11 अगस्त 2026
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जापान के रक्षा श्वेत पत्र पर उत्तर कोरिया का तीखा हमला, सैन्य विस्तार का 'बहाना' बताया

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जापान के रक्षा श्वेत पत्र पर उत्तर कोरिया का तीखा हमला, सैन्य विस्तार का 'बहाना' बताया

सारांश

उत्तर कोरिया ने जापान के नए रक्षा श्वेत पत्र को 'युद्ध मशीन' का कानूनी आधार बताकर खारिज किया — लेकिन सियोल के विशेषज्ञों के लिए यह कोई नई बात नहीं है। असली सवाल यह है कि प्योंगयांग की यह आलोचना जापान-अमेरिका-दक्षिण कोरिया के बढ़ते त्रिपक्षीय सहयोग के बीच क्षेत्रीय तनाव को किस दिशा में ले जाएगी।

मुख्य बातें

उत्तर कोरिया ने 11 अगस्त को जापान के रक्षा श्वेत पत्र को सैन्य विस्तार का 'बहाना' और 'युद्ध मशीन' का कानूनी आधार बताया।
आलोचना केसीएनए और 'रोडोंग सिनमुन' में प्रकाशित विश्लेषक कांग वॉन-चोल के लेख के ज़रिए सामने आई।
जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी पर आरोप — श्वेत पत्र के बाद उन्होंने सैन्य क्षमता और मज़बूत करने की बात कही।
जापान के श्वेत पत्र में ड्रोन, AI और सहयोगी देशों के साथ घनिष्ठ सहयोग पर ज़ोर दिया गया है।
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा — ऐसी आलोचना हर साल आती है, लेकिन हाल में इसकी आवृत्ति बढ़ी है।

उत्तर कोरिया ने मंगलवार, 11 अगस्त को जापान के नवीनतम रक्षा श्वेत पत्र (डिफेंस व्हाइट पेपर) की कड़ी निंदा करते हुए इसे टोक्यो के सैन्य विस्तार को वैधता दिलाने का एक सुनियोजित प्रयास करार दिया। प्योंगयांग ने इस दस्तावेज़ को जापान की 'युद्ध मशीन के संचालन' के लिए कानूनी आधार तैयार करने वाला हथियार बताया।

उत्तर कोरिया की आधिकारिक प्रतिक्रिया

यह आलोचना अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक कांग वॉन-चोल के एक लेख के माध्यम से सामने आई, जो उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) और देश के सर्वाधिक पठित अखबार 'रोडोंग सिनमुन' में प्रकाशित हुआ। कांग ने लिखा कि यह 'व्हाइट पेपर' ऐसे समय में जारी किया गया है जब 'जापान दोबारा सैन्य ताकत बढ़ाने की महत्वाकांक्षा के साथ तेज़ी से सैन्यीकरण की ओर बढ़ रहा है।'

कांग ने आरोप लगाया कि जापान ने अपने 'लापरवाह' सैन्य विस्तार को जायज़ ठहराने के लिए इस दस्तावेज़ में बिना किसी ठोस आधार के उत्तर कोरिया को 'गंभीर और तत्काल खतरा' बताया है।

कांग वॉन-चोल के प्रमुख आरोप

कांग ने कहा, 'जापान ने अपने पिछले अपराधों को नकारने और सैन्य शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा को राष्ट्रीय नीति बना लिया है। साथ ही वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ गठबंधन को लगातार मज़बूत कर रहा है। ऐसे में पड़ोसी देशों से कथित खतरे का हवाला देना सच को उल्टा पेश करने जैसा है।'

उन्होंने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि 'व्हाइट पेपर' जारी होने के बाद कोइजुमी ने देश की सैन्य क्षमताओं को और मज़बूत करने की बात कही, जिसे कांग ने टोक्यो के सैन्यीकरण का 'एक और सबूत' बताया। कांग ने कहा, 'जापान चाहे अपनी आक्रामक मंशा को कितनी भी बार 'रक्षा' का नाम दे, लेकिन वह क्षेत्र में शांति को खतरे में डालने और तनाव बढ़ाने वाली अपनी असली भूमिका नहीं छिपा सकता।'

