6 अगस्त 2026
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चीन का जापान के रक्षा श्वेत पत्र 2026 पर कड़ा विरोध, 'नए सैन्यवाद' का आरोप

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चीन का जापान के रक्षा श्वेत पत्र 2026 पर कड़ा विरोध, 'नए सैन्यवाद' का आरोप

सारांश

चीन ने जापान के रक्षा श्वेत पत्र 2026 को सीधे खारिज किया — इसे 'नए सैन्यवाद' की आड़ बताते हुए। बीजिंग का आरोप है कि टोक्यो 'चीन से खतरे' के बहाने अपने सैन्य प्रतिबंध तोड़ रहा है और ताइवान पर 'लाल रेखा' पार करने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

चीनी प्रतिरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता छन शी ने 4 अगस्त 2026 को जापान के रक्षा श्वेत पत्र 2026 पर कड़ा विरोध जताया।
चीन का आरोप है कि श्वेत पत्र में 'चीन से खतरे' को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सैन्य प्रतिबंधों में ढील देने का बहाना बनाया गया है।
जापान के रक्षा खर्च में वृद्धि , लंबी दूरी की हमला क्षमता और अंतरिक्ष के हथियारीकरण को चीन ने 'नए सैन्यवाद' की संज्ञा दी।
चीन ने ताइवान को 'लाल रेखा' करार दिया और जापान से अपने अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप न करने की माँग की।
बीजिंग ने जापान से द्वितीय विश्व युद्ध के आक्रामकता के इतिहास पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

चीनी प्रतिरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता छन शी ने 4 अगस्त 2026 को जापान के रक्षा श्वेत पत्र 2026 की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ 'गलत धारणाओं' से भरा हुआ है और क्षेत्रीय शांति के लिए वास्तविक खतरा उत्पन्न करता है। बीजिंग ने स्पष्ट किया कि वह इस श्वेत पत्र से 'बेहद असंतुष्ट' है और इसका 'कड़ा विरोध' करता है।

श्वेत पत्र पर चीन की मुख्य आपत्तियाँ

प्रवक्ता छन शी के अनुसार, जापान के नए रक्षा श्वेत पत्र में 'आसपास के इलाके में सुरक्षा संकट' को जान-बूझकर बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है और 'चीन से खतरे' का कथित बयान प्रचारित किया गया है। चीन का आरोप है कि यह दस्तावेज़ असल में अपने सैन्य प्रतिबंधों में ढील देने का बहाना है।

जापान के सैन्य विस्तार पर चिंता

प्रवक्ता ने कहा कि जापानी अधिकारियों ने 'रक्षा केंद्रित नीति' की आड़ में 'तीन सुरक्षा दस्तावेज़' के संशोधन को गति दी है। इसके साथ ही रक्षा खर्च में लगातार वृद्धि, लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता का विकास, और अंतरिक्ष के हथियारीकरण को आगे बढ़ाया जा रहा है। छन शी ने यह भी कहा कि जापान ने सैन्य उद्योग के विस्तार को आर्थिक विकास के कारक के रूप में पेश किया है, जिसे चीन 'नए तरह का सैन्यवाद' मानता है। चीन का कहना है कि यह प्रवृत्ति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।

ताइवान मुद्दे पर चीन की 'लाल रेखा'

प्रवक्ता छन शी ने ताइवान के संदर्भ में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला चीन की प्रभुसत्ता व प्रादेशिक अखंडता से जुड़ा है और चीन-जापान संबंधों के राजनीतिक आधार का हिस्सा है। उन्होंने इसे एक ऐसी 'लाल रेखा' बताया जिसे किसी भी परिस्थिति में पार नहीं किया जा सकता।

चीन की जापान से माँग

चीनी प्रतिरक्षा मंत्रालय ने जापान से आग्रह किया कि वह अपने आक्रामकता के इतिहास पर गहराई से विचार करे, चीन के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप बंद करे, और जापानी जनता व अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना बंद करे। बीजिंग ने चेतावनी दी कि जापान को 'पुनःसैन्यीकरण' के रास्ते पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक तनाव लगातार बढ़ रहा है और जापान अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जापान के रक्षा श्वेत पत्र 2026 पर चीन ने क्या कहा?
चीनी प्रतिरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता छन शी ने 4 अगस्त 2026 को कहा कि जापान का रक्षा श्वेत पत्र 'गलत धारणाओं से भरा' है और इसमें 'चीन से खतरे' को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। चीन ने इस पर 'कड़ा विरोध' दर्ज कराया।
चीन ने जापान पर 'नए सैन्यवाद' का आरोप क्यों लगाया?
चीन का कहना है कि जापान ने 'तीन सुरक्षा दस्तावेज़' संशोधित कर रक्षा खर्च बढ़ाया, लंबी दूरी की हमला क्षमता विकसित की और अंतरिक्ष के हथियारीकरण को आगे बढ़ाया। इसे चीन ने 'नए तरह का सैन्यवाद' करार दिया जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए चुनौती है।
ताइवान को लेकर चीन ने जापान को क्या चेतावनी दी?
प्रवक्ता छन शी ने कहा कि ताइवान का मामला चीन की प्रभुसत्ता और प्रादेशिक अखंडता से जुड़ा है और यह एक 'लाल रेखा' है जिसे पार नहीं किया जा सकता। चीन ने जापान से चीन के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप बंद करने की माँग की।
चीन ने जापान से क्या माँगें रखीं?
बीजिंग ने जापान से आग्रह किया कि वह अपने आक्रामकता के इतिहास पर गहराई से विचार करे, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना बंद करे और 'पुनःसैन्यीकरण' के रास्ते पर आगे न बढ़े।
यह विवाद चीन-जापान संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक तनाव बढ़ रहा है और जापान अपनी रक्षा नीति में दशकों बाद ऐतिहासिक बदलाव कर रहा है। चीन का कड़ा विरोध दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को और जटिल बना सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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