तव में खुली राय माँगती है या पहले से तय निष्कर्ष की ओर जनमत को आकार देती है। उत्तराखंड ने यूसीसी बिना ऐसी व्यापक सार्वजनिक प्रक्रिया के लागू किया, जबकि राजस्थान का यह मॉडल अधिक पारदर्शी दिखता है — पर यह भी देखना होगा कि जनता की आपत्तियाँ, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों की, ड्राफ्ट में वास्तव में कितनी जगह पाती हैं। लिव-इन रिलेशनशिप रजिस्ट्रेशन जैसे प्रावधान निजता के अधिकार से टकराव की संभावना रखते हैं, जो सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती का आधार बन सकते हैं।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान यूसीसी कमिटी के 19 सवाल किन विषयों पर हैं?
ये 19 सवाल मुख्यतः शादी, तलाक, विरासत, संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन पर केंद्रित हैं। इनमें संविधान के अनुच्छेद 44, लैंगिक समानता और सभी समुदायों के लिए एकसमान भरण-पोषण कानून जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।
राजस्थान यूसीसी पोर्टल पर सुझाव भेजने की अंतिम तिथि क्या है?
नागरिक राज्य के विशेष यूसीसी पोर्टल के माध्यम से 25 जुलाई 2026 तक अपने सुझाव ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा निर्धारित जन-सुनवाइयों में भाग लेकर भी राय दी जा सकती है।
राजस्थान यूसीसी हाई-पावर्ड कमिटी का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस कमिटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। कमिटी में अन्य सदस्यों में शत्रुघ्न सिंह, बसंत सिंह छाबा और रामस्वरूप अग्रवाल शामिल हैं।
राजस्थान में यूसीसी जन-सुनवाइयाँ कहाँ-कहाँ होंगी?
जयपुर (10-11 जुलाई), अजमेर (7 जुलाई), उदयपुर (13-14 जुलाई), कोटा (7-8 जुलाई) और भरतपुर (9-10 जुलाई) में जन-सुनवाइयाँ निर्धारित हैं। प्रत्येक स्थान पर एक निर्धारित समिति सदस्य सुनवाई का नेतृत्व करेंगे।
राजस्थान यूसीसी ड्राफ्ट बिल कब विधानसभा में पेश होगा?
अधिकारियों के अनुसार, 25 जुलाई तक जनप्रतिक्रियाएँ एकत्र होने के बाद कमिटी ड्राफ्ट बिल तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद इसे राजस्थान विधानसभा के अगले सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद है, हालाँकि सटीक तिथि अभी घोषित नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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