उत्तर कोरिया के अपने सैन्य विस्तार का बचाव

उल्लेखनीय है कि कांग ने जापान की आलोचना के साथ-साथ उत्तर कोरिया के अपने सैन्य विस्तार का भी बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि दूसरे देशों की कथित शत्रुतापूर्ण नीतियों का मुकाबला करने के लिए प्योंगयांग की सैन्य क्षमता को मज़बूत करना अनिवार्य है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया स्वयं अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं का आक्रामक विस्तार कर रहा है।

जापान का रक्षा श्वेत पत्र: मुख्य बातें

जापान ने पिछले मंगलवार को सनाए तकाइची सरकार के तहत अपना पहला रक्षा 'व्हाइट पेपर' जारी किया था। इस दस्तावेज़ में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों को सेना में शामिल करने और क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोगी देशों के साथ घनिष्ठ सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया है।

दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय इस आलोचना को अधिक महत्व नहीं देता, क्योंकि जापान के रक्षा श्वेत पत्र पर उत्तर कोरिया की ओर से ऐसी प्रतिक्रिया 'लगभग हर साल' देखने को मिलती है। हालाँकि, अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में ऐसी आलोचनाओं की आवृत्ति बढ़ी है — विशेष रूप से दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के बीच बढ़ते त्रिपक्षीय सुरक्षा सहयोग को लेकर। गौरतलब है कि यह तीनों देशों के बीच बढ़ता सामरिक समन्वय प्योंगयांग की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अमेरिका और दक्षिण कोरिया का त्रिपक्षीय सुरक्षा ढाँचा तेज़ी से संस्थागत रूप ले रहा है, और टोक्यो अपने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सैन्य संयम को व्यवस्थित ढंग से शिथिल कर रहा है। प्योंगयांग की असली चिंता जापान का श्वेत पत्र नहीं, बल्कि यह बदलता क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन है। विडंबना यह है कि उत्तर कोरिया की अपनी मिसाइल और परमाणु गतिविधियाँ ही जापान के सैन्य आधुनिकीकरण को सबसे बड़ा राजनीतिक औचित्य प्रदान करती हैं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर कोरिया ने जापान के रक्षा श्वेत पत्र की आलोचना क्यों की?
उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया कि जापान ने इस दस्तावेज़ में बिना किसी ठोस आधार के उसे 'गंभीर और तत्काल खतरा' बताकर अपने सैन्य विस्तार को जायज़ ठहराने की कोशिश की है। प्योंगयांग का कहना है कि यह 'व्हाइट पेपर' जापान की 'युद्ध मशीन' के लिए कानूनी आधार तैयार करने वाला दस्तावेज़ है।
जापान के रक्षा श्वेत पत्र में क्या है?
जापान ने सनाए तकाइची सरकार के तहत यह श्वेत पत्र जारी किया, जिसमें ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को सेना में शामिल करने और सहयोगी देशों के साथ घनिष्ठ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों — जिनमें उत्तर कोरिया का उल्लेख भी है — से निपटने की रणनीति शामिल है।
दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया की इस आलोचना पर क्या कहा?
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा कि वह इस आलोचना को अधिक महत्व नहीं देता, क्योंकि जापान के रक्षा श्वेत पत्र पर उत्तर कोरिया की नकारात्मक प्रतिक्रिया लगभग हर साल आती है। हालाँकि मंत्रालय ने माना कि हाल के वर्षों में ऐसी आलोचनाओं की संख्या बढ़ी है।
कांग वॉन-चोल कौन हैं और उनका लेख कहाँ प्रकाशित हुआ?
कांग वॉन-चोल उत्तर कोरिया के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक हैं। उनका यह लेख उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए और देश के सर्वाधिक पठित अखबार 'रोडोंग सिनमुन' में प्रकाशित हुआ, जो प्योंगयांग की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व करता है।
क्या उत्तर कोरिया-जापान तनाव का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के बीच बढ़ता त्रिपक्षीय सुरक्षा सहयोग उत्तर कोरिया की सबसे बड़ी चिंता बन चुका है। प्योंगयांग ने इस त्रिपक्षीय सहयोग की भी तीखी आलोचना की है, जो संकेत देता है कि क्षेत्रीय तनाव आने वाले समय में और गहरा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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