26 जून 2026
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छत्तीसगढ़ में यूसीसी की राह: जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय कमेटी गठित

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छत्तीसगढ़ में यूसीसी की राह: जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय कमेटी गठित

सारांश

छत्तीसगढ़ सरकार ने यूसीसी लागू करने की दिशा में पहला ठोस कदम उठाया है — सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। यह BJP का प्रमुख चुनावी वादा था और अब छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश के साथ उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है जो यूसीसी पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने 26 जून 2026 को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) का मसौदा तैयार करने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठन को मंजूरी दी।
कमेटी की अध्यक्षता जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई करेंगी, जो सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं।
पाँच सदस्यीय पैनल में सेवानिवृत्त नौकरशाह, कानूनी विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं।
कमेटी विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने सहित पर्सनल कानूनों का अध्ययन कर सरकार को सिफारिशें देगी।
पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश पहले ही इस प्रक्रिया में आगे है; मॉनसून सत्र में विधेयक पेश होने की संभावना।
यह कदम भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख चुनावी वादों में से एक को पूरा करने की दिशा में है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने 26 जून 2026 को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में औपचारिक कदम उठाते हुए जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक पाँच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। कैबिनेट की मंजूरी से बनी यह समिति यूसीसी का मसौदा तैयार करेगी, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख चुनावी वादों में से एक था।

कमेटी की संरचना और जिम्मेदारी

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं और महत्वपूर्ण संवैधानिक तथा कानूनी पैनलों का नेतृत्व करने के लिए जानी जाती हैं। कमेटी में उनके साथ सेवानिवृत्त नौकरशाह, वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ और अनुभवी अधिवक्ता शामिल हैं।

समिति का काम मौजूदा कानूनी ढाँचे की समीक्षा करना, रायपुर सहित पूरे राज्य में यूसीसी की व्यावहारिक संभावनाओं का आकलन करना और सरकार को विस्तृत सिफारिशें सौंपना है।

किन विषयों पर होगा अध्ययन

आने वाले महीनों में यह कमेटी विभिन्न समुदायों में प्रचलित विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत, उत्तराधिकार, गोद लेने और अभिभावकत्व से जुड़े पर्सनल कानूनों का गहन अध्ययन करेगी। इसके अतिरिक्त सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के अहम फैसलों की समीक्षा, कानूनी विशेषज्ञों से परामर्श, सामाजिक संगठनों से संवाद और विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा भी प्रस्तावित है।

पड़ोसी राज्यों से तुलना

यह ऐसे समय में आया है जब पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश पहले ही यूसीसी की प्रक्रिया शुरू कर चुका है और विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र में संबंधित विधेयक पेश किए जाने की संभावना बताई जा रही है। इस कदम के साथ छत्तीसगढ़ उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जो यूसीसी के अपने-अपने संस्करण पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

राजनीतिक और कानूनी महत्व

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी पर लंबे समय से बहस जारी है, लेकिन राज्य स्तर पर इसे लागू करना एक जटिल और संवेदनशील प्रक्रिया है। सरकार के अनुसार, इस कमेटी के गठन का उद्देश्य पर्सनल कानूनों को समानता और न्याय के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप बनाना है, साथ ही सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता की संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना है।

आगे क्या होगा

कमेटी द्वारा मसौदा तैयार होने के बाद इस पर व्यापक सार्वजनिक और विधायी चर्चा अपेक्षित है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया में अभी कई महीने लग सकते हैं, और अंतिम स्वरूप राज्य में पर्सनल कानूनों की व्याख्या और क्रियान्वयन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा मसौदे के स्तर पर होगी — विशेष रूप से आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में, जहाँ परंपरागत पर्सनल कानून और संवैधानिक संरक्षण के बीच टकराव की संभावना अधिक है। जस्टिस देसाई की साख कमेटी को विश्वसनीयता देती है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या पैनल की सिफारिशें वास्तव में सभी समुदायों की भागीदारी पर आधारित होंगी या केवल औपचारिकता बनकर रह जाएँगी। उत्तराखंड यूसीसी का अनुभव बताता है कि कानून बनाना और उसे ज़मीन पर लागू करना दो अलग चुनौतियाँ हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ में यूसीसी कमेटी क्या है और इसका काम क्या होगा?
यह 26 जून 2026 को छत्तीसगढ़ कैबिनेट द्वारा गठित पाँच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति है, जिसे राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड का कानूनी मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। यह कमेटी विभिन्न समुदायों के पर्सनल कानूनों का अध्ययन कर सरकार को विस्तृत सिफारिशें सौंपेगी।
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कौन हैं?
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं, जो महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी पैनलों का नेतृत्व करने के लिए जानी जाती हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ यूसीसी कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
छत्तीसगढ़ में यूसीसी कब लागू होगा?
अभी कमेटी गठन का पहला चरण पूरा हुआ है; मसौदा तैयार होने में कई महीने लग सकते हैं। इसके बाद व्यापक सार्वजनिक और विधायी चर्चा होगी, जिसके बाद ही यूसीसी को कानूनी रूप दिया जा सकेगा।
यूसीसी में कौन-कौन से पर्सनल कानून शामिल होंगे?
कमेटी विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत, उत्तराधिकार, गोद लेने और अभिभावकत्व से जुड़े पर्सनल कानूनों का अध्ययन करेगी। इसके लिए विभिन्न धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से भी परामर्श किया जाएगा।
क्या अन्य राज्यों में भी यूसीसी लागू हो रहा है?
हाँ, पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश पहले ही यूसीसी की प्रक्रिया शुरू कर चुका है और विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र में विधेयक पेश होने की संभावना है। इसके अलावा उत्तराखंड यूसीसी पारित करने वाला पहला राज्य बन चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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