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चीन का जापान के 2026 रक्षा श्वेत पत्र पर कड़ा विरोध, 'नए सैन्यवाद' का लगाया आरोप

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चीन का जापान के 2026 रक्षा श्वेत पत्र पर कड़ा विरोध, 'नए सैन्यवाद' का लगाया आरोप

सारांश

चीन ने जापान के 2026 रक्षा श्वेत पत्र को 'गलत धारणाओं से भरा' करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है। बीजिंग का आरोप है कि टोक्यो 'चीन खतरे' का बहाना बनाकर सैन्य प्रतिबंध हटा रहा है और 'नए सैन्यवाद' की राह पर है — जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक है।

मुख्य बातें

चीनी प्रतिरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता छन शी ने 4 अगस्त 2026 को जापान के 2026 रक्षा श्वेत पत्र की कड़ी आलोचना की।
चीन ने श्वेत पत्र को 'गलत धारणाओं से भरा' बताया और कहा कि इसमें 'चीन से खतरे' को अतिरंजित रूप में पेश किया गया है।
जापान पर 'नए तरह के सैन्यवाद' का आरोप लगाया गया — जिसमें रक्षा खर्च वृद्धि, लंबी दूरी की हमला क्षमता और अंतरिक्ष के हथियारीकरण का उल्लेख है।
ताइवान को चीन ने 'लाल रेखा' घोषित किया और जापान से आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करने की माँग की।
चीन ने जापान से 'पुनःसैन्यीकरण के गलत रास्ते' से बाहर निकलने का आग्रह किया।

चीनी प्रतिरक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता छन शी ने 4 अगस्त 2026 को जापान के वर्ष 2026 के रक्षा श्वेत पत्र की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह दस्तावेज़ 'गलत धारणाओं से भरा हुआ' है और इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। चीन ने इस पर 'गहरी असंतुष्टि' जताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

श्वेत पत्र पर चीन की मुख्य आपत्तियाँ

प्रवक्ता छन शी के अनुसार, जापान के रक्षा श्वेत पत्र में 'आसपास के इलाके में सुरक्षा संकट' को अतिरंजित रूप में प्रस्तुत किया गया है और तथाकथित 'चीन से खतरे' के बयान का प्रचार किया गया है। चीन का मानना है कि यह जापान द्वारा अपने सैन्य प्रतिबंधों में ढील देने का एक सुनियोजित बहाना है।

प्रवक्ता ने आगे कहा कि जापानी अधिकारियों ने 'रक्षा केंद्रित नीति' की आड़ में 'तीन सुरक्षा दस्तावेज़ों' के संशोधन को गति दी है। साथ ही रक्षा खर्च में लगातार वृद्धि की जा रही है, लंबी दूरी तक हमला करने की सैन्य क्षमता विकसित की जा रही है और अंतरिक्ष के हथियारीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।

जापान पर 'नए सैन्यवाद' का आरोप

चीनी प्रवक्ता ने जापान पर सैन्य उद्योग के विस्तार को 'आर्थिक विकास के कारक' के रूप में प्रस्तुत करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जापान का यह 'नए तरह का सैन्यवाद' द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए 'वास्तविक खतरा' है।

यह ऐसे समय में आया है जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव पहले से ही बढ़े हुए हैं और जापान अपनी रक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

ताइवान मुद्दे पर चीन की 'लाल रेखा'

प्रवक्ता छन शी ने स्पष्ट किया कि ताइवान का मामला चीन की प्रभुसत्ता और प्रादेशिक अखंडता से सीधे जुड़ा है और यह चीन-जापान संबंधों के राजनीतिक आधार का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने इसे एक ऐसी 'लाल रेखा' करार दिया जिसे पार नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि जापान ने हाल के वर्षों में ताइवान जलसंधि की स्थिरता को लेकर अपनी चिंताएँ सार्वजनिक रूप से व्यक्त की हैं, जिसे बीजिंग अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानता है।

चीन की जापान से माँग

चीनी प्रतिरक्षा मंत्रालय ने जापान से आग्रह किया कि वह अपने 'आक्रामकता के इतिहास' पर गहराई से विचार करे, चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करे और 'पुनःसैन्यीकरण' के रास्ते पर आगे न बढ़े। चीन का कहना है कि जापान, अपने नागरिकों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना बंद करे।

आलोचकों का कहना है कि चीन की यह प्रतिक्रिया उस व्यापक क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है, जिसमें दोनों देशों के बीच पूर्वी चीन सागर में क्षेत्रीय विवाद और सैन्य उपस्थिति को लेकर तनाव लंबे समय से बना हुआ है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद की दिशा पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और 2026 का श्वेत पत्र उसी की अगली कड़ी है। असली सवाल यह है कि क्या चीन की यह कूटनीतिक आलोचना जापान की नीति को प्रभावित कर सकती है — या यह केवल घरेलू दर्शकों के लिए है। ताइवान पर 'लाल रेखा' की चेतावनी इस तनाव को और गहरा करती है, और एशिया-प्रशांत में स्थिरता के लिए दोनों पक्षों के बीच संवाद की कमी चिंताजनक बनी हुई है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जापान के 2026 रक्षा श्वेत पत्र पर चीन ने क्या आपत्ति जताई है?
चीनी प्रतिरक्षा मंत्रालय ने जापान के 2026 रक्षा श्वेत पत्र को 'गलत धारणाओं से भरा' बताया है। चीन का कहना है कि इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा संकट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है और 'चीन से खतरे' का प्रचार किया गया है, जो जापान के सैन्य प्रतिबंध हटाने का बहाना है।
चीन ने जापान पर 'नए सैन्यवाद' का आरोप क्यों लगाया?
चीन के अनुसार जापान 'रक्षा केंद्रित नीति' की आड़ में रक्षा खर्च बढ़ा रहा है, लंबी दूरी की हमला क्षमता विकसित कर रहा है और अंतरिक्ष के हथियारीकरण को बढ़ावा दे रहा है। बीजिंग का कहना है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
ताइवान मुद्दे पर चीन ने जापान को क्या चेतावनी दी?
चीन ने ताइवान को अपनी 'लाल रेखा' करार दिया और कहा कि यह मामला चीन की प्रभुसत्ता और प्रादेशिक अखंडता से जुड़ा है। चीन ने जापान से आग्रह किया कि वह ताइवान के मुद्दे पर चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करे।
चीन ने जापान से क्या माँगें रखी हैं?
चीन ने जापान से तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — अपने आक्रामकता के इतिहास पर गहराई से विचार करना, चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बंद करना और 'पुनःसैन्यीकरण के गलत रास्ते' पर आगे न बढ़ना।
जापान-चीन के बीच सैन्य तनाव की पृष्ठभूमि क्या है?
जापान ने 2022 में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में ऐतिहासिक बदलाव किए थे, जिसमें रक्षा खर्च दोगुना करने और जवाबी हमले की क्षमता विकसित करने का निर्णय शामिल था। पूर्वी चीन सागर में क्षेत्रीय विवाद और ताइवान जलसंधि की स्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लंबे समय से बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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